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तनाव और तेंदुलकर की छाया से निकल नया किरदार रचते कोहली

जी राजारमन | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST
QUICK PILL
  • जेम्स फॉकनर और नाथन कॉल्टर नाइल का ओवर मैच का रुख बदलने वाला रहा. कोहली ने दिखा दिया कि वो सही मौके को भुनाने में मास्टर हैं. उनकी पारी धैर्य और आक्रामकता का अनोखा नमूना रही.
  • पारी के बीच में अपने शांत व्यवहार से कोहली ने अपने इमोशन को दबाए रखा. कोहली ने कभी ऐसे संकेत नहीं दिए कि वो बहुत जल्दी में हैं.

टी-20 क्रिकेट के अस्थिर और बदलते स्वभाव के कारण इसे लंबे वक्त तक याद रखना प्रशंसकों के लिए चुनौती है. जैसे समुद्र की हर लहर के साथ एक नई रेखा बनती है, लेकिन कुछ समय के लिए. अगली लहर के साथ एक नया पैटर्न बन जाता है. नित कुछ नया घटता रहता है.

आईसीसी टी-20 के सुपर-10 मुकाबले में विराट कोहली की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई 82 रन की पारी भी कुछ ऐसी ही है. मोहाली में खेली इस पारी में ना तो क्रिस गेल की तरह धुआंधार बल्लेबाज़ी नज़र आती है, ना ही ये एबी डी विलियर्स के तूफानी अंदाज से मेल खाती है. इसके बावजूद विराट की ये पारी टी-20 क्रिकेट के इतिहास में यादगार और महान पारियों में दर्ज होगी.

जैसे ही महेंद्र सिंह धोनी ने जीत का चौका लगाया और कोहली जीत की खुशी में घुटनों के बल बैठे, देशभर में जीत का जश्न मनाते हुए आतिशबाजी होने लगी. इसके बावजूद जीत के बाद कोहली ने ये कहने में देर नहीं लगाई कि अभी सेमीफाइनल की टक्कर बाकी है.

कोहली और टीम इंडिया के सामने अब नई चुनौती है. रविवार की पारी रिकॉर्डबुक के साथ ही लोगों की यादों में भी अमिट छाप छोड़ गई है. 31 मार्च को मुंबई में भारतीय टीम को खतरनाक वेस्टइंडीज के साथ सेमीफाइनल खेलना है. उससे पहले क्रिकेट प्रशंसक कोहली की बेहतरीन पारी की यादों में खोए रह सकते हैं.

धैर्य-आक्रामकता का अनूठा संगम

जब कांटे के मुकाबले में नर्वस भारतीय प्रशंसकों की सांसें अटकी हुई थीं ऐसे वक्त में बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए कोहली पूरी लय में दिखे. मैदान में गैप को कोहली ने बड़ी ही आसानी से ढूंढ़ा, और जरा भी बिगड़ी लाइन लेंथ की गेंद पर उन्होंने खूबसूरत प्रहार करने में देर नहीं लगाई.

कोहली ने अपने इमोशन को दबाए रखा. कोहली ने कभी ऐसे संकेत नहीं दिए कि वो बहुत जल्दी में हैं

जेम्स फॉकनर का 1वां और नाथन कॉल्टर नाइल का 1वां ओवर मैच का रुख बदलने वाला रहा. कोहली ने दिखा दिया कि वो सही मौके को भुनाने में मास्टर हैं. उनकी पारी धैर्य और आक्रामकता का अनोखा नमूना रही. 

पारी के बीच में अपने शांत व्यवहार से कोहली ने अपने इमोशन को दबाए रखा. कोहली ने कभी ऐसे संकेत नहीं दिए कि वो बहुत जल्दी में हैं.

जेम्स फॉकनर को लगातार चौके जड़ने के बावजूद कोहली धैर्यपूर्वक बल्लेबाजी करते रहे. फील्डर्स के बीच से कोहली ने छोटे से छोटा गैप सावधानीपूर्वक ढूंढ़ा. जब बाएं हाथ के तेज गेंदबाज को उन्होंने लॉन्ग ऑफ की सीमा रेखा से बाहर भेजा तब कहीं जाकर कोहली ने अपने मनोभाव जाहिर किए.

विकेटों के बीच बेदाग दौड़

अंतिम प्रहार से पहले ही कोहली की ये पारी उनकी विकेटों के बीच दौड़ का नायाब नमूना बन चुकी थी. जब तक युवराज जख्मी पैर के साथ बल्लेबाजी कर रहे थे कोहली धीरे-धीरे सिंगल लेते रहे. लेकिन धोनी के क्रीज पर पहुंचते ही कोहली ने विकेटों के बीच रेस करते हुए रफ्तार पकड़ ली.

जोश हेजलवुड के आखिरी और पारी के 16वें ओवर में कोहली ने धोनी के साथ दौड़ लगाते हुए चार बार दो-दो रन लिए. यही नहीं डेविड वार्नर और ग्लेन मैक्सवेल जैसे शानदार क्षेत्ररक्षकों को कोहली लगातार मात देते रहे. जिम मे की गई कड़ी वर्जिश विराट की पारी के दौरान रंग लाती दिखी.

दबाव को बनाया दोस्त

भविष्य में जब भी हम कोहली के कायाकल्प पर नजर डालेंगे तो पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी-20 वर्ल्ड कप में उनकी मैच जिताऊ पारियां अहम हिस्सा होंगी. कोहली के करियर में इस करिश्मे को दबाव को दोस्त बनाने वाले अध्याय के तौर पर याद रखा जाएगा.

क्रिकेट लीजेंड कोहली

एक साल से ज्यादा वक्त पहले महान बल्लेबाज सर विवियन रिचर्ड्स ने कोहली को आधुनिक युग का लीजेंड घोषित किया था. हालांकि अभी विराट कोहली में बहुत क्रिकेट बची है फिर भी उसी वक्त से भारतीय बल्लेबाजी की धुरी बनते हुए विराट ने सर विव रिचर्ड्स के शब्दों को सही साबित किया है.

निश्चित तौर पर ना तो ये पहली बार था जब विराट इस अंदाज में खेले हैं ना ही आखिरी बार होगा

रविवार की उनकी पारी ने कोहली के कद में चार चांद लगाए हैं. निश्चित तौर पर ना तो ये पहली बार था जब विराट इस अंदाज में खेले हैं ना ही आखिरी बार होगा.

क्या 1998 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शारजाह में सचिन तेंदुलकर के बाद किसी भारतीय बल्लेबाज ने सीमित ओवर के क्रिकेट में इस अधिकार के साथ बल्लेबाजी की है? 

हालांकि 2000 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान नैरोबी में कंगारुओं के खिलाफ युवराज सिंह की 89 रन की पारी को कोई कैसे भूल सकता है. यही नहीं 2006 में पाकिस्तान के खिलाफ लाहौर में धोनी के धुआंधार 79 रन की पारी को भी भुलाया नहीं जा सकता.

लेकिन क्या हमने कभी इतने दबाव के बीच ऐसी अधिकारपूर्ण और शानदार बल्लेबाजी करते किसी को देखा है जैसा रविवार को कोहली ने किया. 

अगर हम नटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल के दौरान 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ मोहम्मद कैफ की पारी को अनदेखा कर देंगे तो ये अन्याय होगा. 2003 के वर्ल्ड कप में लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान के खिलाफ सेंचुरियन में खेली गई तेंदुलकर की 98 रन की यादगार पारी को भी भुलाना गुनाह होगा.

कोहली का कायाकल्प

वैसे तुलनाओं की बजाय अगर हम कोहली के नए उभार पर ध्यान देंगे तो बेहतर होगा. वक्त के साथ वो निखरते जा रहे हैं. अपने लिए नई सीमाएं बनाने के साथ ही वो हर बार कुछ सीखने की चाह लेकर बल्लेबाजी करने उतर रहे हैं. उनका ये नया तेवर काफी उत्साहजनक है.

लेकिन टेस्ट में कप्तानी का हल्का बोझ भी उनके कंधों पर है. एक उग्र युवा क्रिकेटर से समझदार नेतृत्वकर्ता बन चुके कोहली का कायाकल्प देखना बेहद सुखद है. 

न्यूजीलैंड के खिलाफ टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबले में जल्दी आउट होने के बाद कोहली काफी निराश थे. लेकिन लगता है कि इस नाकमी ने उन्हें और मजबूत बनाया. पहले कोलकाता के ईडन गार्डन्स में पाकिस्तान से जीत और फिर मोहाली के नॉकआउट मुकाबले में कंगारुओं के खिलाफ जीत के विराट नायक बनकर कोहली उभरे.

'विराट' टीम लीडर

मोहाली के मैच के बाद कोहली के किरदार में एक और अहम बात दिखी. कोहली ने मैच में 21 रन बनाने वाले युवराज सिंह के छोटे योगदान की भी प्रशंसा की. 

मीरपुर में 2014 के वर्ल्ड टी-20 फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ हार के बाद बेहद निराश और दुखी दिखने वाले कोहली के व्यवहार में ये बड़ा बदलाव है. युवराज के योगदान को अहमियत देने वाले कोहली के बयान से साबित होता है कि कोहली टीम लीडर के रूप में उभर रहे हैं.

मास्टर ब्लास्टर से आगे!

ईडन गार्डन्स में पाकिस्तान के खिलाफ हॉफ सेंचुरी ठोकने के बाद तेंदुलकर को सलामी देने वाला उनका अंदाज प्रशंसकों के दिल को छू गया. लेकिन इस अदा के साथ तेंदुलकर के आभामंडल में डूबने की बजाय कोहली का एक निराला रूप भी सामने आया है. 

मोहाली में अपनी बेमिसाल और यादगार पारी के साथ कोहली अपने करियर की नई बुलंदी पर हैं और प्रशंसकों के लिए ये ख़ुश होने का बड़ा मौका है.

First published: 29 March 2016, 8:56 IST
 
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