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सिर्फ 40 सेकंड ने बदली साक्षी और देश की किस्मत

कुलदीप पंवार | Updated on: 19 August 2016, 13:35 IST

रियो ओलंपिक में देश के लिए पदकों का सूखा खत्म करने वाली साक्षी मलिक को अपनी पूरी जिंदगी में 40 सेकंड का वो खेल हमेशा याद रहेगा, जिसकी बदौलत हारती दिखाई दे रही इस महिला पहलवान ने इतिहास रच दिया. एक के बाद एक लगातार 8 घंटे में 5 मुकाबले खेलकर थकान से चूर दिखाई दे रही साक्षी मलिक ने अंकों में 0-5 से पिछडऩे के बाद अंतिम 40 सेकंड में हार तय मानकर दिखाए आक्रामक खेल की बदौलत वो करिश्माई वापसी की, जिससे उसने एशियाई चैंपियन किर्गिस्तान की एसुलू तिनिबेकोवा को 8-5 से हराकर कांस्य पदक पर अपना और अपने देश का नाम दर्ज करा लिया.

लगातार चार मुकाबले खेलने का था असर

साक्षी मलिक को क्वार्टर फाइनल में रूसी पहलवान वैलिरिया कोब्लोवा झोलोबोवा से क्वार्टर फाइनल में 2-9 से हार मिलने पर निराशा का सामना करना पड़ा था, लेकिन वैलिरिया के फाइनल में पहुंच जाने पर उन्हें कांस्य पदक के लिए रेपचेज राउंड में उतरने का मौका मिला.

इसमें साक्षी ने मंगोलिया की पूर्वादरोज ऑरखोन को 3-1 से हराते हुए कांस्य पदक के फाइनल मुकाबले में तिनिबेकोवा से भिडऩे का टिकट हासिल किया.

फाइनल मैच में पहले ही मिनट से साक्षी के ऊपर क्वालिफिकेशन राउंड, एलिमिनेशन राउंड, क्वार्टर फाइनल और रेपचेज राउंड सहित कुल चार मुकाबलों में अपनी ताकत खर्च करने की थकान साफ दिखाई दे रही थी. इसका परिणाम पहले राउंड में साक्षी के बिना मुकाबला किये विपक्षी पहलवान को 5 अंक जुटा लेने की मोहलत देने से भी दिखाई दिया.

दूसरे राउंड में भी शुरुआत में किया निराश

6 मिनट के दूसरे राउंड की शुरुआत में भी साक्षी ने हालांकि तिनिबेकोवा को कोई अंक नहीं लेने दिया, लेकिन तकनीकी रूप से वह इस राउंड में भी जद्दोजहद ही करती दिखाई दीं. 5 मिनट 20 सेकंड तक राउंड में तिनिबेकोवा पूरी तरह हावी थीं और उनका कांस्य पदक जीतना तय लग रहा था.

यहां से साक्षी ने तिनिबेकोवा को गलती के लिए मजबूर कर 2 अंक जुटाए और खेल की कहानी बदल गई. इन 2 अंक से मिले जोश के बाद साक्षी ने आक्रामक खेल को अपना हथियार बनाया. इससे पहले सिर्फ बचाव करती दिखाई दे रही साक्षी तिनिबेकोवा पर झपटती दिखाई दी. अचानक हुए इस बदलाव से हड़बड़ायी तिनिबेकोवा ने बचाव के प्रयास में साक्षी को आसान अंक जुटाने का मौका दे दिया और आगे की कहानी भारत के लिए एेतिहासिक कांस्य पदक के रूप में बदल गई.

साक्षी के पिता डीटीसी में हैं कंडक्टर

साक्षी के पिता सुखबीर मलिक डीटीसी दिल्ली में कंडक्टर की नौकरी करते हैं, जबकि मां सुदेश मलिक रोहतक में आंगनबाड़ी सुपरवाइजर हैं. ओलंपिक की तैयारी के लिए वे पिछले एक साल से साई(स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) होस्टल में रह रही थीं. साक्षी मलिक रोजाना 6 से 7 घंटे प्रैक्टिस करती हैं. साक्षी ने 12 साल की उम्र से ही पहलवानी शुरू कर दी थी.

साक्षी ने वैश्य स्कूल से बारहवीं तक की पढ़ाई की, इसके बाद महारानी किशोरी जाट कन्या महाविद्यालय से ग्रेजुएशन किया. फिलहाल वह महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में एमए की छात्रा हैं.

First published: 19 August 2016, 13:35 IST
 
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