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रियो मेडलिस्ट साक्षी मलिक के 'सुल्तान' बने सत्यव्रत कादियान

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 October 2016, 10:08 IST

रियो ओलंपिक में देश का नाम रोशन करने वाली पहलवान साक्षी मलिक को उनके दिल का सुल्तान मिल गया है. साक्षी ने रविवार को अपने पहलवान ब्वायफ्रेंड सत्यव्रत संगवान के साथ हरियाणा के रोहतक में सगाई कर ली.        

साक्षी मलिक ने हाल ही में रियो ओलंपिक के दौरान देश को सबसे पहले मेडल दिलाया था. साक्षी ने रियो ओलंपिक में 58 किलोग्राम फ्री स्टाइल भार वर्ग की कुश्ती स्पर्धा में भारत को कांस्य पदक दिलाया था.  

साक्षी से दो साल छोटे हैं सत्यव्रत

रविवार को रोहतक में साक्षी ने अपने पहलवान ब्वायफ्रेंड सत्यव्रत कादियान से सगाई की. 24 साल की महिला पहलवान साक्षी और सत्यव्रत के बीच उम्र में दो साल का फासला है. सत्यव्रत अभी 22 साल के हैं.

सत्यव्रत के पिता सत्यवान पहलवान भी अर्जुन पुरस्कार हासिल कर चुके हैं. उनका कहना है कि यह एक निजी कार्यक्रम था. केवल लड़के और लड़की के परिवार के सदस्यों ने सगाई समारोह में हिस्सा लिया. 

सत्यव्रत ने यूथ ओलंपिक में जीता था ब्रॉन्ज

साक्षी के मंगेतर सत्यव्रत कादियान अपने पिता के रोहतक स्थित अखाड़े में ट्रेनिंग करते हैं. 2010 यूथ ओलंपिक में वह कांस्य पदक भी हासिल कर चुके हैं.

कुछ अरसे पहले हरियाणा सरकार के एक करोड़ के दंगल में भी वह तीसरे स्थान पर रहे थे. दोनों के बीच कुश्ती टूर्नामेंट के दौरान नजदीकियां बढ़ीं. सत्यव्रत के बारे में साक्षी का कहना है कि वह बहुत सहयोग करता है और मेरे सपने को अपना सपना समझता है.

पढ़ें: रियो ओलंपिक: साक्षी मलिक ने दिलाया पहला पदक

सोशल मीडिया पर भी साक्षी को बधाई देने का सिलसिला जारी है. क्रिकेटर रवींद्र जडेजा ने ट्वीट किया, "रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक की उनके पहलवान ब्वायफ्रेंड सत्यव्रत कादियान से सगाई हो गई है. आपको बेहतरीन भविष्य के लिए शुभकामनाएं."

रियो में रचा था इतिहास

साक्षी मलिक ने रियो ओलंपिक में कांस्‍य पदक के लिए प्‍ले ऑफ मुकाबले में किर्गिस्‍तान की पहलवान एसुलू तिनिवेकोवा को 8-5 से हराया था. रियो ओलंपिक में यह भारत का पहला पदक था. इसके बाद पीवी सिंधू ने बैडमिंटन सिंगल्स में रजत पदक जीता था.

साक्षी ने लगभग हारे हुए मुकाबले को पलट दिया था. एक समय साक्षी 0-5 से पीछे थीं. लेकिन उनका हौसला बरकरार था. दूसरे राउंड में उन्होंने नए सिरे से शुरुआत की. आक्रामक साक्षी ने ऐसा दांव लगाया कि उन्हें चार अंक मिल गए. इसके बाद उन्होंने एक और अंक हासिल किया. अब दोनों पहलवान बराबरी पर आ गए.

उसके बाद तीसरे मिनट के अंतिम क्षण में एक और शानदार मूव के जरिए साक्षी ने दो अंक बनाए और मैच समाप्‍त होने पर 7-5 से जीत हासिल की. किर्गिस्‍तान के कोचिंग स्‍टाफ ने उस अंतिम मूव पर आपत्ति जताते हुए समीक्षा की अपील की. जजों ने रीप्‍ले देखने के बाद फैसला साक्षी के हक में दिया था.

नतीजतन साक्षी के पक्ष में अंतिम स्‍कोर 8-5 रहा. कुश्ती में यह भारत का पांचवां ओलंपिक पदक है. के.डी. जाधव ने 1952 में कांस्य पदक जीता था. वहीं बीजिंग ओलंपिक 2008 में सुशील कुमार ने भी कांस्य पदक जीता. इसके बाद लंदन ओलंपिक 2012 में सुशील कुमार ने रजत और योगेश्वर दत्त ने कांस्य पदक जीता था.

First published: 17 October 2016, 10:08 IST
 
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