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रियो ओलंपिक: महिला खिलाड़ियों ने बढ़ाया देश का मान

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 August 2016, 8:56 IST

रियो ओलंपिक 21 अगस्त को खत्म हो रहा है. भारत को अब तक एक कांस्य पदक और रजत पदक मिला है और खास बात यह है कि दोनों पदक देश की बेटियों ने दिलाया है.

पहलवान साक्षी मलिक ने कांस्य और बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधू ने रजत पदक जीतकर इतिहास रचा है. इनके अलावा जिम्नास्ट दीपा कर्मकार और पहलवान विनेश फोगाट भले ही पदक जीतने से चूक गईं लेकिन उन्होंने करोड़ों भारतवासियों का दिल जीत लिया है.

सबसे पहले बात करते हैं हरियाणा की रहने वाली 23 वर्षीय पहलवान साक्षी मलिक के बारे में. कम लिंगानुपात को लेकर हरियाणा राज्य पर अक्सर सवाल उठते हैं लेकिन रोहतक की रहने वाली साक्षी मलिक ने इस राज्य की दूसरी तस्वीर पेश की है.

साक्षी मलिक ने रियो में 58 किग्रा भारवर्ग फ्रीस्टाइल कुश्‍ती में कांस्‍य पदक हासिल कर इतिहास रचा. साक्षी पहली भारतीय महिला पहलवान हैं जिन्होंने ओलंपिक में पदक जीता हो.

मलिक ने कांस्‍य पदक के लिए प्‍ले ऑफ मुकाबले में किर्गिस्‍तान की पहलवान एसुलू तिनिवेकोवा को 8-5 से हराकर पदक जीता. साक्षी के जीत के साथ ही भारतीय खेमे में पदक का इंतजार खत्म हुआ. ओलंपिक खेलों में यह किसी भारतीय महिला द्वारा जीता गया चौथा पदक था.

हालांकि अब भारतीय महिलाओं द्वारा जीते गए पदकों की संख्या अब पांच हो चुकी हैं. साक्षी के बाद पीवी सिंधू ने भी पदक जीता है.

साक्षी- सिंधू से पहले सिडनी ओलंपिक 2000 में वेटलिफ्टर कर्णम मल्लेश्वरी, लंदन ओलंपिक 2012 में बॉक्सर एम.सी. मैरीकॉम, लंदन ओलंपिक 2012 में बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल में कांस्य पदक जीत चुकी हैं.

23 साल की साक्षी मलिक ने इससे पहले 2014 ग्लास्गो कॉमनवेल्थ खेलों में भी भारत को मेडल दिला चुकी हैं. उन्होंने भारत के खाते में रजत पदक डाला था. इसके अलावा उन्होंने 2015 सीनियर एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में भारत को कांस्य पदक दिलाया था.

ओलंपिक फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं सिंधू भले सोने का तमगा हासिल करने से चूक गईं लेकिन उन्होंने भारतीय ओलंपिक इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखवा लिया.

सिंधू ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं. उनसे पहले सायना ने लंदन ओलंपिक सेमीफाइनल में प्रवेश किया था. हालांकि, सायना सेमीफाइनल मैच जीत नहीं पाई और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा.

रियो ओलंपिक में शुक्रवार को सिंधू ने फाइनल में स्पेन की कैरोलीना मारिन को कड़ी टक्कर दी. उन्होंने पहला सेट जीता लेकिन वर्ल्ड नंबर वन खिलाड़ी मारिन के सामने उनका दिन नहीं था. बावजूद इसके भारत के लिए व्यक्तिगत स्पर्धा में सिंधू ने चौथा रजत पदक जीता है. 

सिंधू निशानेबाज राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (एथेंस 2004) और विजय कुमार (लंदन 2012) और पहलवान सुशील कुमार (लंदन 2012) के बाद ओलंपिक में व्यक्तिगत रजत पदक जीतने वाली चौथी भारतीय हैं. 21 वर्षीय सिंधू ओलंपिक में पदक जीतने वाले सबसे युवा भारतीय खिलाड़ी हैं. 

अब बात करते हैं 22 वर्षीय दीपा कर्मकार की जो त्रिपुरा की रहने वाली हैं. पिछले 52 सालों में दीपा भारत की पहली जिम्नास्ट हैं जिन्होंने ओलंपिक में क्वालिफाई किया है. दीपा असाधारण प्रदर्शन के बावजूद जिमनास्टिक की वॉल्ट इवेंट में चौथे नंबर पर रहीं.

उन्होंने दो प्रयासों में कुल 15.066 अंक हासिल किए और बड़े मामूली अंतर से कांस्य पदक से चूक गईं. दीपा प्रोडूनोवा वॉल्ट करती हैं. जिमनास्टिक्स इतिहास में सिर्फ पांच महिलाएं ही सही तरीके से प्रोडूनोवा वॉल्ट कर सकी हैं.

ऐसा करने वाली दीपा तीसरी महिला थीं और 2014 में उन्होंने इसी वॉल्ट के ज़रिए कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक भी जीता था. प्रोडूनोवा यानि हाथों से उछल कर हवा में दो गुलाटी मारना.

रियो ओलंपिक में अगर विनेश फोगाट तो चोट नहीं लगती तो भारत के नाम और एक पदक होता. हरियाणा की रहने वाली फोगाट आसानी से प्री क्वार्टर फाइनल मुकाबले में जीत हासिल की.

चीन की सुन यानान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में विनेश एक समय 1-0 से आगे चल रही थीं. लेकिन तभी युनान ने अपने मजबूत दांव में फंसा लिया. विनेश ने इस दांव में फंसकर दो अंक तो गंवा ही बैठीं. बल्कि उनका पैर बुरी तरह मुड़ गया . वह इसके बाद खड़ी भी नहीं हो पाईं और मुकाबले से हटने का फैसला कर लिया. 

इसके अलावा सभी भारतीय महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा है. भारतीय महिला हॉकी टीम ने तो 36 साल ओलंपिक के क्वालिफाई किया. जिसे महिला टीम की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा गया.

हालांकि, पूरे टूर्नामेंट में भारतीय महिला हॉकी टीम कोई भी मैच नहीं जीत सकी. उसने केवल एक मैच जापान के साथ 2-2 से ड्रॉ खेला था.

अब उम्मीद है कि टोक्यो ओलंपिक में पीवी सिंधू और साक्षी मलिक अपने पदक का रंग बदलने में सफल रहेंगी. वहीं दीपा और विनेश पदक लाने में सफल रहेंगी.

First published: 21 August 2016, 8:56 IST
 
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