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कोहली की बड़ी जीत क्रिकेट के लिए बड़ा नुकसान है

रोहन राज | Updated on: 1 December 2015, 21:19 IST
QUICK PILL
  • भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच जारी टेस्ट सिरीज में स्पिनरों का बोलबाला रहा. जबकि दोनों टीमों के बल्लेबाज ताश के पत्तों की तरह धराशायी हो गए. 
  • सिरीज़ में गेंद और बल्ले की प्रतियोगिता यानी क्रिकेट तो कहीं नहीं दिखी, बल्कि विशेष रूप से स्पिनरों के अनुकूल बनाई गई पिचों पर बहस ज्यादा हुई.

72 दिवसीय भारत दौरे में दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट टीम ने अच्छी शुरुआत करते हुए मेजबान टीम को टी-20 और एक दिवसीय मैचों की शृंखला में हराया. घरेलू मैदान पर टीम के प्रदर्शन ने बहुत से सवाल हुए साथ ही टीम के काफी विश्वसनीय और दीर्घकालिक नेतृत्व महेंद्र सिंह धोनी भी आलोचना के दायरे में आ गए.

इसके बाद टेस्ट शृंखला में घरेलू टीम के सामने वापसी की चुनौती आन पड़ी. अपनी क्षमता पर सवाल उठाते आलोचकों और बुरी तरह से मात दे रही दक्षिण अफ्रीकी टीम की नकेल कसने के लिए टीम अधीर हो गई थी. ऐसा लग रहा था कि मेहमान टीम पिछले नौ सालों से विदेशी जमीन पर नहीं हारने का रिकॉर्ड बेहतर करने जा रही थी.

इसके बाद विराट कोहली की अगुवाई वाली टीम इंडिया ने पासा पलटते हुए मेहमानों को टेस्ट सीरिज में 2-0 से पीछे कर दिया. हालांकि अभी दिल्ली में एक मैच होना बाकी है. टीम इंडिया और उसके प्रशंसक चाहे जितना इस जीत का जश्न मना लें, इसका श्रेय स्पिनरों के मनमाफिक बनाई गई पिच को जाता है.

इस आरोप की पुष्टि स्पिनरों की तिकड़ी रविचंद्रन अश्विन (24), रविंद्र जडेजा (16) और अमित मिश्रा (7) को मिले कुल 47 विकेटों से भी होती है. यह आंकड़े रोमंचित करने वाले हैं कि टीम इंडिया ने मेहमान टीम को ध्वस्त कर दिया. इससे भारतीय टीम की धाक बढ़ी है. लेकिन इस जीत से कुछ सवाल भी उठते हैं कि भारतीय टीम जीत के लिए कितनी बेचैन थी.

इस सिरीज में पूरी तरह से स्पिनरों का ही बोलबाला रहा. दोनों टीमों के बल्लेबाज ताश के पत्तों की तरह धराशायी हो गए. गेंद और बल्ले के बीच होने वाली जद्दोजहद का कहीं कोई नामोनिशान देखने को नहीं मिला. सारी चर्चा घटिया पिचें लूट ले गईं.

"मुश्किल है, पर मजा आएगा" पंचलाइन के साथ जिस सिरीज का जमकर प्रचार किया गया, वह सिर्फ मेहमानों के लिए मुश्किल साबित हुई. नतीजे इतने स्वाभाविक रहे कि इसने खेल का सारा रोमांच ही खत्म हो गया.

मोहाली पराजय

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पहले टेस्ट मैच में डू प्लेसिस ने खुलासा किया कि मेहमान टीम मोहाली की पिच से कुछ और नहीं बल्कि "बदतर" की उम्मीद कर रही थी. जो कि सूखी, मकड़ी के जालों की तरह के दरारों वाली और बिल्कुल खेलने लायक नहीं थी. डू प्लेसिस की यह टिप्पणी दक्षिण अफ्रीकी टीम की मनोस्थिति दिखा रही थी और टीम पहला मैच 108 रन से हार गई.

दो पारियों में गिरे 40 विकेटों में से दोनों टीमों के स्पिनरों ने कुल 34 विकेट हासिल किए. जहां स्पिनरों ने इस पर खुशियां मनाईं, बल्लेबाज पूरी तरह से निराश दिखे. इस दौरान केवल तीन अर्धशतक बनाए गए. जिसमें टीम इंडिया की तरफ से मुरली विजय और चेतेश्वर पुजारा की ओर से दो जबकि दक्षिण अफ्रीका की ओर से एबी डिविलियर्स द्वारा एक बनाया गया.

बेंगलुरु में बारिश

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चार मैचों की सिरीज में 1-0 से आगे होने के बाद विराट कोहली ने ऐसे मैदान में जिसके बारे में चर्चा की जा रही थी कि यहां मोहाली से अच्छा मैच होगा, मेहमान टीम के खिलाफ पहले क्षेत्ररक्षण का हिम्मत भरा फैसला किया. यह एबी डिविलियर्स का 100वां टेस्ट मैच था जिन्होंने इस मौके पर 85 रन बनाकर टीम को पहली पारी में 214 के लक्ष्य तक पहुंचाया.

अश्विन (4) और जडेजा (4) ने टीम की ओर से बेहतरीन प्रदर्शन किया. इसके बाद मुरली विजय (28*) और शिखर धवन (45*) ने बेहतरीन शुरुआत करते हुए पहला दिन खत्म होने तक टीम इंडिया को 80/1 के स्कोर पर पहुंचा दिया. दूसरे, तीसरे, चौथे और अंतिम दिन का खेल बारिश की वजह से नहीं हो सका.

क्रिकेट के इतिहास में यह नौंवा सबसे छोटा टेस्ट मैच था जिसे पांचवे दिन ड्रॉ घोषित कर दिया गया. पानी से भीगे मैदान और रुक-रुककर होने वाली बूंदाबांदी ने मैदान को दोबारा से खेलने लायक ही नहीं छोड़ा. इस सिरीज के दूसरे मैच में जहां 81 ओवर डाले गए. वहीं, इससे पहले केवल एक मैच में इससे कम ओवर किए गए थे. 

नागपुर में भय

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यदि मोहाली की पिच पर मेहमान टीम परेशान हुई तो नागपुर का विकेट उसके लिए बारूदी सुरंग साबित हुआ. वहां पिच पर गिरने के बाद गेंद के बारे में लगा गए सारे पूर्वानुमान गलत साबित हुए. पिच सामूहिक विनाश का हथियार बन गई, विपक्षी टीम को विकेट पर टिकने का मौका ही नहीं मिला.

एक ऐसी पिच जहां बैटिंग लॉटरी में तब्दील हो गई, दक्षिण अफ्रीका अपनी टिकट खरीदने में ही विफल साबित हुई. टीम इंडिया को पहली पारी में 215 रनों पर आउट करने के बाद, मेहमान टीम के लिए अश्विन (5), जडेजा (4) और मिश्रा (1) काल बनकर आ गए और दक्षिण अफ्रीका को 79 रनों पर समेट दिया. यह टीम इंडिया के खिलाफ किसी भी टीम का सबसे कम स्कोर रहा है.

हां, यदि नागपुर के विकेट पर मेहमान टीम संघर्ष करती दिखी तो टीम इंडिया भी इस पिच पर बल्लेबाजी करते वक्त डरी दिखी. इमरान ताहिर के पांच विकेटों ने दूसरी पारी में टीम इंडिया को 173 रनों पर आउट कर दिया. और आखिर में, मेहमान टीम ने 124 रनों पर सिमटते हुए सीरिज को 2-0 से भारत के हाथों दे दिया.

जैसी उम्मीद की जा रही थी, स्पिनरों ने मैच के दौरान 40 में से 33 विकेट चटकाए. अश्विन ने 12 विकेट लिए जबकि जडेजा और मिश्रा ने 4-4 विकेट चटकाए. दूसरी ओर इस पूरे मैच के दौरान एक अर्धशतक तक नहीं बनाया जा सका. तीन दिनों में खत्म होने वाले इस मैच के पहले ही दिन 20 विकेट गिए गए.

विशेषज्ञों की राय

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तीसरे मैच में जीत के बाद भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने कहा, "यह कोई नियम नहीं है, भारत में ऐसी ही परिस्थितियों में खेला जाता है. वर्ना आप खेलते रहिए पांच दिन और बनाइए एक पारी में 500 रन. आप उस तरह के गेंदबाज नहीं तैयार कर सकते, आप इस तरह से टेस्ट मैच नहीं जीत सकते. टेस्ट मैच जीतना अहम है."

इस मैच के बाद ही पूर्व भारतीय क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी ने कहा, "इस तरह की पिचों का क्या मतलब हो सकता है. भारत ने भले ही दक्षिण अफ्रीका को हरा दिया लेकिन इसका अर्थ क्या रह जाता है. आईपीएल ने टेस्ट क्रिकेट को खत्म कर दिया है और इस तरह की पिचों से हम उसको और भी गर्त में पहुंचा रहे हैं. अश्विन एक समझदार गेंदबाज हैं और उन्हें सफल होने के लिए ऐसी पिचों की जरुरत नहीं है. इस तरह के विकेट तैयार कर आप अश्विन की प्रतिभा को ही खत्म कर रहे हैं. रविंद्र जडेजा को ऐसी पिच की जरुरत पड़ सकती है लेकिन अश्विन को बिल्कुल भी नहीं."

दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट कप्तान हाशिम अमला ने कहा, "शायद यह मेरे टेस्ट करियर के सबसे मुश्किल हालात थे. मैं जिन विकेटों पर खेला उनमें से यह सबसे मुश्किल था. इसलिए श्रेय भारत को जाता है, उन्होंने अच्छी गेंदबाजी की और दुर्भाग्य से हम इस मैच में हार गए."

टीम इंडिया के निदेशक रवि शास्त्री ने स्पिनरों के अनुकूल पिचों का बचाव करते हुए कहा, "कौन सा नियम है जो यह बताता है कि पहले दिन गेंद टर्न नहीं कर सकती? मुझे बताएं कि रूल बुक में कहां यह लिखा है कि गेंद केवल स्विंग और सीम ही कर सकती है. कई बार मुझे लगता है कि जब तक आप इन पिचों पर नहीं खेलते, आप नहीं जान सकते कि इन पिचों पर कैसे खेला जाता है. मुझे उम्मीद है कि दिल्ली में होने वाला मैच भी ऐसा ही होगा. मुझे इस बारे में कोई हिचक नहीं है."

First published: 1 December 2015, 21:19 IST
 
रोहन राज @catchnews

स्वतंत्र पत्रकार

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