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बीसीसीआई की नीयत साफ होती तो हाईकोर्ट के आदेश की जरूरत नहीं पड़ती

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 16 April 2016, 9:24 IST
QUICK PILL
  • महाराष्ट्र में सूखे और अकाल के चलते बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 13 मैचों को राज्य से बाहर कराने के निर्देश के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अब मैचों को महाराष्ट्र से बाहर कराने के लिए तैयार है.
  • आईपीएल के चेयरमैन राजीव शुक्ला ने शुक्रवार को बताया कि कोर्ट से फैसले से प्रभावित मुंबई इंडियंस और राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स को रायपुर, जयपुर, कानपुर और विशाखापटनम में मैच कराने का प्रस्ताव दिया गया है.
  • राजीव शुक्ला के अनुसार पुणे ने विशाखापटनम में अपनी रूचि दिखाई है जबकि मुंबई की टीम 17 अप्रैल को अपने मैदान की घोषणा करेगी.
  • समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार आईपीएल का फाइनल और क्वालीफायर एक बंगलुरू में जबकि क्वालीफायर दो और एलिमिनेटर का मैच कोलकाता में खेला जा सकता है.

महाराष्ट्र का मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र पिछले तीन साल से सूखे की मार झेल रहा है. वहां पानी के लिए दंगे की स्थितियां हैं. लातूर जिले में ट्रेन से पीने का पानी भेजा जा रहा है.

एक अनुमान के अनुसार राज्य के तीन स्टेडियम में होने वाले आईपीएल मैचों के दौरान पिचों को तैयार करने में 60 लाख लीटर से ज्यादा पानी का इस्तेमाल होता.

आईपीएल के नौ क्रिकेट मैच पुणे, तीन मैच नागपुर में और आठ मैच मुंबई में प्रस्तावित थे. यानी कुल 20 मैच.

लातूर जिले में पीने के पानी के लिए दंगे की स्थितियां हैं

इस बार सूखा पीड़ित विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन, नागपुर को तीन मैचों को मेजबानी दी गई थी. क्रिकेट समीक्षक अयाज मेमन कहते हैं, 'नागपुर को मैच देना बड़ा सवाल है. इसका एक कारण हो सकता है कि बोर्ड अध्यक्ष शशांक मनोहर खुद इसी इलाके से आते हैं.'

महाराष्ट्र में आईपीएल मैचों को लेकर अयाज ने कहा, 'मुझे लगता है कि बीसीसीआई को सतर्क रहना चाहिए था. खास तौर पर जब शरद पवार मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और खुद महाराष्ट्र से हैं, उन्हें सूखे की स्थिति का पता होना चाहिए था.'

पानी की कीमत पर आईपीएल का कुतर्क


अयाज जो बात कह रहे हैं ऐसा नहीं है कि बोर्ड उन स्थितियों से अनभिज्ञ था. पूरे महाराष्ट्र में तीन साल से सूखे के हालात हैं. राजनीति गलियारों में चल रही चर्चाओं की मानें तो आज से लगभग महीने भर पहले भाजपा के एक कार्यकर्ता ने बीसीसीआई को पत्र लिखकर महाराष्ट्र में मैच आोजित न करने के लिए आगाह किया था. बावजूद इसके आईपीएल के एक तिहाई मैच महाराष्ट्र में ही रखे गए, उनमें भी तीन मैच सूखे के केंद्र विदर्भ के नागपुर स्टेडियम में. 

यह आश्चर्य की बात है कि ये तीनों ही मैच किंग्स इलेवेन पंजाब बनाम दिल्ली, बंगलुरू और हैदराबाद से होने थे. यानी तीनों मैंचों में महाराष्ट्र की कोई स्थानीय टीम नहीं है. कोर्ट के निर्देश के बाद पंजाब अब अपने घरेलू मैदान मोहाली में तीनों मैच खेलेगी. दिलचस्प है कि पंजाब टीम के सह मालिक नेस वाडिया ने मैच वापस मोहाली में शिफ्ट होने पर खुशी जाहिर की है.

2009 में बीसीसीआई आईपीएल का आयोजन दक्षिण अफ्रीका में करवा चुकी है


मैचों को महाराष्ट्र से बाहर शिफ्ट करने का मामला तब बड़े विवाद का रूप लेने लगा जब बोर्ड के बड़े अधिकारियों ने महाराष्ट्र में आईपीएल के मैच कराने पर तर्क-कुतर्क करना शुरू किया. हाईकोर्ट के निर्देश से पहले आईपीएल गर्वनर राजीव शुक्ला और बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर लगातार महाराष्ट्र में ही मैच कराए जाने पर जोर दे रहे थे.

बीते बुधवार को महाराष्ट्र में ही मैच कराए जाने को लेकर ठाकुर ने कहा था, 'पांच सितारा होटलों के कितने स्विमिंग पूल बंद किए गए? क्या लोगों ने अपने बगीचों में पानी देना बंद कर दिया?'

महाराष्ट्र में ही मैच कराए जाने को लेकर बीसीसीआई के अड़ियल रवैये पर क्रिकेट से जुड़े रहे कांग्रेस नेता संजय झा की अपनी राय है कि बीसीसीआई का एकमात्र उद्देश्य पैसा कमाना है. उन्होंने कहा कि बीसीसीआई से ये उम्मीद करना बेमानी है कि वह कोई सामाजिक जिम्मेदारी लेगा. उसे सूखे से ज्यादा अपने नफा-नुकसान की चिंता है.

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संजय झा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी इस पूरे विवाद के लिए जिम्मेदार मानते है. उन्होंने कहा, 'सूखे के हालात से वाकिफ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को बीसीसीआई से ज्यादा संवेदनशील होने की जरूरत थी. बीसीसीआई तो वैसे भी पैसों के लिए अंधा है. लेकिन महाराष्ट्र सरकार भी कोर्ट के निर्देश का इंतजार कर रही थी जबकि राज्य में कुछ हिस्से में लोग पानी के लिए तरस रहे थे.'

क्या इस शर्मिंदगी से बचा जा सकता था?

सूखे के विकट हालात में 33 फीसदी मैच महाराष्ट्र में आयोजित करवाने के पीछे संजय झा बीसीसीआई की अंदरूनी राजनीति को भी देखते हैं. उनके मुताबिक यहां स्टेडियम को मैच देने में भी राजनीति होती है. बीसीसीआई में जिस गुट की ताकत ज्यादा होती है वो अपने यहां मैच करवा लेता है.

झा के मुताबिक किसी दूसरे वेन्यू पर मैच स्थांतरित करना बीसीसीआई के लिए चुटकियों का काम है. 2009 में अप्रैल-मई में भारत में लोकसभा चुनाव होने वाले थे. तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने मैचों के दौरान स्टेडियमों में पर्याप्त सुरक्षा देने में असमर्थता जताई थी.

सूखा पीड़ित विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन, नागपुर को तीन मैचों को मेजबानी दी गई थी

ये मामला 14 मार्च, 2009 का है. तब तत्कालीन आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी ने एक महीने के भीतर पूरा का पूरा आईपीएल टूर्नामेंट देश से बाहर दक्षिण अफ्रीका में आयोजित करवाया था.

एक तर्क दिया जाता है कि मैच टीमों के होम ग्राउंड के हिसाब से आवंटित होते हैंं. इस पैमाने पर भी देखा जाय तो विदर्भ के नागपुर स्टेडियम को मैच देने का कोई औचित्य नहींं था. न तो आईपीएल में नागुपर की कोई टीम है, न ही तीनों मैचों में केलने वाली टीमों का नागपुर से कोई वास्ता है. सिर्फ और सिर्फ नागपुर के बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर हैं.

आईपीएल में विदेशी कोचों का बोलबाला

आईपीएल के मैच पहले भी रायपुर, कटक, धर्मशाला, विशाखापटनम, रांची जैसी जगहों पर होते रहे हैं. तो इस बार जब सूखे के असादारण हालात थे तब इस विकल्प को क्यों नहीं अपनाया गया. वरिष्ठ खेल पत्रकार सत्येंद्र रंजन के अनुसार आईपीएल शुरू से पर्चेजिंग पॉवर के हिसाब से चल रहा है. आईपीएल मैच बड़े शहरों में ही रखे जाते हैं. विज्ञापन एजेंसियों का रूझान भी उन्हीं शहरों में ज्यादा होता है जहां लोगों के पास खरीदने की क्षमता ज्यादा हो.

आईपीएल को बड़ा शहर चाहिए, पुणे और बीसीसीआई को स्थानीय समर्थक चाहिए, सरकार समय पर जगेगी नहीं, और कोर्ट के फैसले पर बोर्ड के अधिकारी कुतर्क करेंगे. संदेश साफ है, आईपीएल और अकाल मौतें साथ-साथ चलेंगी. 

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पुणे फ्रेंचाइजी का कोर्ट में कहना था कि मैच का स्थान बदलना इस समय सही सोच नहीं है. ऐसा करने से फ्रेंचाइजी को वित्तीय नुकसान के अलावा स्थानीय समर्थकों का नुकसान भी उठाना पड़ेगा.

राजीव शुक्ला महाराष्ट्र से ही कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं. कुछ दिन पहले राजीव शुक्ला ने कहा था कि वह अपने सांसद निधि कोष से कुछ सूखाग्रस्त गांवों को गोद ले सकते हैं. आश्चर्य है कि पिछले तीन सालों से महाराष्ट्र में सूखा पड़ रहा है और उन्होंने अब तक किसी गांव को गोद नहीं लिया है.

First published: 16 April 2016, 9:24 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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