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आईपीएल को रोककर सूखे का समाधान निकल जाएगा?

जयदीप घोष | Updated on: 13 April 2016, 16:17 IST
QUICK PILL
  • बॉम्बे हाईकोर्ट में सूखे के कारण महाराष्ट्र में होने वाले तीन आईपीएल मैचों को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने की याचिका दायर की गयी है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सूखा प्रभावित राज्य में स्टेडियम में पानी की बर्बादी होगी.
  • सूखे के कारण आईपीएल मैच को रोकना सही नहीं. इसके बदले आईपीएल के प्रायोजकों और टीम मालिक सूखा राहत के लिए कोई ठोस मदद करें तो बेहतर होगा.

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) कोई पवित्र कर्म नहीं है जिससे सहानुभूति रखी जाए लेकिन क्या सूखे के कारण महाराष्ट्र में आईपीएल मैच नहीं होना चाहिए?

सूखा एक बड़ी मानवीय त्रासदी है. इसके लिए ज़िला, प्रदेश और केंद्र सरकारों को शर्म आनी चाहिए. इक्कीसवीं सदी में भी हमारी सरकारी एजेंसियां लोगों को उनकी जरूरत का पानी उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं. यही हाल बिजली समेत कई दूसरी बुनियादी चीजों का है. वो सभी लोगों के लिए नहीं मयस्सर हैं.

महाराष्ट्र सूखा: 'आईपीएल से ज्यादा जरूरी हैं लोग'

भारत की सबसे बड़ी समस्या इसकी बढ़ती जनसंख्या है. लेकिन ज्यादा लोग मतलब ज्यादा वोट, इसलिए भारत की राजनीतिक पार्टियां इस गंभीर समस्या पर बात नहीं करेगी. बहरहाल, ये अलग कहानी है.

आईपीएल के कारण सूखा नहीं पड़ा


एक सवाल- जब कोलकाता में एक फ्लाईओवर गिरा और कुछ लोग उसके नीचे दबकर मर गए तो क्या ईडेन गार्डंस में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल को वहां से हटा दिया गया था?

नहीं. सच तो ये है कि इन लोगों का जिक्र तक नहीं हुआ क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार नहीं चाहती कि आगामी चुनाव से पहले उसकी बदनामी हो.

महाराष्ट्र का सूखा चाहे जितना भी भयानक हो लेकिन वो आईपीएल के कारण नहीं आया है

महाराष्ट्र का सूखा चाहे जितना भी भयानक हो लेकिन वो आईपीएल के कारण नहीं आया है, न ही राज्य में आईपीएल का मैच बंद कर देने सो वो उसमें तत्काल कोई सुधार आ जाएगा.

मैं जानता हूं कि मैं आपको बहुत निष्ठुर और अंसवेदनशील लग रहा होऊंगा. अगर मेरा वश चले तो मैं पूरे आईपीएल को ही बंद करवा दूं लेकिन फिलहाल उसी मुद्दे पर बात करते हैं जो हमारे सामने है.

बॉम्बे हाई कोर्ट आईपीएल को अमीरों द्वारा करवाए जा रहे ऐसे खेल के रूप में देख रहा है जो गरीबों और वंचितों की कीमत पर आयोजित होता है साथ ही इस त्रासदी का मजाक उड़ाता है.

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यह सच नहीं है. जिसके पास इस देश में सबसे अधिक पैसा और ताकत है वो है भारत सरकार.

हम बस सुनते ही रहते हैं कि भारत की सभी नदियों को नहरों से जोड़ा जाएगा लेकिन ये कभी होता नहीं है. अगर ये हो भी जाए तो संभव है कि हरियाणा के जाटों की तरह कोई नहर को रोक देगा और पूरा शहर या राज्य भूख-प्यास से तड़पने लगेगा.

आइए आईपीएल और सूखे पर वापस आते हैं.

हाईकोर्ट या जिस किसी को आईपीएल मैचों पर एतराज है मेरा उनसे अनुरोध है कि वो आईपीएल मैच होने दें. बदले में आईपीएल के मुख्य प्रायोजकों और टीम मालिकों से सूखा प्रभावित इलाकों में पानी की व्यवस्था में करने में मदद के लिए कहा जा सकता है.

मेरे ख्याल है कि जिन लोगों के पास तेल और गैस निकालने की क्षमता है उनके पास पानी के लिए गहरी ड्रिलिंग करवाने की क्षमता होगी.

कुछ देशों ने समुद्र के खारे पानी को फिल्टर करना शुरू कर दिया है. ये पानी कम से कम खेती के लायक बना लिया जाता है

पश्चिम एशिया के कुछ देशों ने समुद्र के खारे पानी को फिल्टर करना शुरू कर दिया है. ये पानी कम से कम खेती के लायक बना लिया जाता है. इन अरबपतियों को ऐसे संयंत्र और पाइपलाइन लगाने के लिए कहा जा सकता है.

जाहिर है कि ये सब तत्काल नहीं हो सकता. हमारे नेता उन्हें चंदा देने वालों पर ऐसी कोई जिम्मेदारी डालने के प्रति बहुत उत्साहित भी नहीं होंगे. लेकिन आईपीएल मैच को रद्द करने से तो ये विकल्प अच्छा है.

इससे पहले भी कई खेल आयोजनों का विरोध हुआ लेकिन वो हुए-

  • 2004 के एथेंस ओलिंपिक का ग्रीस में काफी विरोध हुआ. आलोचकों का कहना था कि देश की खराब अर्थव्यवस्था के बावजूद खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों का खर्च अपराध जैसा है. हालांकि ओलिंपिक हुआ.
  • 2014 फीफा वर्ल्ड कप का ब्राजील में काफी विरोध हुआ था. लेकिन आयोजन टाला नहीं गया.
  • 1972 के म्यूनिख ओलिंपिक को इसराइली एथलीटों की हत्या के बाद टाला नहीं गया.
  • 1996 के अटलांटा ओलिंपिक को सेटेंनियल ओलिंपिक पार्क में हुए विस्फोट के बाद रोका गया था.

हो सकता है कि आप कहें कि मानवनिर्मित समस्याओं और प्राकृतिक आपदा की तुलना नहीं की जा सकती. लेकिन क्या हम जिस सूखे की बात कर रहे हैं वो मानवनिर्मित नहीं है?

केवल आईपीएल ही क्यों?


क्या महाराष्ट्र में फुटबॉल या दूसरे खेल होने बंद हो गए हैं?

आईपीएल में पैसे के नंगे प्रदर्शन से कुछ लोगों में जो आक्रोश है उसे समझा जा सकता है. लेकिन आईपीएल को महाराष्ट्र से बाहर कर देने से सूखा पीड़ितों को कोई तात्कालिक राहत मिलेगी.

ऐसा नहीं है कि सूखा केवल महाराष्ट्र में है. गुजरात, तेलंगाना या झारखंड में भी क्या ऐसा ही कदम उठाया जाएगा?

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किसी खेल को रोकना, चाहे वो आईपीएल जैसा अप्रिय खेल ही क्यों न हो समाधान नहीं हो सकता. सहानुभूति जताने से किसी समस्या का हल नहीं हो सकता.

अगर आप सचमुच सूखा प्रभावितों की मदद करना चाहते हैं तो आईपीएल वालों से सूखा और दूसरी त्रासदियों के लिए एक फंड बनाने की मांग कीजिए. ये आसान काम नहीं है कि क्योंकि हमारे अरबपति पैसा देने के मामले में उदार नहीं है. उनके लिए वाजिब टैक्स देना भी पहाड़ होता है!

लेकिन ये बात तय है कि  शांत पड़े क्रिकेट स्टेडियमों से न तो कुएं खोदे जाते हैं न ही नहरे तैयार होती हैं. शांति से काम करने से जरूर कुछ हो सकता है.

First published: 13 April 2016, 16:17 IST
 
जयदीप घोष @jd0893

The author has been a sports journalist for over 20 years. He has worked with leading newspapers like The Statesman, Hindustan Times and The Tribune, as well as portals like espnstar.com

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