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कबड्डी वर्ल्ड कप: जानिए भारत के सबसे पुराने खेल के नियमों के बारे में

वंसों सरल | Updated on: 8 October 2016, 17:51 IST
(कबड्डी वर्ल्ड कप)

कबड्डी इस देश के गांव-गिरांव में फैला सबसे लोकप्रिय और शायद सबसे पुराना खेल है. माना जाता है कि कबड्डी का जन्म तमिलनाडु में हुआ. कबड्डी शब्द तमिल काई-पीडि (चलो हाथ पकड़ते हैं) से बना है. पंजाब, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में इसे राज्य खेल का दर्जा भी हासिल है. 

कबड्डी हमारे पड़ोसी बांग्लादेश का राष्ट्रीय खेल है. वैसे, हिंदुस्तान की कबड्डी की टीम दुनिया की बेताज बादशाह है. 1990 में पहली बार कबड्डी को एशियाई खेलों में शामिल किया गया था. तब से लेकर आज तक हर बार भारत ने कबड्डी का गोल्ड मेडल जीता है. इसके अलावा भारत साल 2004 और 2007 में दो-दो वर्ल्ड कप भी अपने नाम कर चुका है.

भारत के अलावा यह खेल बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, मलयेशिया, कोरिया और इंडोनेशिया में भी खेला जाता है.

कबड्डी के खेल के नियमों में समय के साथ-साथ काफी बदलाव हुए हैं. आइये जानते हैं इसके नियमों के बारे में-

मैदान

चौकोर कबड्डी का मैदान अमूमन टेनिस, बैडमिंटन के कोर्ट की तरह ही दो पालों में बंटा रहता है. हालांकि इसमें नेट की बजाय बीच में एक रेखा खिंची रहती है. कई मायनों में यह बेहद सीधा-सरल खेल है. कबड्डी के खेल का मैदान 12.5 मीटर लंबा और 10 मीटर चौड़ा होता है जो बीच से दो बाराबर हिस्सों में बंटा रहता है.

खिलाड़ी

कबड्डी के खेल में दोनों तरफ 12-12 खिलाड़ी होते हैं. एक समय में मैदान में 7 खिलाड़ियों को ही मैदान में उतारा जा सकता है और शेष 5 खिलाड़ी रिजर्व में रहते हैं.

मैच अवधि

खेल की अवधि न्यूनतम 40 मिनट की होती है. इसमें 20-20 मिनट के दो हाफ़ होते हैं. दोनों हाफ़ के बीच 5 मिनट का ब्रेक होता है. ब्रेक के बाद दोनों टीमों को अपने पाले बदलने होते है. पहले हाफ़ के अंत में प्रत्येक टीम में जितने खिलाड़ी थे, उन्हीं खिलाड़ियों से दूसरे हाफ़ की शुरुआत करनी पड़ती है.

स्कोरिंग प्रणाली

हर टीम में 5-6 स्टापर (पकड़ने में माहिर खिलाड़ी) व 4-5 रेडर (छूकर भागने में माहिर) होते हैं. एक बार में सिर्फ चार स्टापरों को ही कोर्ट पर उतरने की इजाजत होती है. जब भी स्टापर किसी रेडर को अपने पाले से बाहर जाने से रोकते हैं उन्हें एक अंक मिलता है लेकिन अगर रेडर उन्हें छूकर भागने में सफल रहता है तो उसकी टीम को अंक मिल जाता है. ऑल आउट स्कोर हासिल करने वाली टीम को दो अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं.

निर्णायक

पूरे मैच की निगरानी सात लोग करते हैं: एक रेफ़री, दो अंपायर, दो लाइंसमैन, एक टाइम कीपर और एक स्कोरर

नियम

पहले सात खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं. सबसे आक्रामक खिलाड़ी कबड्डी-कबड्डी कहता हुआ विरोधी दल की और बढ़ता है और उसके खिलाड़ियों को छूकर, बिना सांस तोड़े, नियमों का उल्लघंन किए बिना अपने क्षेत्र में वापिस आना होता है.

वह जितने खिलाड़ियों को छूता है, उसकी टीम को उतने ही नंबर मिलते हैं. अगर उसे विपक्ष के खिलाड़ी घेरने में कामयाब हो जाते हैं और उसकी सांस वहीं टूट जाती है तो वह खेल से बाहर हो जाता है. जिस टीम को ज्यादा नंबर मिलते हैं, वही विजयी रहती है.

कबड्डी का मैदान (टेलीग्राफ)

बोनस पॉइन्ट

  • यदि रैडर बोनस लाइन पार करता है तो उसे एक पॉइन्ट मिलेगा. बोनस लाइन पार करने के बाद रैडर पकड़ा जाता है तो विरोधी टीम को भी एक पॉइन्ट मिलेगा.
  • डिफेंडर पाले में कम से कम 6 डिफेंडर होने पर ही बोनस लाइन लागू होगी. इस तरह की रेड पूरी होने के बाद, जिस टीम ने बोनस पॉइन्ट जीता है, उसकी ओर, हाथ का अंगूठा उठाकर रेफरी / अम्पायर बोनस पॉइन्ट की घोषणा करेंगे.
  • यदि रेडर बोनस लाइन पार करते समय पकड़ा जाता है तो डिफेंडिंग टीम को एक पॉइन्ट मिलेगा. कोई बोनस अंक नहीं दिया जाएगा.
  • यदि रेडर बोनस लाइन पार करने के बाद एक या अधिक डिफेंडर को आउट करता है तो उसे बोनस लाइन पार करने पर मिले बोनस पॉइन्ट के अलावा आउट किए गए खिलाड़ियों के भी अंक मिलेंगे.
  • बोनस पॉइन्ट हासिल करने के लिए रैडर को किसी डिफेंडर को छूने या उनके द्वारा पकड़ा जाने से पहले बोनस लाइन को पार करना होगा. यदि रेडर किसी को छूने या संघर्ष के बाद बोनस लाइन पार करता है तो उसे कोई बोनस अंक नहीं मिलेगा.
  • बोनस पॉइन्ट मिलने के आधार पर किसी खिलाड़ी को जीवित नहीं किया जा सकता.

First published: 8 October 2016, 17:51 IST
 
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