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जब मोहम्मद और मुक्के के संगम से दुनिया की आंखें चुंधिया गई

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 June 2016, 15:35 IST
(फेसबुक)

25 फरवरी, 1964 को फ्लोरिडा के मियामी बीच पर दुनिया को बॉक्सिंग का नया सितारा मिला था. महज 22 की उम्र में 'द ग्रेटेस्ट' के नाम से मशहूर हुए मोहम्मद अली ने उस दिन सोनी लिस्टन को हराकर वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया.

खेलों की दुनिया में अली का नाम महानतम खिलाड़ियों में शुमार है. उनका जन्म 17 जनवरी, 1942 को अमेरिका में केंचुकी शहर में हुआ था. उन्हें 'स्पोर्ट्समैन ऑफ द सेंचुरी' और 'स्पोर्ट्स पर्सनालिटी ऑफ द सेंचुरी' भी कहा जाता है.

मोहम्मद अली ने तीन बार वर्ल्ड हेवीवेट चैंपियनशिप का खिताब जीता. 1964 में पहली बार यह खिताब जीतने के बाद वे 1974 और 1978 में वर्ल्ड चैंपियन बने.

गुरुवार को 74 साल की उम्र में अली का शनिवार को अमेरिका के एक अस्पताल में निधन हो गया. अली सांस लेने में तकलीफ की समस्या से जूझ रहे थे, जो पर्किन्सन की उनकी बीमारी की वजह से अधिक जटिल हो गयी. उन्हें 1984 में इस बीमारी का पता चला था.

महानतम मुक्केबाज अली की अनोखी कहानियां:

  • अली के बचपन का नाम कैसियस मर्सेलुस क्ले जूनियर था. बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया और अपना नाम मोहम्मद अली रख लिया. उनके बारे में कहा जाता है कि वह स्कूल बस से नहीं जाते थे बल्कि हर दिन बच्चों को ले जाने वाली बस से रेस लगाते थे.
  • अली ने अपने पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप मुकाबले के लिए जो दस्ताने पहने थे वे करीब पांच करोड़ रुपये में बिके थे. अली ने साल 1971 में जो फ्रेजियर के खिलाफ मुकाबले में जो मुक्केबाजी वाले दस्ताने पहने थे वे करीब दो करोड़ 60 लाख रुपये में नीलाम हुए.

  • 1971 में अली और दिग्गज मुक्केबाज जो फ्रेजियर के बीच हुए मुकाबले 'फाइट ऑफ द सेंचुरी' कहा गया. दक्षिण कैरोलीना के पूर्व कृषि श्रमिक फ्रेजियर पहले व्यक्ति रहे जिन्होंने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में अली की चुनौती को तोड़ा.

  • तीन साल बाद 1974 में अली ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में हुई मुकाबले में ही फ्रेजियर को हराकर हिसाब चुकता कर दिया.
  • इसके एक साल बाद इन दोनों के बीच सबसे चर्चित मुकाबला हुआ, जिसे ‘थ्रिल इन मनीला’ नाम दिया गया. 1 अक्टूबर 1975 में अली ने फ्रेजियर को दूसरी बार मात दी. इस 14 राउंड के मुकाबले में फ्रेजियर ने अली पर 440 मुक्के बरसाए. कहा जाता है कि इस मुकाबले में अली को लगी चोटों के चलते ही उन्हें पर्किन्सन बीमारी हुई.

  • इसके अलावा 1974 में अली और जार्ज फोरमैन के बीच हुए मुकाबले को 'रम्बल इन द जंगल' का नाम दिया गया. यह मुकाबला कांगो में हुआ था. फोरमैन को संभावित विजेता माना जा रहा था लेकिन अली ने यह मुकाबला आठवें राउंड में जीत लिया.

  • बॉक्सिंग के अलावा अली वियतनाम युद्ध में अमेरिकी सेना का हिस्सा बनने से इंकार करके भी प्रसिद्ध हुए. 1967 में सेना में भर्ती होने से इंकार करने पर उनका खिताब छीन लिया गया था और उनके बॉक्सिंग करने पर भी पाबंदी लग दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन पर लगी पाबंदी हटी.
  • रोम ओलंपिक (1960) में लाइट हेवीवेट में केवल 18 साल की उम्र में गोल्ड मेडल जीतकर अली दुनिया की नजरों में पहली बार आए. नस्लभेद के खिलाफ आवाज उठाने वाले अली ने कहा था कि उन्होंने अपना मेडल नस्लवाद से तंग आकर ओहाइयो नदी में फेंक दिया था. साल 1996 में उन्हें 'मानद ओलंपिक गोल्ड' दिया गया.
  • अली ने अपने करियर में 61 फाइटें लड़ी और 56 जीतीं. इनमें से 37 का फैसला नॉकआउट में हुआ. उन्हें अपने करियर में सिर्फ पांच बार हार का सामना करना पड़ा. केन्ट ग्रीन एकलौते मुक्केबाज हैं जिन्होंने अली को नॉकआउट में हराया है. 1981 में अली ने बॉक्सिंग से संन्यास ले लिया.
  • पिछले साल उन्होंने ट्रंप के बयान की आलोचना की थी, जिसमें ट्रंप ने कहा था अमेरिका में मुसलमानों के आने पर पूरी तरह रोक लगा देनी चाहिए. अली ने कहा कि मुसलमानों को उन लोगों के खिलाफ खड़े होना पड़ेगा, जो इस्लाम का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए करते हैं. अली ने ट्रंप के बयान की ओर इशारा करते हुए कहा, 'ऐसा करके उन्होंने कइयों को इस्लाम के बारे में जानने से रोक दिया है.'
First published: 4 June 2016, 15:35 IST
 
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