Home » राज्य » Are KCR's reservations for backward Muslims legally, politically correct?
 

तेलंगाना: पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण पर केंद्र का साथ मिलेगा?

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 April 2017, 10:14 IST


पिछले चुनावों में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने मुसलमानों से वादा किया था कि वे आरक्षण में उनका हिस्सा बढ़ाएंगे. अपना वादा पूरा करने के लिए उन्होंने रविवार को तेलंगाना विधानसभा में एक विधेयक पारित किया. उस पर केंद्र सरकार की मोहर लगनी बाकी है. यह बड़ा ही संवेदनशील मुद्दा है, जिसे राजनीतिक कटुता झेलनी पड़ रही है. पर ऐसा पहली बार नहीं हुआ है और ना ही इसके आखिरी होने की उम्मीद है.


तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने केवल सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े मुसलमानों के लिए ही आरक्षण नहीं बढ़ाया. उसने अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में भी वृद्धि की. आरक्षण में पिछड़ी और अनुसूचित जाति का हिस्सा बढ़ाने का भी वादा किया.
समिति ने मुसलमानों के आरक्षण का वर्गीकरण ‘धर्म के आधार पर’ नहीं किया. इस वजह से भाजपा सख्त नाराज है. विधेयक को नरेंद्र मोदी सरकार की मंजूरी आसानी से मिल सके, उसके लिए केसीआर ने उन्हें पिछड़ी जातियों में ‘ई’ के वैकल्पिक वर्ग में रखा. जाति-उपजाति के लोगों को उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के आधार पर पहले ही ए,बी,सी,डी वर्गों में बांटा हुआ है.


रविवार को तेलंगाना की विधानसभा के दोनों सदनों ने शैक्षिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में मुसलमानों का आरक्षण 4 से 12 फीसदी और अनुसूचित जनजाति का 6 से 10 फीसदी बढ़ाने के लिए विधेयक पारित किया. इससे अब आरक्षण का कुल प्रतिशत 62 है. राज्य और बढ़ाना चाहता है. केसीआर चाहते हैं कि समाज के विभिन्न वर्गों की स्थानीय सामाजिक-आर्थिक स्थिति के मद्देनजर आरक्षण के लिए केंद्र राज्य में अधिकारी नियुक्ति करे. जिस गर्व से टीआरसी सरकार ने अपना वादा पूरा करने की घोषणा की है, उसे एक तरह से राजनीतिक चाल कह सकते हैं. भाजपा प्रमुख अमित शाह ने तेलंगाना को लेकर जो सपने देखे थे, वे सब टूट गए.

 

पीएम ने यही कहा था


रविवार को भुवनेश्वर में भाजपा के राष्ट्रीय सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा था, ‘मुसलमान समुदाय पिछड़ा हुआ है. हमें उन तक पहुंच बनानी चाहिए. कल्याण के ये उपाय उन लोगों के लिए हैं, जिन्हें सरकारी नीतियों का लाभ नहीं मिल रहा है.’
दिलचस्प है कि भुवनेश्वर में मोदी ने यह बात ठीक उस समय कही जब भाजपा के सदस्य मुसलमानों के आरक्षण को लेकर विपक्ष का विरोध कर रहे थे. इस विरोध में वे अकेले पड़ गए. उन्होंने विधानसभा में हल्ला मचाया, लिहाजा उन्हें निलंबित कर दिया गया.


राज्य में आईटी मंत्री और मुख्यमंत्री केसीआर के बेटे केटी रामा राव ने प्रधानमंत्री के उक्त कथन का लिखित अंश मुख्यमंत्री को दिया. उस समय सीएम विधान परिषद में विधेयक पर बोल रहे थे. केसीआर ने विधान परिषद में पीएम के कथन का इस्तेमाल भाजपा सदस्य एन रामचंद्र राव के विरोध में किया. उन्होंने कहा, ‘जब प्रधानमंत्री खुद मुसलमानों से संपर्क करने के लिए कह रहे हैं, तो आपको विधेयक का समर्थन करना चाहिए. यह संयोग की बात है कि प्रधानमंत्री का कथन उस समय आया जब ऐेतिहासिक विधेयक पर बहस चल रही थी.’ उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि अधिनियम बनने की प्रक्रिया में जो बाधाएं आ रही थीं, प्रधानमंत्री के कथन से दूर हो गईं.

 

कमजोर विरोध


कांग्रेस इस कदम का मजबूती से विरोध नहीं कर सकी. वामपंथी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहद उल मुसलीमीन ने सरकार का समर्थन किया. एमआईएम के विधायक और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने समर्थन किया. ओवैसी ने यह भी कहा कि राज्य के इस कदम से मुसलमानों के मौजूदा 4 फीसदी आरक्षण का नुकसान नहीं होना चाहिए. केसीआर ने कहा कि विधेयक का मकसद कमजोर वर्गों और अल्पसंख्यकों में हाशिए पर पड़े लोगों का ‘सबके साथ विकास’ करना है. तेलंगाना के अलग राज्य बनने के बाद उनके इस दावे से लगता है कि वे राज्य में अपनी स्थिति को और दुरुस्त करने में लगे हुए हैं.


मुख्यमंत्री ने कहा कि अविभाजित आंध्रप्रदेश में मुसलमानों की जनसंख्या 9.53 फीसदी थी, जो अलग हुए तेलंगाना में 12.68 फीसदी हो गई. तेलंगाना बनने के बाद मुसलमान जनसंख्या 44.64 लाख हो गई. इसी तरह विभाजन के बाद अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 9.08 फीसदी हो गई, जो पहले 7.11 फीसदी थी.


राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी जी सुधीर और एस चेलप्पा की अध्यक्षता में दो समितियां बनाईं. उन्हें आरक्षण में इजाफे सहित सभी बातों का अध्ययन और आवश्यक कदम उठाने की सिफारिश करने की जिम्मेदारी दी गई ताकि पिछड़े समुदायों को अपने सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने में मदद मिल सके.


समितियों ने आरक्षण में वृद्धि की सिफारिश की, यह सुझाव देते हुए कि मुसलमानों में पिछड़े वर्गों को बीसी-ई वर्ग में माना जाए. यह भी कहा कि अनुसूचित जनजाति का आरक्षण 10 फीसदी बढ़ाया जाए. केसीआर ने कहा कि सरकार अनुसूजित जाति के कोटे को बढ़ाने पर काम करेगी. सरकार ने पिछड़ी जातियों की स्थितियों का 6 महीने में अध्ययन और सिफारिश करने के लिए खासतौर से बीसी समिति बनाई थी.

 

क्या यह वैध है?


राज्य सरकार के इस विधेयक के व्यापक राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं. इंदिरा शाहनी और अन्य बनाम भारतीय संघ के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में धर्म आधारित आरक्षण पर रोक लगाई थी. उसने अधिकतम आरक्षण 50 फीसदी रखा था. हालांकि केसीआर ने कहा कि उसी फैसले ने ‘व्यावहारिक और त्रुटिहीन’ आंकड़े पाए जाने की स्थिति में आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने की अनुमति दी थी.

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि सरकार ने सारी बातों का ध्यान रखा है ताकि आरक्षण में वृद्धि किसी कानूनी झमेले में नहीं फंसे. केसीआर ने तमिलनाडु का उदाहरण दिया. वहां आरक्षण 69 फीसदी कर दिया गया था. उसे संविधान के नवें शेड्यूल में भी शामिल किया गया था. तमिलनाडु के अलावा उन्होंने महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात और उत्तरपूर्वी राज्यों की भी मिसाल दी.

 

केंद्र को धमकी?


केसीआर ने कहा कि यदि हमें केंद्र का साथ नहीं मिला और विधेयक को संविधान के नवें शेड्यूल में शामिल नहीं किया गया, तो तेलंगाना सर्वोच्च न्यायालय जाएगा. ‘हम केंद्र से भीख नहीं मांगेंगे, नई आरक्षण नीति को नवें शेड्यूल में शामिल करवाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.’

केसीआर ने चंद सवाल किए, मानो वे भाजपा पर निशाना साध रहे हों. उन्होंने पूछा: ‘हम उन्हें आरक्षण क्यों नहीं दे सकते? वे मुसलमान हैं, केवल इसलिए उन्हें आरक्षण से क्यों इनकार किया जाना चाहिए? क्या वे इस देश के हिस्सा नहीं हैं?’ केसीआर ने मुस्लिम वोटबैंक बनाने का एक भी मौका नहीं छोड़ा. उन्होंने यह तक कह दिया कि भारत में मुसलमानों की जनसंख्या विश्व में सबसे ज्यादा है (जबकि इंडोनेशिया के बाद भारत का दूसरा स्थान है. )


उन्होंने कहा, ‘मैं नहीं सोचता कि यह सब रातोंरात हो जाएगा. मुसलमानों और अनसूचित जनजाति के आरक्षण में वृद्धि के लिए हमें एक निश्चित प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा. विधेयक को केंद्रीय गृह एवं कानून मंत्रालय से गुजरना है. केंद्र सरकार को इस संबंध में पूरी जांच करनी है.’


तेलंगाना कांग्रेस समिति के मौजूदा अध्यक्ष और वरिष्ठ विधायक मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि भाजपा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के आदर्शों पर चलती है. इसलिए शायद विधेयक को संविधान के नवें शेड्यूल में शामिल नहीं होने दे. तेलंगाना सरकार आरक्षण में वृद्धि के अपने वादे पर खरी उतर सकेगी, इसमें उन्हें संदेह है.

 

First published: 20 April 2017, 10:14 IST
 
अगली कहानी