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इस भारतीय महिला ने लिखी कबड्डी में भारतीय महिला टीम की हार की कहानी

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 August 2018, 11:54 IST

एशियाई खेलों में भारत की महिला कबड्डी टीम को ईरान के हाथों हार का सामना करना पड़ा. बहुत से लोग शायद नहीं जानते होंगे कि ईरान की इस जीत के पीछे एक भारतीय महिला का ही हाथ रहा. इस जीत के पीछे ईरान टीम की कोच शैलजा जैन हैं जो 18 महीने पहले तक भारतीय टीम की कोच थीं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार शैलजा का कहना है कि कबड्डी फेडरेशन ने उन्हें हटा दिया था. वह कहती हैं कि भारतीय होने के नाते मुझे दुख है कि भारत को गोल्ड नहीं मिला. लेकिन, बतौर प्रोफेशनल मैं सिर्फ ईरान की टीम का भला सोचती हूं."

ईरान की टीम से करवाया योग 

वो बताती हैं, "मैंने ईरान की खिलाड़ियों की दिनचर्या में योग और प्राणायाम को शामिल किया, जिससे उन्हें काफी फायदा हुआ." रिपोर्ट के अनुसार शैलजा कहती हैं कि "मैं न केवल ईरान जाने के लिए अनिच्छुक थी बल्कि ईरान जाने के बारे में चिंतित थी, 2016 में एक महीने के ट्रायल के एक हफ्ते के भीतर ईरानियों ने वीजा औपचारिकताओं को बढ़ा दिया और उन्हें तेहरान की पहली उड़ान पर ले गए.

वह कहती हैं कि ''मैं एक शुद्ध शाकाहारी जैन हूं और आप जानते हैं कि हम में से कुछ इस्लामी देशों के बारे क्या सोचते हैं. तो ज़ाहिर है मैं ड्रेसिंग कानूनों से सावधान थी''. वह कहती हैं ''मैं चिंतित थ महिलाओं को कैसे ट्रीट किया जाता है. मुझे लग रहा था कि क्या मैं शाकाहारी भोजन प्राप्त कर पाउंगी लेकिन इनमे से कई चीजें गलत धारणाएं हैं''.

वह कहती हैं कि अगर वह ऐसा नहीं करती तो लोग उनकी लाइफ स्टोरी के बारे में नहीं जान पाते. ''ऐसा इसलिए क्योंकि मैंने ईरान के साथ एशियाई खेलों में अपनी पसंदीदा भारत को हराया और मैं एक सफल कोच हूं''. शैलाजा कहती हैं उन्होंने 2008 में ईरानी प्रस्ताव से इंकार कर दिया था क्योंकि वे उन्हें पर्याप्त भुगतान नहीं कर रहे थे.

वह कहती हैं कि ईरान ने उसे सिर-स्कार्फ पहनने के लिए कभी मजबूर नहीं किया. उस देश के कुछ नियम हैं और उन्होंने इसे सकारात्मक रूप से लिया . वह एक ओढिनि पहनती थी, जैसे सलवार कुर्ता के साथ पहनते हैं. शैलाजा का जन्म नागपुर में हुआ था और अपनी मां को कबड्डी खेलते देखकर बड़ी हुई. शैलजा कहती हैं कि "मैंने सभी खेल खेले जैसे कबड्डी, लांगडी, खो-खो. राष्ट्रीय और विश्वविद्यालय के स्तर पर खेलते हुए शैलजा ने 1980 में जलगांव में ग्रामीण पृष्ठभूमि के व्यक्ति से शादी की. जिसने उन्हें कबड्डी के लिए प्रत्साहित किया.

रिपोर्ट के अनुसार शैलजा कहती हैं ''कभी इस खेल से उन्होंने ज्यादा कमाई नहीं की, लेकिन मेरे ससुर ने मुझे एनआईएस (राष्ट्रीय खेल संस्थान) में एक कोर्स पूरा करने के लिए पैसे भेजे. वह कहती है "मैं ईरानी लड़कियों से प्यार करता हूं क्योंकि उनकी फिटनेस लाजवाब है.

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First published: 25 August 2018, 11:19 IST
 
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