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यूरो 2016: हिंसा के बाद इंग्लैंड-रूस को यूएफा की सख्त चेतावनी

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 June 2016, 17:31 IST
(पत्रिका)

यूरो कप को शुरु हुए अभी सिर्फ तीन ही दिन हुए है लेकिन इंग्लैंड और रूस के प्रशंसको के बीच हिंसा ने मेजबान फ्रांस को चिंता में डाल दिया है.

11 जून को मार्सिली में ग्रुप बी का पहला मैच इंग्लैंड और रूस के बीच खेला गया. इस मुकाबले में जैसे ही स्टॉपेज टाइम में रूस ने बराबरी का गोल दागकर मैच को 1-1 से ड्रा कराया स्टेडियम में हिंसा शुरू हो गई.

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इंग्लैंड और रूस के समर्थकों ने एक दूसरे पर बीयर की बोतलें फेंकी. दर्शकों ने स्टेडियम की कुर्सियों को तोड़ डाला. दंगा रोधी पुलिस ने स्थिति को काबू करने के लिये आंसू गैस के गोले दागे. इस हिंसा में कम से कम 35 लोग घायल हुए हैं जिनमें 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है.

यूरो से बाहर करने की चेतावनी

इस बीच फ्रांस सरकार ने बताया है कि उन्होंने चैंपियनशिप की शुरुआत से अब तक हिंसा में शामिल 63 लोगों को गिरफ्तार किया है. सरकार ने पुलिस को स्टेडियम के आसपास मैच के एक दिन पहले से ही शराब की बिक्री और सेवन पर रोक लगाने के नए अधिकार भी दिए हैं.

साल 1998 के फुटबॉल विश्व कप के बाद से इस फ्रांसीसी शहर में हुई यह सबसे हिंसक झड़प है. 18 साल पहले मार्से में ही इंग्लिश और ट्यूनिशियन फैंस के बीच हिंसा हुई थी.

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यूरोपीयन फ़ुटबॉल संस्था यूएफा ने हिंसा की निंदा की है और कहा है कि ऐसी हिंसक गतिविधियों की खेल में कोई जगह नहीं है.

हिंसा के खिलाफ यूनियन ऑफ यूरोपीयन फुटबॉल एसोसिएशन (यूएफा) ने फैन्स के उत्पात के चलते रूस और इंग्लैंड को यूरो 2016 से बाहर निकाल देने की चेतावनी दी है. हालांकि उसने माना कि स्टेडियम की सुरक्षा व्यवस्था में भी कमी थी.

यूईएफए ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि यूईएफए कार्यकारी समिति ने दोनों देशों के फुटबॉल संघों को चेतावनी दी है कि वह किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाने में हिचकिचायेगा नहीं और यदि इस तरह की हिंसा टूर्नामेंट में दोबारा देखी गयी तो दोनों टीमों को बाहर किया जा सकता है. यूएफा ने हिंसा की जांच कराने की बात कही है.

यूएफा का सख्ती से निपटने का फैसला

यूरोपियन फुटबॉल की वैश्विक संस्था ने साथ ही कहा कि उसने दोनों देशों के फुटबॉल संघों और रूसी फुटबॉल यूनियन से उसके समर्थकों से स्टेडियम में जिम्मेदाराना तथा सम्मानजनक व्यवहार करने की अपील करने के लिए भी कहा है.

यूएफा को इस बात की आशंका है कि भविष्य में होने वाले मुकाबलों में फिर से किसी खास देश के फैन्स आपस में भिड़ सकते हैं, जिसे देखते हुए उसने इससे सख्ती से निपटने का फैसला किया है.

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गौरतलब है कि चार वर्ष पहले पोलैंड में हुये यूरो कप 2012 में रूस के फैंस की हिंसक वारदातों के कारण रूस की टीम पर कार्रवाई की गई थी और रूसी टीम के छह अंक काट लिया गया था. 

First published: 13 June 2016, 17:31 IST
 
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