Home » राज्य » ‘Bangla’ too similar to Bangladesh: MEA strikes down Bengal’s name change proposal
 

पश्चिम बंगाल का नाम बदलने का प्रस्ताव विदेश मंत्रालय ने ठुकराया

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 31 March 2017, 8:46 IST


पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य का नाम पश्चिम बंगाल से ‘बांग्ला’ रखने का प्रस्ताव रखा था. पर गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय दोनों ने उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया. उनका तर्क है कि यह नाम पड़ोसी देश बांग्लादेश से काफी मिलता है. इससे उसके होने का कूटनीतिक भ्रम होता है. पर ममता बनर्जी की सरकार इस रोड़े के बावजूद नाम बदलने के प्रस्ताव पर अड़ी हैं. राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय दोनों को अलग-अलग चिट्ठी लिखेंगे कि वे इस पर पुनर्विचार करें.’


गृह राज्य मंत्री के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ‘बांग्ला’ के अलावा ‘बंग’ एक अन्य विकल्प है, जिस पर विचार किया जा सकता है. उनके मुताबिक इस नाम से बांग्लादेश की कोई भ्रांति नहीं होगी क्योंकि राज्य का अंग्रेजी में नाम बंगाल हो जाएगा. अगस्त 2016 में पश्चिम बंगाल विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया था कि राज्य का नाम बंगाली में ‘बांग्ला’, अंग्रेजी में ‘Bengal’ और हिंदी में ‘बंगाल’ किया जाएगा. तब उस प्रस्ताव को केंद्र के पास समर्थन के लिए भेजा गया था.

 

राजनीतिक द्वेष?


अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का एक गुट महसूस करता है कि केंद्र ने राजनीतिक द्वेष के चलते उसका प्रस्ताव ठुकराया है. पर राज्य भाजपा का दावा है कि केंद्र कूटनीतिक भ्रांतियों को नजरअंदाज नहीं कर सकता. प्रस्तावित नाम पर पुनर्विचार किया गया, तो भी यह समस्या रहेगी. राज्य के संसदीय मामलों के मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा, ‘हमें लगता है कि केंद्र ने राजनीतिक द्वेष से हमारा प्रस्ताव ठुकराया है और हम केंद्र से हमारी मांगों पर फिर से विचार करने की अपील करेंगे. ’


राज्य में भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, ‘जब नाम बदलने का प्रस्ताव पश्चिम बंगाल की विधानसभा में पारित हुआ था तभी हमने इसका विरोध किया था. हमारा मानना है कि इस परिवर्तन की कोई वजह नहीं है. सीपीआई (एम) नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा, ‘जब हमने इसका पहले विरोध किया था, सीएम ने उसे ‘ऐतिहासिक भूल’ बताया था. हम देखना चाहते हैं कि केंद्र अपनी बात पर कायम रहता है या नहीं.’


पहले जब पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्ताव पारित हुआ था, तभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र के रवैये का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि जब भी उन्हें सभी राज्यों की बैठकों में बुलाया जाता है, पश्चिम बंगाल का नाम वर्णानुक्रम की सूची में सबसे नीचे है और तब तक अधिकारियों के पास राज्य की तकलीफें सुनने की ऊर्जा नहीं रहती. 2011 में भी, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद बनर्जी ने यूपीए सरकार को पश्चिम बंगाल का नाम पश्चिम बंग करने का आग्रह किया था, पर उसे भी स्वीकार नहीं किया गया.

First published: 31 March 2017, 8:46 IST
 
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