Home » खेल » India beat Pak again. Feels great. But what happens when Kohli doesn't score?
 

#वर्ल्डकपः तब क्या होगा जब विराट कोहली का बल्ला नहीं चलेगा?

जयदीप घोष | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
QUICK PILL
  • टी-20 वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान का मैच टीम इंडिया ने जीत लिया है और इस सिरीज की सबसे बड़ी खुशी दे दी है. लेकिन अब वक्त आ गया है कि इसके आगे की रणनीति पर नजर दोड़ाई जाय.
  • भारत को जमीन पर बने रहने की जरूरत है और साथ ही अपने सितारों को भी जमीन पर ही रखने की. विजेता टीम का कॉम्बिनेशन बहुत बढ़िया है, अगर यह हर परिस्थिति से जूझ सके तो.

बहुत बढ़िया, टी-20 वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान का मैच टीम इंडिया ने जीत लिया है और इस सिरीज की सबसे बड़ी खुशी दे दी है. लेकिन अब वक्त आ गया है कि इसके बाद की रणनीति देखी जाए.

शनिवार दोपहर तक पाकिस्तान में कोई भी नहीं जानता था कि उनकी कोई महिला क्रिकेट टीम भी है. लेकिन अब सभी इन महिला खिलाड़ियों के पीछे छिपकर कह रहे हैं "हिसाब बराबर" हो गया.

हम भी नहीं जानते थे. आखिरकार जब मैंने भी गूगल किया तो इस टीम में मुझे शेरी रहमान और कंदील बलोच के नाम पता चले. 

लेकिन ईमानदारी से कहें तो पाकिस्तानी महिला टीम जीत गई. और जहां तक भारतीय महिला टीम की बात है तो आप पहले आठ ओवरों में 16 रन बनाने के बाद जीत की कल्पना कतई नहीं कर सकते.

इडेन की बात करते हैं

ममता बनर्जी के आभार व्यक्त करने में ऐसा लगा जैसे वो इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) को किसी पड़ोसी बैंक के रूप में पुकार रही हों. क्योंकि आजकल जो भी किसी बैंक का आभार व्यक्त करता है वो तुरंत सुर्खियों में आ जाता है. और इस मामले में ममता ने बहुत बढ़िया किया.

इसके बाद वहां भारत और पाकिस्तान की ओर से कई क्रिकेटर्स भी पहुंचे थे. जबकि अमिताभ बच्चन स्वयं राष्ट्रगान गा रहे थे. पाकिस्तान से भी वहां के राष्ट्रगान को गाने के लिए शफकत अमानत अली आए थे.

सोचिए यह माहौल तब था जब पहले चरण का मैच होना था. कल्पना कीजिए अगर भारत-पाकिस्तान के बीच फाइनल मुकाबला हो तब क्या दृश्य होगा.

कोई नहीं. मैच पर चलते हैं.

तू चल मैं आया

जब टीम जीत जाती है तो हम इसकी बुराइयां भूल जाते हैं. लेकिन ध्यान रखिए कि भारत की शुरुआती साझेदारी लड़खड़ा रही थी.

रनों के लक्ष्य को भूल भी जाएं तो भी रोहित शर्मा अपनी परछाई ही नहीं पकड़ पा रहे थे. यह हकीकत है कि एक फ्लैट पिच पर कितना भी लक्ष्य रोहित को दे दिया जाए उन्हें कोई नहीं रोक सकता. लेकिन उस वक्त जब उन्हें टीम को जीत की ओर ले जाने के लिए एक निर्धारित रन प्रति ओवर का लक्ष्य का हो तो वो बिल्कुल अलग ही नजर आते हैं. 

जैसा उनका खेल न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में था उसी तरह का पाकिस्तान के खिलाफ भी रहा. जब अहंकार और योजना की कमी आपकी प्रमुखता होगी, तो परिणाम आसानी से भांपा जा सकता हैं.

यह भी पता चलता कि पाकिस्तान ने न्यूजीलैंड से हुए भारत के मैच से भी कुछ नहीं सीखा था

दूसरे छोर पर शिखर धवन जितनी मेहनत खुद को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, उतने में तो हम हुगली नदी पर तीसरा पुल बना सकते हैं. उन्हें कितना भी वक्त दे दीजिए वो 15 रनों पर पहुंचकर आउट हो जाएंगे. 

और क्या सुरेश रैना दोनों मैचों में खेले हैं? इसके लिए तो शायद मुझे पहले स्कोरबोर्ड देखना पड़ेगा. हां! वाकई वो खेले हैं. कोई नहीं बस इतना ही कहना था.

इसका सीधा सा मतलब है कि अगर विराट कोहली रन नहीं बना पाते हैं, तो हम मुसीबत में पड़ सकते हैं. युवराज सिंह और महेंद्र सिंह धोनी अभी भी अपने कदम तलाश रहे हैं.

चयन पर सवाल

क्या कोई इस बात को समझा सकता है कि क्यों जसप्रीत बुमराह को आखिरी ओवर दिया गया? या फिर रविचंद्रन अश्विन ने अपने पूरे ओवर क्यों नहीं किए? विशेषरूप से हार्दिक पांड्या और बुमारह को आखिरी ओवर क्यों दिए जाते हैं?

टीम चयन को देखने के बाद एक और बात भी बिल्कुल साफ है कि हमारे क्रिकेटर्स पिच को नहीं पढ़ पाते हैं. 

हर कोई हैरत में है कि हरभजन सिंह कब मैच में खेलेंगे. वो नागपुर या फिर कोलकाता में भी खेल सकते थे. धोनी अपनी निर्धारित टीम में फेरबदल नहीं करना चाहते, ठीक है. लेकिन पांड्या और बुमराह के दो ओवर हमें भारी पड़ सकते थे.

पाकिस्तान के लिए भी सवाल है कि वो भी एक अन्य विशेषज्ञ स्पिनर के साथ कैसे आ गए. लेकिन मैच से पहले वकार युनिस या किसी अन्य ने भी इस बारे में सलाह नहीं दी थी.

बांग्लादेश उबल रहा है. तस्कीन अहमद और अराफात सन्नी पर आईसीसी द्वारा लगाए प्रतिबंध ने उन्हें पहले ही खौला दिया है. इसलिए मैदान में वो बदला लेने उतरेंगे.

बाएं हाथ के स्पिनर इमाद वसीम को बाहर रखा गया और मोहम्मद सामी को लाया गया. इसी टीम के साथ पाकिस्तान ने एशिया कप में भारत का सामना किया था.

इसलिए यह बात तो साफ है कि उन्हें भी इस बात का बिल्कुल पता नहीं था कि इडेन गार्डेन की पिच इतना टर्न लेगी. इसके अलावा पाकिस्तान टीम को यह भी डर था कि गैर अनुभवी इमाद वसीम को भारतीय टीम के बाएं हाथ के बल्लेबाजों का भी सामना करना पड़ेगा.

इससे यह भी पता चलता कि पाकिस्तान ने न्यूजीलैंड से हुए भारत के मैच से भी कुछ नहीं सीखा था.

इसलिए जब पाकिस्तान भारत से खेला तो थोड़े रोमांच और साहस की जरूरत थी.

लेकिन दूरंदेशी हमेेशा 20/20 होती है.

गुस्साई टीमें इंतजार में

इस जीत से मिले अंकों से भारत को कुछ राहत मिली होगी. हालांकि न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के चलते यह अभी भी -0.90 रन रेट के साथ यह प्वाइंट टेबल के मध्य में पड़ी हुई है.

इसलिए अब भारत को बांग्लादेेश और ऑस्ट्रेलिया को हराना होगा और यह दोनों काम कतई आसान नहीं हैं.

बांग्लादेश उबल रहा है. तस्कीन अहमद और अराफात सन्नी पर आईसीसी द्वारा लगाए प्रतिबंध ने उन्हें पहले ही खौला दिया है और इससे वो गेंदबाजी में कमजोर पड़ जाएंगे. इसलिए मैदान में वो बदला लेने उतरेंगे.

ऑस्ट्रेलिया हार से नफरत करती है वो भी विशेषरूप से न्यूजीलैंड से. इसलिए ऑस्ट्रेलिया भी खून की प्यासी है.

भारत के मैच के बाद पाकिस्तान के लिए जितना भी हो हल्ला हो रहा है वो केवल एक मैच के लिए ही था. लेकिन अब पाकिस्तान को भी न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया से कड़ा मुकाबला करना है. आखिरकार यह ग्रुप मौत का कुआं है.

लेकिन उन्हें केवल थोड़ी सी प्रेरणा और थोड़े जादू की जरूरत है. पाकिस्तान एक मूड वाली टीम है जो कभी भी वापसी कर सकती है. अभी तक इस टूर्नामेंट के बारे में किसी ने यह नहीं सोचा है.

भारत के लिए उन्हें जमीन पर बने रहने की जरूरत है और अपने सितारों को भी जमीन पर ही रखने की. विजेता टीम का कॉम्बिनेशन बहुत बढ़िया है लेकिन अगर यह हर परिस्थिति से जूझ सके तो ही.

क्योंकि जो हवा के साथ नहीं झुकते हैं वो टूट जाते हैं.

First published: 20 March 2016, 10:30 IST
 
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