Home » खेल » Jwala Gutta slammed the media and the national federation for not giving due importance to doubles
 

ज्वाला गुट्टा: हमारे साथ हमेशा सौतेला व्यवहार किया जाता रहा है

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 January 2017, 12:30 IST

भारत की शीर्ष बैडमिंटन महिला डबल्स खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने मंगलवार को कहा कि वह खिलाड़ियों की मदद करने के लिए अपने अनुभव का इस्तेमाल करना चाहती हैं और सलाहकार के तौर पर भारतीय बैडमिंटन संघ (बाई) से जुड़ना चाहती हैं.

ज्वाला ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मुझे पर्याप्त अनुभव है और मैंने अपने देश के लिए कई खिताब और पदक जीते हैं. मैं डबल्स खिलाड़ियों की मदद कर सकती हूं. मैं युगल खिलाड़ियों से जुड़े मसलों के संबंध में सलाहकार के तौर पर संघ के प्रशासन में आना चाहती हूं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम हमेशा डबल्स के प्रदर्शन की आलोचना करते हैं. एकल खिलाड़ियों को जो लगातार सहयोग मिलता है वह डबल्स खिलाड़ियों की तुलना में बहुत अधिक है. यह अंतर 100:1 का है. हमें बमुश्किल ही सहयोग मिलता है. हमें केवल सरकार से सहयोग मिलता है लेकिन अगर हमें शीर्ष स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करना है तो यह उसके लिए पर्याप्त नहीं है.’’

ज्वाला ने कहा, ‘‘हमारे साथ हमेशा सौतेला व्यवहार किया जाता रहा है और इतने वर्षों में कुछ भी नहीं बदला है. हम यहां केवल इसलिए हैं क्योंकि हम यहां रहना चाहते हैं और हमें किसी तरह का सहयोग नहीं मिलता है. संभवत: यह मेरे करियर का आखिरी चरण है लेकिन हमारे पास अब भी डबल्स संस्कृति नहीं है. भारत में डबल्स खिलाड़ी बनने के लिए हिम्मत चाहिए.’’

ज्वाला ने कहा कि आज भी प्रायोजक, स्वास्थय सुविधाएं, न्यूट्रीशन जैसी सुविधाएं डबल्स खिलाड़ी के लिए नहीं है. यह एक कारण है कि भारत में डबल्स खिलाड़ियों के प्रदर्शन में निरंतरता नहीं है.

ज्वाला ने कहा, 'मैं यही सवाल करना चाहती हूं, हो सकता है कि मेरे करियर का अंतिम पड़ाव हो, लेकिन हमारे पास कितने उभरते युगल खिलाड़ी हैं. भारत में युगल मुकाबले खेलने के लिए आपको हिम्मती होना पड़ेगा. मैंने लंदन ओलम्पिक-2012 में मिश्रित युगल खेलना बंद कर दिया था. इसके बाद रियो ओलम्पिक में क्वालीफाई करने लिए मिश्रित जोड़ी होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. किसी ने कोशिश नहीं की. हमारे पास दूसरी बैंच नहीं है'.

First published: 11 January 2017, 12:30 IST
 
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