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क्या अदालत के आदेश के बाद भी ललित मोदी का प्रत्यर्पण संभव है?

कैसर मोहम्मद अली | Updated on: 3 March 2016, 8:50 IST
QUICK PILL
  • प्रवर्तन निदेशालय ने ललित मोदी के खिलाफ फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के उल्लंघन के आरोप में 15 और प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के अंतर्गत एक मामला दर्ज किया है.
  • मुंबई की एक सत्र अदालत ने ईडी को मोदी के प्रत्यर्पण का आवेदन करने के लिए अनुमति भी दे दी है हालांकि यह मुख्य रूप से केंद्र सरकार की इच्छा पर निर्भर करता है.

ललित मोदी एक बार फिर से सुर्खियों में आ गए हैं. इस बार मामला 2008 में आईपीएल के प्रसारण अधिकार के आवंटन और पुर्नआवंटन के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप का है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के रुख के चलते आईपीएल संस्थापक को ब्रिटेन से जल्द ही प्रत्यर्पित कर यहां लाया जा सकता है.

निदेशालय ने मोदी के खिलाफ फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के उल्लंघन के आरोप में 15 और प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के अंतर्गत एक मामला दर्ज किया है.

मोदी के खिलाफ प्रमुख आरोप यह हैंः

  • बिना मंजूरी के 2009 आईपीएल के लिए बीसीसीआई की तरफ से दक्षिण अफ्रीका में बैंक खाता खोलकर उसका संचालन करना.
  • बेहद जटिल तरीके से मल्टी स्क्रीन मीडिया और वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप को प्रसारण अधिकारों का आवंटन.

हालांकि, निकट भविष्य में मोदी का प्रत्यर्पण असंभव दिख रहा है. सरकारें लगातार इस कोशिश में असफल रही हैं. 

यहां तक की ताजा घटनाक्रम में मुंबई की एक सत्र अदालत ने ईडी को मोदी के प्रत्यर्पण का आवेदन करने के लिए अनुमति भी दे दी है. हकीकत में लंदन से मोदी को वापस भारत लाना काफी मुश्किल है क्योंकि मोदी वहां पर 2010 के मध्य से अपनी जान को खतरा बता कर वहां रह रहे हैं. यह प्रमुख रूप से केंद्र सरकार की इच्छा पर निर्भर करता है.

राजनीतिक नतीजे

पहला, ईडी को प्रत्यर्पण के लिए सुषमा स्वराज के नियंत्रण वाले विदेश मंत्रालय में आवेदन करना होगा. यह एक लंबी प्रक्रिया है और इसकी सफलता के लिए नौकरशाही से ज्यादा राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत होगी. बीते छह वर्षों की तमाम घटनाएं यह साफ जाहिर करती हैं कि मोदी की घर वापसी आसान नहीं है.

अभी ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब स्वराज ने अपने भतीजे के चलते मोदी का पक्ष लिया था. उन्होंने मोदी की कैंसर से पीड़ित पत्नी के इलाज के चलते 2014 में पुर्तगाल जाने के लिए ब्रिटिश ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स दिलवाने में भी मदद की थी.

भाजपा में तमाम ऐसे राजनेता हैं जिनके दिल में मोदी के लिए खास जगह है और कुछ से उनकी अनबन है. इसकी वजह से इस प्रक्रिया के धीमे होने की प्रबल संभावना है.

अगला कदम

अब तक प्रत्यक्ष रूप से न तो मोदी और न ही उनकी कानूनी टीम को ईडी द्वारा प्रत्यर्पण की जानकारी दी गई है. मोदी के जनरल काउंसेल महमूद एम अब्दी ने कैच को बताया, "हमें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है. न ही हमें इस मामले से जुड़ा कोई नोटिस मिला है. केवल मीडिया के जरिये ही हमें इसकी जानकारी हुई है."

यह समझने वाली बात है क्योंकि जब तक विदेश मंत्रालय इसकी संस्तुति देकर ब्रिटेन में सरकारी विभाग तक यह सूचना नहीं देता, तब तक ईडी कोई कदम नहीं उठा सकता.

तब भी इस हाईप्रोफाइल मामले में देखने वाली बात यह है कि मंत्रालय कब और किस लहजे में ईडी के अनुरोध को स्वीकार करता है. और इसके बाद भी अगला सवाल यह उठता है कि ब्रिटेन की सरकार इस पर क्या कदम उठाती है.

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के मौजूदा अध्यक्ष ललित मोदी बार-बार कहते आए हैं कि वे लंदन में भारतीय जांच एजेंसियों के सवालों का सामना करने के लिए तैयार हैं. लेकिन पता नहीं वो क्या कारण हैं जिनके चलते अब तक मोदी से पूछताछ नहीं की जा सकी है. लोग भारतीय एजेंसियों पर इसके लिए कई बार सवाल भी उठाते रहे हैं.

अनसुलझे सवाल

एक दूसरी और महत्वपूर्ण बात मोदी यह भी उठाते आए हैं कि आईपीएल के प्रसारण अधिकारों के आवंटन व अन्य अधिकारों के संबंध में फैसला लेने में केवल उन्हीं की अकेले भूमिका नहीं थी. आज नहीं तो कल बीसीसीआई और अन्य सरकारी एजेंसियों को भी इस बाबत ईडी के सवालों के जवाब देने होंगे.

उनके विरोधी आरोप लगाते हैं कि तत्कालीन अध्यक्ष शरद पवार के संरक्षण के चलते मोदी बीसीसीआई में जब चाहे आ-जा सकते थे. लेकिन कानून इसके लिए बोर्ड के सभी सदस्यों को जिम्मेदार ठहरा सकता है. कुछ भी हो मिनट्स ऑफ द मीटिंग्स में सभी के हस्ताक्षर होते हैं.

मोदी आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन और कमिश्नर थे. लेकिन बीसीसीआई कार्यालय के सभी अधिकारियों के साथ ही कुछ मशहूर पूर्व क्रिकेटर या टीम के कप्तान भी काउंसिल में शामिल थे और वे भी लिए गए कई फैसलों में पार्टी थे. अगर किसी ने भी इस पर अपनी आपत्ति जताई होगी तो उसे अब तक सामने आना बाकी है.

मोदी अक्सर कुछ सवाल पूछते आए हैं जिनका जवाब मिलना बाकी है.

  • जब बीसीसीआई की ओर से आईपीएल चेयरमैन करोड़ों रुपये से जुड़े फैसले ले रहे थे तब वो सब लोग क्या कर रहे थे?
  • क्या वे आंख बंद करके मिनट्स ऑफ द मीटिंग्स में हस्ताक्षर कर रहे थे?
  • या फिर, वे सभी लोग आईपीएल गवर्निंग काउंसिल का हिस्सा होने के नाते बीसीसीआई से मोटी रकम का चेक मिलने पर खुश थे और हॉस्पिटैलिटी का मजा उठा रहे थे?

हो सकता है कि ईडी के पक्ष में सत्र न्यायालय का जाना एक छोटा कदम हो. लेकिन यह कहानी इतनी जल्द खत्म होने वाली नहीं है.

First published: 3 March 2016, 8:50 IST
 
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