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Operation Blue Star की बरसी: स्वर्ण मंदिर में लगे खालिस्तान ज़िंदाबाद के नारे

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 June 2017, 12:05 IST

सिखों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल स्वर्ण मंदिर में ख़ालिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए गए हैं. यह नारेबाज़ी ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार की 33वीं बरसी के मौक़े पर की गई. नारेबाज़ी किसने की, यह अभी तक साफ नहीं है. मगर यह बिल्कुल मुमकिन है कि प्रदर्शनकारी ख़ालिस्तानी आंदोलन के सूत्रधार जरनैल सिंह भिंडरावाले के विचारों के समर्थक हैं.

इस नारेबाज़ी का एक वीडियो फुटेज भी समाचार एजेंसी एएनआई ने जारी किया है. फुटेज से पता चलता है कि कई दर्जन प्रदर्शनकारी 'ख़ालिस्तान ज़िंदाबाद-ख़ालिस्तान ज़िंदाबाद' के नारे लगा रहे हैं. इनके हाथों में तलवारें हैं और भगवा झंडा भी लहरा रहे हैं. 

 

70 के दशक में खालिस्तान आंदोलन का आगाज

पंजाब में ख़ालिस्तानी आंदोलन की शुरुआत 70 के दशक में हुई थी. जून, 1978 में अकाल तख़्त साहिब ने सिखों के संत निरंकारी पंथ के ख़िलाफ़ पहली बार हुक़्मनामा जारी किया था. 

तक़रीबन 10 साल बाद मार्च 1981 में एक नए स्वायत्त राज्य की मांग उठी और खालिस्तान का झंडा पंजाब स्थित आनंदपुर साहिब पर फहराया गया. इस आंदोलन के अगुवा जरनैल सिंह भिंडरावाले अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए हिंसा का रास्ता अपनाने को सही मानते थे. 

अपने समर्थकों के साथ जरनैल सिंह भिंडरावाले/ सिख आर्काइव्स

ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद इंदिरा की हत्या

जून 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर कब्जा जमाए बैठे खालिस्तानी आतंकियों को हटाने के लिए सैन्य कार्रवाई को मंजूरी दी, जिसे ऑपरेशन ब्लू स्टार का नाम दिया गया. सेना ने इस दौरान जरनैल सिंह भिंडरावाले समेत कई खालिस्तानी आतंकियों को मार गिराने के बाद स्वर्ण मंदिर को खाली कराया था. हालांकि सैन्य ऑपरेशन में काफ़ी खून-खराबा भी हुआ.

माना जाता है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार में सैकड़ों बेगुनाह लोगों की भी जान चली गई. इसको लेकर सिखों की भावनाएं भी आहत हुईं. इसी साल 31 अक्टूबर को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी. इंदिरा की हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे और देश की राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ था.

First published: 6 June 2017, 11:46 IST
 
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