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भाजपा: यूपी में किसानों को ऋण माफी का वादा महाराष्ट्र में बना गले की हड्डी

अश्विन अघोर | Updated on: 16 March 2017, 8:08 IST

उत्तर प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर के हाल के विधानसभा चुनावों में अपनी जीत से भाजपा बेहद उत्साहित है. पर जिस आधार पर उसे जश्न का मौका मिला है, उसने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. यूपी में कैंपेन के दौरान भाजपा ने लोगों को आश्वासन दिया था कि यदि वे उसे जिताएंगे, तो वे किसानों के ऋण माफ कर देंगे.

लोगों ने पार्टी को इस बार जितने वोट दिए, पहले कभी नहीं दिए. देखना यह है कि वह अपने वादों पर खरी उतरती है या नहीं. किसानों की ऋण-माफी के मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र में भी काफी हलचल मची हुई है.

मुस्तैद कांग्रेस

कांग्रेस ने ही सबसे पहले राज्य सरकार से मांग की कि महाराष्ट्र के किसानों का भी ऋण माफ किया जाए. शिव सेना भाजपा के पुराने गठबंधन से हाल के एमसीजीएम के चुनावों में अलग हो गई थी. उसने उस मुद्दे को थोडा़ देर से उठाया. उससे पहले पिछले हफ्ते राज्य विधानसभा के बजट सत्र के तुरंत बाद कांग्रेस और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को उठाया था.

सेना ने हाल के चुनावों में भाजपा की खूब आलोचना की और भाजपा नेताओं के घोर विरोध में रही, खासकर सीएम देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के. पर इस स्थिति का फायदा नहीं उठा सकी.

शिव सेना ने भी बढ़ाए कदम

पर शिव सेना इस मुद्दे से ज्यादा समय दूर नहीं रही. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने अपने काडर को तुरंत आदेश दिए कि जब तक सरकार किसानों के लिए ऋण-माफी की घोषणा नहीं कर देती, सदन की कार्यवाही नहीं चलने दें. ऐसा कम ही हुआ है कि सदन में सत्तासीन पार्टी ने विरोध किया हो और विपक्ष के साथ विधानसभा की कार्यवाही में बाधा डाली हो. 15 मार्च को जब सत्र फिर शुरू होगा, शिवसेना विधायक और मंत्री फिर से इस मुद्दे को उठाएंगे.

राज्य पर्यावरण मंत्री रामदास कदम ने कहा, ‘अब हमें आदेश मिल गए हैं, हम उसे पूरी तरह मानेंगे. यह शिवसेना की परंपरा रही है. जब तक ऋण माफी की घोषणा नहीं की जाती, हम दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं चलने देंगे.’

शिव सेना के वरिष्ठ नेता और उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने कहा कि राज्य सरकार ने भी दालें, गेहूं, ज्वार जैसी विभिन्न फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य घटा दिया है. ‘हम स्वामीनाथन की सिफारिशें लागू करने के लिए भी सरकार पर दबाव डालेंगे.’

दिलचस्प है कि फडणवीस इस मुद्दे पर मुश्किल में आ गए हैं क्योंकि भाजपा विधायक भी पिछले हफ्ते सदन में कृषि ऋण माफी के मुद्दे में शामिल हो गए हैं.

अन्य मत

फडणवीस ने किसानों को पूरा ऋण माफ किए जाने का सख्त विरोध किया है. उन्होंने कहा, इससे किसानों को मदद नहीं मिलेगी. ‘इससे केवल सहकारी ऋण समिति और सहकारी बैंकों को लाभ होगा, जो किसानों के कृषि ऋण का विस्तार करते हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘पहले भी ऋण माफ किए गए हैं, पर उससे किसानों की आत्महत्याओं में कोई कमी नहीं आई. यूपीए सरकार ने भी विदर्भ में किसानों के ऋण माफ किए, पर आत्महत्याएं नहीं रुकीं. हम किसानों को महज कर्ज-मुक्त नहीं करना चाहते, बल्कि कृषि की आधारभूत संरचना को सुधारकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना चाहते हैं.’

वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा, ‘इस फैसले से राजकोष पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा क्योंकि कृषि ऋण की राशि 35 हजार करोड़ रुपए हैं. इससे राज्य का बहुत ज्यादा भार बढ़ेगा.’

असंभव मांग

इस मुद्दे को भुनाने और श्रेय पाने की राजनेताओं में होड़ लगी हुई है, पर विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के लिए इस मांग को पूरा करना असंभव है.

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ नौकरशाह ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, ‘इस मांग से राजकोष खाली हो जाएंगे. कोई भी समझदार सीएम कृषि ऋण माफ नहीं कर सकता, जो 35 हजार करोड़ रुपए हैं. यह राज्य को बहुत जल्द कमजोर बना देगा. राजनेताओं ने उसे प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया है इसलिए मांग पर इतना जोर दे रहे हैं.’

कृषि ऋण माफ करने की राज्य सरकार की तकनीक और आर्थिक विवशता के बावजूद फडणवीस के लिए हालात को संभालना काफी चुनौतीपूर्ण रहेगा.

एनसीपी विधायक जयंत पाटिल ने कहा, ‘भाजपा ने उत्तर प्रदेश के किसानों को कृषि ऋण माफ करने का आश्वासन दिया था. इसलिए हम महाराष्ट्र के किसानों के लिए भी यही मांग कर रहे हैं. अब यह सरकार की जिम्मेदारी है. इसे सरकार को ही संभालना है.’

First published: 16 March 2017, 8:08 IST
 
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