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'लोढ़ा कमेटी के मुताबिक सट्टेबाजी को कानूनी बना देना चाहिए'

जी राजारमन | Updated on: 11 January 2016, 20:43 IST
QUICK PILL
  • लोढ़ा कमेटी ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में सुधार के लिए सट्टेबाजी को कानूनी बनाने का सुझाव दिया है. इससे पहले भी कई संस्थाओं ने इसका सुझाव दिया था.
  • सट्टेबाजी को कानूनी बनाने से सरकार को न केवल राजस्व का लाभ होगा बल्कि इससे सट्टेबाजी का पैसा गलत हाथों में जाने से बचेगा.

बगैर किसी लागलपेट के कह दूं कि क्रिकेट में सट्टेबाजी को कानूनी बनाए जाने की जरूरत. इसलिए नहीं कि इससे केवल मैच फिक्सिंग में कमी आ जाएगी, बल्कि इससे क्रिकेट से होने वाली कमायी की कालाबाज़ारी रुकेगी. कई बार तो ये पैसा ऐसे धंधे में चला जाता है जो हमारे देश के लिए नुकसानदायक हैं. इसके अलावा इससे भारी आय होगी जिससे देश में खेलों को बढ़ावा देने में खर्च किया जा सकता है.

केंद्रीय कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने पहले ही साफ कर दिया है कि फिलहाल सरकार क्रिकेट में सट्टेबाजी को कानूनी नहीं बनाने जा रही है. एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इसे कानूनी बनाने से पहले इसपर रोक लगाने की जरूरत है.

दिल्ली पुलिस द्वारा श्रीसंथ एवं अन्य के ख़िलाफ़ चलाए गए सट्टेबाजी के मामले में एडिशनल सेशन जज नीना कृष्णा बंसल ने अपने फ़ैसले में कहा था कि ब्रिटेन की तरह भारत में खेलों, खासकर क्रिकेट में भ्रष्ट्राचार से जुड़ा कड़ा कानून बनाने की जरूरत है.

क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में सुधार के लिए बनी लोढ़ा कमेटी ने क्रिकेट में सट्टेबाजी को कानूनी बनाने का सुझाव दिया है

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में सुधार के लिए गठित लोढ़ा कमेटी ने भी अपने सुझावों में सट्टेबाजी को कानूनी बनाने की बात कही है. उम्मीद है कि भारत के सभी राज्य इस सुझाव पर ध्यान देंगे. भारत में सट्टेबाजी राज्य के अधिकारों के तहत आती है.

कुछ लोगों की धरपकड़ कर उन्हें मामूली सज़ाएं दिलाने से गैर-कानूनी सट्टेबाजी नहीं रुकेगी. इससे इसमें विदेशों से आने वाली बड़ी धनराशि पर रोक नहीं लगेगी.

सदानंद गौड़ा शायद भूल गये कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल की तीसरी रिपोर्ट में क्रिकेट में होने वाली सट्टेबाजी में लगी बड़ी अवैध धनराशि का जिक्र किया था. इस जांच दल के प्रमुख थे सेवानिवृत्त न्यायाधीश एमबी शाह. उन्होंने इसपर काबू पाने के लिए कानूनी उपाय करने का भी सुझाव दिया था.

2013 के आईपीएल घोटाले की जांच करने के लिए न्यायाधीश मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता में बनायी गयी कमेटी ने सुप्रीट कोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अधिकारियों ने सट्टेबाजी को कानूनी बनाने से इस खेल में कालेधन और अंडरवर्ल्ड के प्रभाव में कमी आएगी.

क्रिकेट की सट्टेबाजी में कालेधन के बारे में सीबीआई, अलग अलग एसआईटी समेत कई जांच एजेंसियां आगाह कर चुकी हैं

साल 2000 में मैच फिक्सिंग का दैत्य पहली बार अपने पूरे आकार में सबके सामने आया. सीबीआई ने कहा था कि क्रिकेट में करोड़ों का सट्टा लग रहा है. अपने प्रसार और आकार के चलते इसे देश का सबसे बड़ा संगठित रैकेट कहा जा सकता है. सीबीआई ने ऐसे पैसे से देश की सुरक्षा को पहुंचने वाले संभावित खतरे के प्रति भी आगाह किया था.

सीबीआई ने तब कहा था, "इस रैकेट के बढ़ने का प्राथमिक कारण है यहां सट्टेबाजी का लचीला कानून." सीबीआई ने कहा था कि आज नहीं तो कल इस रैकेट पर संगठित गिरोहों का कब्जा हो जाएगा.

इन सभी एजेंसियों की चेतावनी को कमोबेश नजराअंदाज किया जाता रहा है. ज्यादातर तो जुबानी जमां खर्च किया जाता है. भारत के केंद्र और राज्य के नेता इस मसले पर बयानबाजी के ज्यादा शायद ही कुछ करते हैं.

कथित सटोरीया मुकेश शर्मा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मई 2015 में गिरफ्तार किया था. कुछ खबरों के अनुसार वो 10 हज़ार करोड़ रुपये का सट्टेबाजी रैकेट चलाता था. जब ईडी ने अहमदाबाद की अदालत में उसके ख़िलाफ़ आरोपपत्र दाखिल किया तो उसमें ये राशि ढाई हजार करोड़ बतायी गयी. इस राशि में आयी कमी के बाद सीबीआई ने ईडी के अहमदाबाद दफ्तर पर छापा मारा.

ईडी अधिकारियों ने बताया कि केवल एक वेबसाइट पर एक लाख 90 हज़ार करोड़ रुपये का सट्टा लगाया गया था.

साल 2010 में दुनिया की प्रमुख ऑडिटिंग कंपनी केपीएमजी ने अनुमान लगाया था कि भारत में सट्टेबाजी का बाजार करीब चार लाख करोड़ रुपये का है. उसके बाद भारतीय कारोबारी संगठन फिक्की ने सुझाव दिया था कि ये बाजार करीब तीन लाख करोड़ रुपये का है.

अलग अलग अनुमानों के मुताबिक क्रिकेट में सट्टेबाजी का बाजार तीन लाख से चार लाख करोड़ रुपये का है

जो आंकडा कम है उसे ही आधार मान लिया जाए तो भी भारतीय तीन लाख करोड़ रुपये सट्टेबाजी पर लगाते हैं. इस धनराशि का एक प्रतिशत भी अगर खेलों के विकास के लिए दे दिया जाए तो ये करीब तीन हजार करोड़ रुपये हुए. ये राशि भारत सरकार द्वारा मौजूदा साल में युवा एवं खेलकूद मंत्रालय के सालाना बज़ट से दुगुनी होगी.

80 के दशक में हैदराबाद रेसिंग क्लब (एचआरसी) ने सट्टेबाजी पर टैक्स की दरें साल दर साल बढ़ती रहीं. नतीजन, इससे होने वाली आय में कमी आने लगी.

एचआरसी ने सरकार से मिलकर आदर्श टैक्स दर के बारे में सुझाव दिया ताकि राज्य सरकार और क्लब दोनों को मुनाफा हो.

राज्य सरकार ने बड़ी पहल करते हुए टैक्स दर कम कर दी. सरकार की मंशा थी कि इससे राज्य का राजस्व बढ़ेगा और अधिक दर के कारण बढ़ी सट्टेबाजी की कालाबाजारी में कमी आएगी. सरकार के इस फैसले के बाद इसमें भारी कानूनी निवेश हुआ.

पढ़ेंः क्रिकेट में सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता मिलेः जस्टिस लोढ़ा समिति

अगर दिल्ली पुलिस की बात सच है कि हर आईपीएल मैच में करीब 150 करोड़ रुपये का सट्टा लगता है तो हमें इस पैसे के उपयोग के बारे में सोचना चाहिए. इस धनराशि के महज एक प्रतिशत से देश के 60 बड़े एथलीटों को साल भर के लिए युवा एथलीटों को ट्रेनिंग देने के लिए रखा जा सकता है. जिससे ओलंपिक और एशियन खेलों में देश ज्यादा पदक जीत सकेगा.

इस बात की सख्त जरूरत है कि इतनी बड़ी धनराशि को कालेबाजार में जाने से रोका जाए ताकि वो देश को किसी तरह नकुसान न पहुंचा सके. इससे पहले कि बहुत देर हो हमें इसपर गंभीरता से सोचना होगा.

First published: 11 January 2016, 20:43 IST
 
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