Home » राज्य » Hardcore Maoist Kamalesh Mahato surrendered in West Bengal
 

किशनजी के करीबी जंगलमहल के कुख्यात माओवादी कमलेश महतो का सरेंडर

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 November 2016, 11:38 IST
(फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल में शीर्ष माओवादी नेता किशनजी के करीबी और कुख्यात माओवादी कमलेश महतो ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. कमलेश ने पश्चिमी मिदनापुर जिले के झारग्राम पुलिस स्टेशन में सरेंडर कर दिया.

नक्सलियों के खिलाफ अभियान में इसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. कमलेश महतो नक्सलियों के किशोर संघ का स्टेट कमांडर भी था. झारग्राम पुलिस थाने में महतो ने एके-47 और नौ एमएम की दो पिस्टल के साथ आत्मसमर्पण कर दिया.

जंगलमहल के इलाके में कमलेश महतो काफी अरसे से सक्रिय था. पुलिस के मुताबिक कमलेश महतो माओवादियों के बनाए गए संगठन छात्रवाहिनी किशोर संघ से जुड़ा हुआ था. 2008 से 2011 के दौरान यह संगठन खासा सक्रिय था.

किशनजी की मौत के बाद से था अंडरग्राउंड

नवंबर 2011 में शीर्ष माओवादी नेता और कमांडर कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी की मुठभेड़ में मौत के बाद से कमलेश महतो अंडरग्राउंड हो गया था. ऐसे में पांच साल के बाद उसके आत्मसमर्पण को बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है.

माओवादियों के किशोर संघ का मुख्य मकसद बिल्कुल नई उम्र के लड़कों को माओवाद की ओर आकृष्ट करना था. कमलेश महतो के खिलाफ जंगल महल के विभिन्न थानों में छह आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं.

इन मामलो में राष्ट्रदोह और लूटपाट भी शामिल है. इनमें से झारग्राम के कापगाड़ी में एनसीसी कैडेटों से राइफल लूट जैसी चर्चित घटना भी शामिल है. कमलेश के आत्समर्पण से जंगल महल में माओवादियों की बची-खुची ताकत भी कमजोर पड़ने की संभावना जताई जा रही है.

झारग्राम के एसडीपीओ विवेक वर्मा ने कमलेश के आत्मसमर्पण की पुष्टि करते हुए कहा कि उसने मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा जाहिर की है. जंगलमहल के कुख्यात माओवादी के हथियार डालने के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस अब 50 और माओवादियों की तलाश में जुटी है. कमलेश महतो ने ही इन सभी माओवादियों को ट्रेनिंग दी थी.

First published: 1 November 2016, 11:38 IST
 
अगली कहानी