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पद्म पुरस्कारों के बारे में निकली गुट्टा की 'ज्वाला'

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 January 2017, 15:48 IST

मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा कोर्ट में न केवल अपने शॉट्स बल्कि असल जिंदगी में भी अपने बेबाक बयानों से चर्चा में बनी रहती हैं. अब एक बार फिर उन्होंने पद्म पुरस्कारों को लेकर अपनी ज्वाला निकालते हुए इसके लिए न चुने जाने पर निराशा जाहिर की है.

ज्वाला गुट्टा ने सोशल मीडिया पर पद्म पुरस्कारों के बारे में बताते हुए लिखा कि पुरस्कार उन्हीं को मिलते हैं जो सिफारिशी पत्र लेकर पहुंचते हैं. 

अपने फेसबुक पेज पर उन्होंने आगे लिखा, "मुझे हमेशा इस बात पर हैरानी होती है कि जो पुरस्कार हमारे देश के सर्वोच्च सम्मान में से एक है उसके लिए आवेदन करना पड़ता है....लेकिन जब यही प्रक्रिया है...तो मैंने भी आवेदन किया...और इसलिए आवेदन किया क्योंकि यह अवॉर्ड पाना काफी सम्मान की बात है... क्योंकि मुझे लगा कि शायद मैंने भी अपने खेल से अपने देशवासियों गर्व का मौका दिया है और मैं इसकी हकदार हूं."

ज्वाला यहीं नहीं रुकीं और उन्होंने आगे लिखा, "मैं अपने देश के लिए पिछले 15 साल से भी ज्यादा वक्त से खेल रही हूं... और मैंने कई प्रमुख प्रतियोगिताएं जीतीं हैं...मैंने सोचा कि शायद मुझे भी आवेदन करना चाहिए...लेकिन मुझे लगता है यह कभी काफी नहीं होता..."

उन्होंने पूछा, "आपको इसके लिए सिफारिशों की जरूरत होती है कि आप इस अवॉर्ड की हकदार हो. आपको इसके लिए कहलाना पड़ता है और पत्र लाने पड़ते हैं और इसकी फेहरिस्त आगे जारी रहती है...लेकिन अभी भी मेरे पास वही सवाल है कि क्योंकि मुझे इस अवॉर्ड के लिए आवेदन करना चाहिए और क्योंकि किसी की सिफारिश की जरूरत होती है. क्या मेरी उपलब्धियां काफी नहीं हैं?"

इसके आगे ज्वाला ने सवाल किया, "मैं वाकई इस पूरी प्रक्रिया को समझने की उत्सुक हूं...मेरे पिछले लगातार दो मेडल, दिल्ली कॉमनवेल्थ गोल्ड और ग्लासगो सिल्वर क्या काफी नहीं हैं, मेरा विश्व चैंपियनशिप में पदक काफी नहीं है, मैं वीमेन डबल्स और मिक्स्ड डबल्स के टॉप 10 में शामिल रही और सुपरसिरीज में मेरा प्रदर्शन और ग्रां प्रिक्स में स्वर्ण क्या काफी नहीं है?"

ज्वाला यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने कहा,  "मैं 15 बार की राष्ट्रीय चैंपियन हूं और मैं पहली ऐसी भारतीय हूं जो इतिहास में ओलंपिक की दो प्रतियोगिताओं में क्वॉलीफाई कर पाई, मैं पहली ऐसी भारतीय हूं जिसने प्रकाश पादुकोण के बाद विश्व चैंपियनशिप में जीत हासिल की और इसके अलावा भी कई बातों में पहली हूं...जब कोई इस बात को गंभीरता से नहीं लेता था तब मैंने देश को बैडमिंटन डबल्स का रास्ता दिखाया..."

आखिरी में उन्होंने लिखा, "लेकिन शायद यह कभी काफी नहीं होता. क्या इसलिए कि मैं बेबाकी से बोलती हूं? क्योंकि मैं स्वच्छंद हूं? आखिर क्यों मुझेे इस अवॉर्ड के लिए नजरअंदाज कर दिया गया? अब मुझे वाकई नहीं  लगता कि मुझे इस अवॉर्ड को कैसे मांगना चाहिए...या फिर मैं इसके काबिल ही नहीं हूं...अगर यह भी काफी नहीं है तो वो आखिर क्या है?"

First published: 27 January 2017, 15:48 IST
 
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