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जीत पर भी विनम्र विराट और जीत का सिलसिला जारी रखने की जिजीविषा

जी राजारमन | Updated on: 21 December 2016, 8:14 IST
(अरुण शंकर/एएफ़पी)

इंग्लैंड के साथ पांच मैचों की टैस्ट सीरीज खत्म होने पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए विराट कोहली के स्वर में जो धैर्य एवं संतुलन था, उसे देख कर लग ही नहीं रहा था कि उनकी टीम ने अभी-अभी मेहमान टीम को एक पारी और एक बड़े स्कोर से हराया है. विराट शायद इंग्लैंड टीम को इस सीरीज में 4-0 से दी गई पटखनी का जश्न अपने साथी खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम में मनाएं, जिन सबकी वजह से यह संभव हुआ.

पिछले कुछ सप्ताह से विराट ऐसा कोई मौका नहीं गंवाते जब वह अपनी टीम के अपनी ही शैली के ‘ब्रांड क्रिकेट’ को सुर्खियों में लाने से चूके हों. इस सीरीज के धुआंधार मैचों से टीम को सबसे बड़ा फायदा यही हुआ है. विश्व की नंबर 1 टेस्ट क्रिकेट टीम से अपेक्षाएं बढ़ गई हैं और कोहली आश्वस्त हैं कि उनकी टीम ऐसे ही मैदान मारती रहेगी.

हार से सबक

बांग्लादेश टेस्ट की हार से उबरते हुए इंग्लैंड ने राजकोट में शुरुआत करते हुए अच्छे खेल का प्रदर्शन किया, लेकिन विराट कोहली ने सीरीज की सबसे निर्णायक पारी खेलते हुए 49 रनों से भारत को जिता ही दिया. ऐसा नहीं है कि बाद के मैचों में इंग्लैंड को बेहतर प्रदर्शन का मौका नहीं मिला लेकिन वह इसका फायदा नहीं उठा पाया. 

ऐसा कम ही देखने को मिला है जब कोई टीम टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करते हुए कुल 400 रन बनाए और लगातार दो मैच एक पारी या उससे बड़े अंतर से हार जाए. भारतीय टीम के बल्लेबाज पहले तो दबाव में खेले लेकिन फिर बड़ा स्कोर खड़ा कर इंग्लैंड टीम के बल्लेबाजों को एक के बाद एक जल्दी ही पवेलियन भेजने में भी कामयाब रहे.

इसके बावजूद भारतीय टीम को जीत के लिए कड़ी मेहनत और पक्के इरादे की जरूरत थी. पांच में से चार टॉस हारना और उसके बावजूद तीन टैस्ट मैच जीतना भारतीय टीम के जुझारूपन को दिखाता है. यहां तक कि सीरीज के अंतिम मैच के अंतिम दिन भारतीय टीम का जीत के लिए जुनून देखते ही बनता था. उसे डर था कि कहीं इंग्लैंड इस मैच को ड्रॉ न करवा दे.

कोहली की करिश्माई सोच

विराट कोहली की टीम एक बड़ी सोच, जीतने की इच्छा के साथ जिस ब्रांड का क्रिकेट खेल रही है, उससे लगता है, वह दिन दूर नहीं जब टेस्ट क्रिकेट को उसके प्रशंसक फिर से मिल जाएं. विराट और कोच अनिल कुम्बले की शानदार जोड़ी के क्रिकेट दर्शन को तुरंत समझने वाले नए क्रिकेटरों के जुड़ने से भारतीय क्रिकेट का भविष्य उज्ज्वल दिखाई दे रहा है.

अगर हम अपनी टीम की कुछ कमजोरियों को नजरंदाज कर दें तो यह ठीक नहीं होगा, जैसे भारतीय टीम की कैच पर ढीली होती पकड़ और पार्थिव पटेल उतने अच्छे विकेट कीपर साबित नहीं हुए जितने अच्छे वे बल्लेबाज हैं. अंतिम मैच में करूण नायर के नाबाद 303 रनों से पहले देखा जाए तो भारतीय टीम के पांचवें नम्बर के खिलाड़ी का स्कोर काफी कम रहा. अन्य प्रतिस्पर्द्धी मैचों में ऐसा होना भारत के लिए घाटे का सौदा हो सकता है.

चुनौती

इसके अलावा सीरीज के दौरान खिलाड़ियों का घायल होना भी चिंताजनक है. विकेट कीपर ऋधिमान साहा और लेग स्पिनर अमित मिश्रा की तबियत बिगड़ गई थी. हालांकि सफलता की आड़ में यह कमजोरी भी छिप गई. अश्विन और जडेजा ने मिल कर 54 विकेट लिए और अजय यादव एक जुझारू किकेटर के तौर पर उभरे. करूण नायर और जयन्त यादव ने भी टेस्ट क्रिकेट में यादगार लम्हे जोड़ दिए. 

कोच राहुल द्रविड़

राहुल द्रविड़ जैसे कोच से प्रशिक्षित इन खिलाड़ियों के अपने निजी उच्चतम स्कोर तक पहुंचना विराट कोहली को भी प्रभावित कर गया. सीरीज की एक उपलब्धि यह भी रही कि नए खिलाड़ियों को अच्छा मौका मिला. बीसीसीआई को क्रिकेट टीमों के ऐसे दौरे और करवाते रहने चाहिए. 

सुप्रीम कोर्ट नए साल में देखे बीसीसीआई को क्या फरमान सुनाता है? वह एक अलग पहलू है लेकिन बोर्ड को ऐसे ए श्रेणी के दौरों का समर्थन कर, ट्वेंटी-20 खेलने वाली इस पीढ़ी को लंबी अवधि के क्रिकेट मैच के लिए तैयार करने पर भी जोर देना होगा. 

ओपनिंग बल्लेबाज केएल राहुल, विकेट कीपर पार्थिव पटेल, भुवनेश्वर कुमार, इशांत शर्मा और यहां तक कि मोहम्मद शामी और उमेश यादव को भी यह सीरीज कुछ यादगार पल दे गई; किसी के अर्द्ध शतक, किसी के शतक और किसी के विकेट; कुल मिला कर भारत को जीत दिलवा गए.

खिलाड़ियों का दम

कुछ नामी खिलाड़ियों ने भी ध्यान खींचा. ओपनर एम विजय, बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा, ऑल राउंडर रवीन्द्र जडेजा, आर अश्विन के साथ ही स्किपर विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों ने एक साथ मिल कर शानदार टीम का परिचय दिया. एक दूसरे की उपलब्धियों और सफलताओं पर गर्व करने के चलते मिली सफलता से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ड्रेसिंग रूम का माहौल कितना खुशनुमा होगा.

आंकड़ों के अनुसार, कोहली ने दो शतकों सहित 655 रन बनाए, पुजारा ने 401, दो शतक जड़ने वाले विजय तीसरे भारतीय बल्लेबाज रहे. अश्विन ने दो विकेट लेकर 306 रन बनाए जबकि जडेजा ने 224 रन बनाए व 26 विकेट लिए.

साल के अंत में भारतीय टीम को मिली यह सफलता जश्न मनाने की वाजिब वजह है. सुप्रीम कोर्ट और बीसीसीआई के बीच चल रही खींचतान से बेखबर इन खिलाड़ियों ने जता दिया है कि जीत और उसका जश्न मनाना उनके अपने हाथ में है.

First published: 21 December 2016, 8:14 IST
 
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