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गुमनामी की जिंदगी जी रहा मैराथन बॉय बुधिया

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 April 2016, 17:12 IST

महज चार वर्ष की उम्र में 65 किलोमीटर की दौड़ लगाकर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह बनाने वाला वंडर बॉय बुधिया आज की तारीख में गुमनामी के अंधेरे में जी रहा है.

सबसे युवा मैराथन धावक का खिताब हासिल करने वाले बुधिया पर बनी हिंदी फिल्म 'दुरंतो' को 63वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया. बीते कुछ समय में बुधिया सिर्फ इस फिल्म से चर्चा में आया.

2006 में पुरी से भुवनेश्वर की 65 किलोमीटर की यात्रा को साल सात घंटे और दो मिनट में पार कर सुर्खियां बटोरने वाला बुधिया ओडिशा की गलियों में गुमनाम जीवन जी रहा है.

ओडिशा के एक गरीब परिवार में 2002 को जन्मे बुधिया को उसकी मां ने महज 800 रुपये में बेच दिया. इसके बाद जूडो-कराटे के एक कोच बिरांची दास ने उसे गोद ले लिया.

बिरांची ने बुधिया को मैराथन धावक बनाने के लिए उसकी प्रतिभा को प्रशिक्षण देकर तराशा. उनके ही मार्गदर्शन का नतीजा था कि चार वर्ष की उम्र में उसने इतना बड़ा करिश्मा कर दिखाया.

सबसे युवा मैराथन धावक का खिताब हासिल करने वाले बुधिया पर बनी हिंदी फिल्म 'दुरंतो' को 63वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया

बुधिया का मैराथन दौड़ के लिए की जाने वाला प्रशिक्षण ओडिशा सरकार के बाल कल्याण विभाग को रास नहीं आया और उन्होंने इस पर प्रतिबंध लगाकर उसे भुवनेश्वर के खेल छात्रावास में भेज दिया. इसके बावजूद 14 साल का बुधिया अब भी ओलंपिक पदक जीतने की इच्छा रखता है.

चंद्रशेखरपुर के डीएवी स्कूल में आठवीं कक्षा का छात्र बुधिया ने बताया, 'मुझे अपने सपने को पूरा करने के लिए एक निजी कोच की जरूरत है. मैराथन के लिए प्रशिक्षण मिल रहा था, लेकिन मुझे 100-200 मीटर की दौड़ के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है.'

हालांकि पढ़ाई पूरी करने की चाह में बुधिया अब केवल एक घंटे अभ्यास करता है. बुधिया की मां सुकांती सिंह का राज्य सरकार पर आरोप है कि हॉस्टल में उनके बेटे को पौष्टिक भोजन नहीं दिया जा रहा है. सुकांती का कहना है कि अगर बुधिया को कोई ट्रेनिंग दे तो बेटे को हॉस्टल से निकाल लेंगी.

हालांकि राज्य सरकार ने बुधिया की मां के आरोपों का खंडन किया है. राज्य सरकार के खेल निदेशक ए.के. जेना का कहना है कि सरकार हॉस्टल में रहने वाले सभी बच्चों को पर्याप्त सुविधाएं दे रहे हैं, तो कोचिंग मुहैया कराने की कोई समस्या नहीं है.

जेना के अनुसार बुधिया को अभी जिला और राज्य स्तर के प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना बाकी है. बुधिया की उम्र अभी भी मैराथन दौड़ के लिए सही नहीं है. उसे कड़ी मेहनत जारी रखने की जरूरत है. (आईएएनएस)

First published: 11 April 2016, 17:12 IST
 
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