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फ़िल ह्यूज़ की मृत्यु के एक साल बाद सुरक्षा के लिहाज से क्रिकेट में क्या बदला है?

सुयश उपाध्याय | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST
QUICK PILL
  • ब्रितानी क्रिकेट क्लब ईसीबी ने बल्लेबाजी,विकेट कीपिंग और स्टम्प के करीब फ़िल्डिंग के दौरान हेलमेट पहनना अनिवार्य किया.
  • पिछले साल ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज फ़िल ह्यूज़ की गेंद लगने से हुई मृत्यु के बाद से क्रिकेट में सुरक्षा मानकों को अनिवार्य बनाने की मांग बढ़ी है.

ब्रिटेन में अगले क्रिकेट सीज़न से बल्लेबाजी, विकेट कीपिंग और स्टंप के करीब फील्डिंग करते हुए हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा. 

इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के सीईओ निक पियर्स ने खबर की पुष्टि की है. उनके अनुसार हेलमेट नहीं पहनने वाले खिलाड़ियों को चोट लगने की काफी संभावना होती है, इसलिए ये फ़ैसला लिया गया.

नए निर्देशों के अनुसार नए हेलमेटों को नवीनतम सुरक्षा मानकों के अनुरूप होना चाहिए. 

लेकिन क्या ये कदम देर से उठाया गया है?  

फिल ह्यूज़ की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु

क्रिकेट में क़रीब नब्बे मील प्रति घंटा की रफ़्तार वाली गेंद जब खिलाड़ी के शरीर पर लगती है तो चोट के घातक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है.

27 नवंबर 2014 को सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर खेले जा रहे शेफील्ड शील्ड मैच के दौरान ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज फिल ह्यूज की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से क्रिकेट में सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया.

जब ह्यूज को सीन एबॉट की गेंद से चोट लगी थी वो सभी सुरक्षा उपकरण पहने हुए थे. 

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और यहां तक ​​कि मेरिलबोन क्रिकेट क्लब में ऐसा कोई नियम नहीं है कि किसी बल्लेबाज को खेलते समय सुरक्षा उपकरण पहनना ही होगा.

बल्लेबाजों के लिए पिच पर हेलमेट पहनना भी अनिवार्य नहीं है चाहे वो तेज गेंदबाज हों या स्पिन गेंदबाज.

इस हादसे के बाद क्रिकेट के कर्ताधर्ताओं पर सुरक्षा उपकरण पहनना अनिवार्य करने का दबाव बढ़ गया है. खिलाड़ियों के लिए जरूरी सुरक्षा मानकों के बारे में विस्तृत नियम बनाने की उम्मीद की जा रही है. 

युवाओं को प्रशिक्षण

सबसे ज़रूरी बात है युवा खिलाड़ियों को सुरक्षा उपकरणों के प्रयोग के प्रति जागरूक बनाना. नवोदित क्रिकेटर चाहे प्रैक्टिस कर रहे हों या मैच खेल रहे हों उन्हें सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए. दुर्भाग्य से कई बार युवा खिलाड़ी इन सुरक्षा उपकरणों के बिना ही खेलतेे हैं.

इस मामले में भारत में भी स्थिति चिंताजनक है. मुंबई के क्रिकेट मैदानों पर जूनियर क्रिकेटरों को बगैर हेलमेट खेलते हुए देखना आम बात है. 

नौ वर्षीय गणेश मुंबई के आज़ाद मैदान में चलने वाली कई निजी अकादमियों में से एक में खेलते हैं. वह नेट पर बल्लेबाजी करते हुए हेलमेट क्यों नहीं पहनते हैं? यह पूछने पर गणेश कहते हैं, "सुनील गावस्कर ने कभी हेलमेट नहीं पहना, वह वर्ल्ड के बेस्ट बैट्समैन थे."

जाहिर है युवा क्रिकेटर अपने आइडियल क्रिकेट स्टार का अनुसरण करते हैं. 

ऐसे में अगर गावस्कर जैसे दिग्गज खेलते समय सुरक्षा उपकरण पहनने की जरूरत पर जोर दें तो युवा क्रिकेटरों पर उसका जरूर असर होगा. 

गणेश के कोच चर्चिल भी अपनी अकादमी में हेलमेट पहनने पर ज़ोर देते हैं. उनके यहां हेलमेट के बगैर बैटिंग प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं है. लेकिन वास्तव में इसपर कितना अमल होता है?

गणेश कहते हैं, "मैं जिस अकादमी में खेलता हूं उसमें 60 से अधिक बच्चे हैं. एक समय पर दो नेट पर एक साथ गेम चलता है. बच्चे शुरू में कुछ गेंदों के लिए हेलमेट पहनते हैं, लेकिन कुछ समय के बाद वो इसे उतार देते हैं."

गणेश मानते हैं कि सुरक्षा से जुड़े उपायों का कड़ाई से पालन होना चाहिए.

खेल को मानवीय जिजीविषा का सर्वोत्तम प्रतीक माना जाता है. ये हमेशा हमें कोई नया सबक सिखा जाता है.

फिल ह्यूज की मृत्यु के एक साल बाद हम खेल के सुरक्षा नियमों को मजबूत करके ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं. ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो.

ईसीबी का फैसला इस दिशा में उठाया गया पहला कदम है. अब बारी इसे जमीनी स्तर पर लागू करने की है.

First published: 30 November 2015, 11:00 IST
 
सुयश उपाध्याय @suyasu

संवाददाता, कैच न्यूज़

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