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कोलकाता में 'डायमंड कोच' की याद में बनेगा स्टेडियम

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 July 2016, 13:47 IST
(फेसबुक)

फुटबॉल के पूर्व राष्ट्रीय कोच और खिलाड़ी रहे अमल दत्त का लंबी बीमारी के कारण रविवार देर रात कोलकाता के अस्पताल में निधन हो गया. अमल दत्त 86 वर्ष के थे और उम्र संबंधित बीमारियों से जूझ रहे थे. वह भारत के पहले प्रोफेशनल फुटबॉल कोच थे.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिवंगत कोच के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, "अमल दत्त के निधन की खबर से दुखी. फुटबॉल जगत उन्हें हमेशा याद करेगा. यह बड़ी क्षति है. उनके परिवार एवं दोस्तों को मेरी सांत्वना".

अमल दत्त को समर्पित स्टेडियम का होगा निर्माण

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को अमल का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की घोषणा की.

बनर्जी ने कहा, "अमल एक दिग्गज फुटबाल कोच थे और उनका निधन एक बड़ा नुकसान है. वह बंगाल का गर्व हैं और उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा." 

राज्य सरकार के मंत्रियों तथा वर्तमान और पूर्व फुटबाल खिलाड़ियों के साथ बनर्जी ने रबींद्र सदन में अमल को श्रद्धांजलि दी.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया कि दिवंगत फुटबॉल कोच अमल दत्त को समर्पित स्टेडियम बनाया जायेगा. इसके अलावा एक रास्ते का नामकरण भी उनके नाम पर होगा. रवींद्र सदन में दिवंगत फुटबॉलर अमल दत्ता के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने पहुंची मुख्यमंत्री ने कहा कि दत्त के अभाव की पूर्ति नहीं की जा सकती.

दत्त का पार्थिव शरीर रविंद्र सदन में रखा गया था, इसके बाद पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा में उनके पूर्व क्लब ईस्ट बंगाल और मोहन बागान ले जाया गया. यहां सैकड़ों फुटबाल प्रशंसक श्रद्धांजलि देने के लिये इकट्ठा हुए थे.

डायमंड कोच के नाम से मशहूर थे अमल दत्त

अमल ने एक कोच के तौर पर फुटबॉल में कई नई संरचनाओं का निर्माण किया, जिसमें 'डायमंड प्रणाली' भी शामिल है. उन्होंने 1954 में मनीला में हुए एशियन गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व किया था.

उल्लेखनीय है कि अमल दत्त 1950 के दशक में देश के राष्ट्रीय खिलाड़ी थे. उन्होंने 1954 में मनीला में एशियन गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व किया था. संन्यास के बाद वे एक साल के कोचिंग कोर्स के लिए इंग्लैंड चले गए. 

देश लौटने के बाद उन्होंने 1960 में संतोष ट्रॉफी में रेलवे की टीम को प्रशिक्षण दिया. वर्ष 1963 में वे ईस्ट बंगाल के पहले पूर्णकालिक कोच बने. अमल अपने करियर में ईस्ट बंगाल और मोहन बागान क्लब से जुड़े रहे. वे भारतीय फुटबॉल टीम के राष्ट्रीय कोच भी रहे. वह नेहरू गोल्ड कप-1987 के दौरान भारतीय टीम के तकनीकी निदेशक भी रहे. 

अमल ने 1996 में राजनीति में भी हाथ आजमाया. उन्होंने उत्तर पश्चिम कलकत्ता संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन वे हार गए.

अमल दत्त फुटबाल कोच की भूमिका में सर्वाधिक लोकप्रिय हुए थे. उन्हें डायमंड कोच भी कहा जाता था.

First published: 12 July 2016, 13:47 IST
 
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