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सरकार की बेरुखी का शिकार हुआ ये पैरालंपिक एथलीट, सड़कों पर भीख मांगने को हुआ मजबूर

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 September 2018, 12:38 IST

मध्यप्रदेश में एक पैरालंपिक एथलीट सरकार की बेरूखी का इस कदर शिकार हुआ कि भीख मांगने को मजबूर हो गया. ऐसा नहीं कि इस पैरालंपिक एथलीट से राजनेताओं ने वायदे ना किए हों, लेकिन पूरा एक भी नहीं हुआ. इसीलिए अब ये पैरालंपिक एथलीट भोपाल की सड़कों पर भीख मांगकर अपना जीवनयापन कर रहा है.

हाल ही में इंडोनेशिया में समाप्त हुए एशियन गेम्स 2018 में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को केंद्र और राज्य सरकारों ने भारी पुरस्कार राशि देने की घोषणा की. मध्यप्रदेश के रहने वाले पैरालंपिक मनमोहन सिंह लोधी से भी सरकार और राजनेताओं ने इसी तरह के वायदे किए थे. लेकिन उनकी किस्मत अच्छी नहीं निकली और वो सड़क पर आ गए.

ऐसा नहीं है कि मनमोहन सिंह लोधी ने कभी कोई पदक ना जीता हो, उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते हैं. लेकिन अब वो सड़कों पर भीख मांगते हैं.

ये पदक जीत चुके हैं मनमोहन सिंह लोधी

समाचार एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक, मध्यप्रदेश में नरसिंहपुर में राष्ट्रीय स्तर के पैरा-एथलीट मनमोहन सिंह लोधी ने राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते हैं. उनका कहना है कि जब उन्होंने पदक जीते, तो उन्हें सरकारी नौकरी और कई अन्य पुरस्कारों का आश्वासन दिया गया. उन्होंने बताया कि वह राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कई बार मिले और उन्हें वादों की याद दिलाई, लेकिन सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली.

मनमोहन का कहना है कि राज्य सरकार ने मेरे सामने कोई रास्ता नहीं छोड़ा है. तो मजबूर होकर भीख मांगना शुरु कर दिया. मनमोहन ने बताया कि 2017 के नेशनल गेम्स में 100 मीटर रेस इवेंट के दौरान उन्होंने कई पदक अपने नाम किए थे.

आर्थिक परेशानी से जूझ रहा है मनमोहन का परिवार

पैरा-धावक मनमोहन का कहना है कि उन्होंने मजबूर होकर सभी पदक अपने गले में लटकाकर, अपनी प्रशिक्षण जर्सी पहने हुए सड़क पर भीख मांगने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि, "मैं आर्थिक रूप से कमजोर हूं. मुझे खेलने के लिए और परिवार को चलाने के लिए पैसों की जरूरत है. अगर मुख्यमंत्री मेरी मदद नहीं करते हैं, तो मुझे सड़कों पर भीख मांगकर अपनी आजीविका कमानी ही पड़ेगी."

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First published: 3 September 2018, 12:38 IST
 
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