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भंगोर कांड: ममता पर उन्हीं का नुस्खा आज़मा रही सीपीएम

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 25 January 2017, 8:36 IST
(कैच न्यूज़)

ममता बनर्जी से सत्ता छीनने के लिए सीपीएम भंगोर के ग्रामीणों का आक्रोश भुनाने की कोशिश कर रही है. पिछले दिनों पुलिस की गोलीबारी में वहां दो किसान मोफिजुल खान और आलम मुल्लाह मारे गए थे. इससे वहां के ग्रामीण बेहद गुस्से में हैं. किसान दक्षिण 24 परगना जिले के कमारेत गांव में किसान पिछले हफ्ते पावर स्टेशन लगाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. वहीं पुलिस का दावा है कि उसने विरोधियों पर गोलियां नहीं चलाई हैं. 

सीपीएम इस महीने के अंत में कोलकाता में विरोध प्रदर्शन करेगी. ताकि ‘दो किसानों के मारे जाने के लिए जवाबदेह लोगों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया जा सके.’ पार्टी के वरिष्ठ नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा, ‘हम अपने विरोध को आगे ले जाएंगे. हम इस सिलसिले में मुख्यमंत्री से मिलने वाले हैं.’

एक अन्य नेता ने कहा कि पार्टी, किसान की मौत पर ममता की ‘चुप्पी’ और ‘उस जगह नहीं जाने’ के कारण उन्हें घेरने का सोच रही है. उन्होंने सवाल किया, ‘भंगोर की इस घटना पर मुख्यमंत्री मौन क्यों हैं? और अब तक सीआईडी जांच की पहल क्यों नहीं की गई?’ नेता ने आरोप लगाया कि सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस के कुछ लोग कमारेत में हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं, और इसलिए सरकार ने सीआईडी जांच के आदेश नहीं दिए हैं.

मुआवज़े का मरहम

सीपीएम नेता ने जोर दिया कि ममता का मृत किसानों के परिवारों को दो-दो लाख रुपए देने और पावर स्टेशन स्थगित करने का वादा उत्तेजित ग्रामीणों को शांत नहीं कर सकेगा.

लगता है, वामपंथी दल ममता के ही नुस्खे का इस्तेमाल करके उनकी नाराजगी को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं. वह तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ही थीं, जिन्होंने पहले वामपंथी सरकार के विरुद्ध सिंगूर और नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण को लेकर अशांति का लाभ उठाया था. इससे उन्हें सत्ता में आने में मदद मिली थी. 

अब सीपीएम किसानों पर भूमि अधिग्रहण की ममता की ही रणनीति अपनाकर, उसे ममता के ही विरुद्ध इस्तेमाल कर रही है

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अब सीपीएम भी किसानों पर जबरदस्ती भूमि अधिग्रहण की ममता की ही रणनीति अपनाकर, उसे ममता के ही विरुद्ध इस्तेमाल कर रही है. ममता उनके मारे जाने के एक हफ्ते बाद भी भंगोर नहीं गई हैं. इससे वे विपक्ष की गिरफ्त में आ गई हैं.

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अमियो मुखर्जी ने कहा, ‘इस मामले में भूमि अधिग्रहण शामिल है, सीपीएम अब ममता बनर्जी पर उन्हीं का दांव खेल रही है. मार्क्सवादी उन्हीं के विरोध से लाभ उठाएंगे, पर शायद उन्हें अपने पक्ष में करना मुश्किल होगा, क्योंकि लोग अब भी ममता के पक्ष में लगते हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में.’

दो दिन पहले कम से कम 135 सीपीएम के वर्कर्स को ग्लोबल बिजनेस समिट का विरोध करने के लिए हिरासत में लिया गया था. ममता सरकार ने इस सम्मेलन का कोलकाता में काफी धूमधाम से आयोजन किया था. हिरासत में लिए लोगों में सुजान चक्रवर्ती, मनब मुखर्जी, अनादि साहू और कांति गांगुली जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं. वे कमारेत में मारे गए लोगों के लिए उत्तरदायी लोगों को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे. 

जब सीपीएम की विरोध की योजना के बारे में पूछा, तो राज्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा, ‘बंगाल के लोगों ने सीपीएम को ठुकरा दिया था. इसलिए अब वे समर्थन की आस में विरोध कर रहे हैं.’ जब पूछा, उनकी सरकार ने जांच का आदेश क्यों नहीं दिया? वे कहते हैं, ‘मुलजिमों को सजा दी जाएगी.’

First published: 25 January 2017, 8:36 IST
 
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