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Birthday special: ओलंपिक जीतने वाली साइना नेहवाल नहीं खेलना चाहती थीं बैडमिंटन

आकांक्षा अवस्थी | Updated on: 17 March 2018, 11:16 IST

ओलंपिक में देश को पदक दिलाने वाली सायना नेहवाल का आज जन्मदिन है. साइना देश की पहली और एकमात्र ऐसी खिलाड़ी हैं जो बैडमिंटन में वर्ल्ड नंबर वन प्लेयर भी रही हैं. वे अब तक कई टूर्नामेंट में देश के लिए गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं. इस कामयाबी के चलते ही उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड, अर्जुन अवॉर्ड और पद्म भूषण का सम्मान भी मिल चुका है.

साइना नेहवाल का फैमिली बैकग्राउंड हरियाणा का है. साइना का जन्म 17 मार्च 1990 को हरियाणा के हिसार में हुआ था. साइना के पिता एग्रीकल्चर डिपार्टमें में पोस्टेड थे, जब उनका प्रमोशन हुआ तो पांच शहरों में ट्रांसफर का ऑफर आया. इसके बाद उन्होंने हैदराबाद को सेलेक्ट किया और उनकी पूरी फैमिली हैदराबाद शिफ्ट हो गई.

साइना नेहवाल का फैमिली बैकग्राउंड हरियाणा का है. साइना का जन्म 17 मार्च 1990 को हरियाणा के हिसार में हुआ था. साइना के पिता एग्रीकल्चर डिपार्टमें में पोस्टेड थे, जब उनका प्रमोशन हुआ तो पांच शहरों में ट्रांसफर का ऑफर आया. इसके बाद उन्होंने हैदराबाद को सेलेक्ट किया और उनकी पूरी फैमिली हैदराबाद शिफ्ट हो गई.

ट्रेनिंग के लिए की कड़ी मेहनत

साइना नेहवाल ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब मैं आठ साल की थी और मुझे प्रैक्टिस के लिए घर से 25 किलोमीटर दूर स्टेडियम जाना पड़ता था. इसके लिए मुझे सुबह चार बजे उठना पड़ता था. मेरे पिता मुझे स्कूटर से स्टेडियम ले जाते. दो घंटे वे भी वहीं रहते थे और मेरा खेल देखते. फिर वहीं से मुझे स्कूल छोड़ते. सुबह जल्दी उठने की वजह से मुझे कई बार नींद भी आ जाती थी. कही गिर न पड़ूं, इसलिए मेरी मां भी साथ आती थीं. पिता स्कूटर चलाते और मां मुझे पकड़कर बैठतीं. रोजाना करीब 50 किलोमीटर का सफर आसान नहीं था, लेकिन यह सिलसिला महीनों तक चलता रहा.

बैडमिंटन नहीं बल्कि कराटे से था साइना को लगाव

बचपन में साइना नेहवाल का पहला प्यार बैडमिंटन नहीं, बल्कि कराटे था. आपको बता दें कि वो कराटे में ब्लैक बेल्ट हैं. साइना ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पापा का हरियाणा से हैदराबाद ट्रांसफर होने से पहले ही उन्होंने कराटे खेलना शुरू कर दिया था.

साइना ने बताया था कि उन्होंने कुछ प्रतियोगिताएं भी कराटे में जीती थीं, लेकिन कराटे लायक उनकी बॉडी फिट नहीं हो पा रही थी. आठ साल की उम्र में काफी मेहनत करने के बाद भी अपने शरीर को कराटे के बड़े टूर्नामेंट के लिए तैयार नहीं कर पा रही थीं, इसलिए मजबूरन साइना को इसे छोड़ना पड़ा.

साइना ने क्यों खेलना शुरू किया बैडमिंटन

कराटे छोड़ने के बाद साइना नेहवाल ने बैडमिंटन खेलना शुरू किया. साइना ने इंटरव्यू में बताया था कि उनके मम्मी-पापा का पसंदीदा खेल होने के नाते उन्होंने बैडमिंटन रैकेट पकड़ा और कोचिंग शुरू की थी.

साइना नेहवाल साल 2012 में लंदन ओलंपिक में कांस्य जीतने वाली पहली भारतीय शटलर बनीं. इसके बाद उन्होंने वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर वन पायदान पर कब्जा किया. साइना के इस सक्सेस के पीछे पुलेला गोपीचंद का बड़ा हाथ है और उनकी ट्रेनिंग पुलेला गोपीचंद के बैडमिंटन एकेडमी में हुई, लेकिन इससे पहले साइना बैडमिंटन की ट्रेनिंग के लिए रोज 50 किलोमीटर ट्रैवल करती थीं.

राष्ट्रीय अंडर-19 चैंपियनशिप से चर्चा में आईं साइना नेहवाल

साइना नेहवाल साल 2006 में पहली बार चर्चा में आईं, जब 16 साल की उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय अंडर-19 चैंपियनशिप जीती. इसके अलावा इतिहास रचते हुए एक बार नहीं बल्कि दो बार एशियाई सेटेलाइट चैंपियनशिप जीती. उसी साल वांग यिहान के हाथों वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप के फाइनल में हारते हुए वें दूसरी स्थान पर रहीं.

First published: 17 March 2018, 11:16 IST
 
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