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जानिए क्यों और कब सचिन तेंदुलकर ने लिया क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 March 2017, 19:51 IST
(PTI)

क्रिकेट के महान खिलाड़ी सचिन रमेश तेंदुलकर को पूरी दुनिया जानती है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का उनका फैसला, उनके हर प्रशंसक को निराश कर गया था. हालांकि लोगों के बीच यह उत्सुकता थी कि सचिन ने इतनी जल्दी यह फैसला क्यों लिया.

ऐसे सभी लोगों के सवालों का जवाब अब खुद मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने दे दिया है. मास्टर ब्लास्टर के मुताबिक क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला उनके दिमाग में सबसे पहली बार अक्तूबर 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी T20 मैच के दौरान आया.

सचिन तेंदुलकर ने यह खुलासा प्रोफेशनल नेटवर्किंग वेबसाइट लिंक्डइन पर किया है. हाल ही में लिंक्डइन से 'इंफ्लूएंसर' की तरह जुड़ने वाले सचिन तेंदुलकर ने बृहस्पतिवार को 'माई सेकेंड इनिंग्स' के नाम से इस प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट लिखकर अपने अनुभव साझा किए.

तेंदुलकर ने लिखा, "यह बात है अक्तूबर 2013 में दिल्ली में आयोजित चैंपियंस लीग के एक मैच के दौरान. मेरी रोजाना सुबह की शुरुआत जिम में कसरत के साथ होती थी और मैं पिछले 24 सालों से ऐसा करता आ रहा था. लेकिन उस सुबह कुछ बदला हुआ था."

उन्होंने आगे लिखा, "मैंने महसूस किया कि मुझे खुद को जबरन जगाना और अपने दिन की शुरुआत करने के लिए कहना पड़ रहा है. मैं जानता था कि जिम जाना मेरे क्रिकेट का एक अहम हिस्सा है- जो मेरी जिंदगी में पिछले 24 सालों से चला आ रहा था."

 

राज्य सभा सांसद तेंदुलकर ने लिखा, "फिर भी वहां अनिच्छा दिखी. क्यों? क्या यह कोई संकेत थे... ऐसे संकेत कि अब मुझे रुक जाना चाहिए? ऐसे संकेत जो मुझे बता रहे थे कि जो खेल अब तक मेरे लिए सबकुछ था, अब मेरे दैनिक जीवन का हिस्सा नहीं रहेगा?"

बता दें कि मास्टर ब्लास्टर 2013 चैंपियंस लीग T20 मैच की विजेता टीम मुंबई इंडियंस की ओर से खेले थे. उन्होंने 2, 5 और 6 अक्तूबर को तीन मैच खेले.

इसके बाद उन्होंने नवंबर में वेस्ट इंडीज के खिलाफ अपने अंतिम दो टेस्ट मैच कोलकाता और मुंबई में खेले. यह मैच काफी कम वक्त में आयोजित किए गए थे और इसके बाद तेंदुलकर ने संन्यास की घोषणा कर दी.

अपने रिटायरमेंट के बारे में बताते हुए सचिन ने लिखा, "मेरे एक हीरो और पूर्व क्रिकेटर सुनील गवास्कर ने एक बार कहा था कि उन्होंने खेल छोड़ने का मन तब बना लिया था जब उन्होंने खुद को घड़ी देखते हुए पाया, वो भी इसलिए ताकि पता चले कि लंच और चाय के लिए कितना वक्त बचा है."

"अचानक मुझे पता चला कि उनके कहने का क्या मतलब था. मेरा शरीर और दिमाग भी मुझसे ऐसे ही कह रहा था. शायद यही वक्त था जब मैं अपना बल्ला रख दूं."

 

"मुझे कुछ साल पहले विंबलडन में बिली जीन किंग के बोले शब्द भी याद आएः आपको बिल्कुल सटीक ढंग से पता चल जाएगा कि कब जाना है, यह आपके अंदर से पता चलेगा, दुनिया को यह तय मत करने दो कि आपको कब संन्यास लेना चाहिए."

"लेकिन एक खिलाड़ी जब खिलाड़ी नहीं रहेगा तो क्या करेगा? आप रोज के लिए खुद को कैसे तैयार करोगे जब 24 साल तक आप एक ही तरह की जिंदगी जीते आए, क्या लक्ष्य होगा?"

"जब भी मैदान में जाता था, स्टेडियम में बैठे दर्शकों की सचिन-सचिन चिल्लाने की गूंजती आवाज मेरे लिए क्या मायने रखती है, मैं इसे बयां नहीं कर सकता. अब यह नहीं सुनाई देगी. क्या मैं इसके लिए तैयार था? इन विचारों, परिवार और नजदीकी मित्रों से चर्चा के बाद मैं फैसला ले सका. मेरी इनिंग्स अब समाप्त होने वाली थीं."

सचिन ने आगे लिखा, "मेरी आंखों के सामने कई साल उमड़ आए. इस दौरान की सफलताएं, हार, खुशियां मनाना, चुनौतियां और खामोशी... पूरा सफर. 2011 में भारत का वर्ल्ड कप जीतना मेरे लिए एक सपना पूरा होने जैसा था और टीम ने भी विजयी कप मुझे समर्पित किया. लेकिन मेरी जिंदगी का एक अध्याय खत्म हो रहा था. अब क्या होगा, मैं हैरान था."

First published: 3 March 2017, 19:54 IST
 
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