Home » राज्य » Bombay High Court Justice Kathawala hears cases till 3.30 am morning
 

हाईकोर्ट के जज ने 16 घंटे में निपटाए 135 मामले, सिर्फ 20 मिनट का ब्रेक लेकर रचा इतिहास

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 May 2018, 11:03 IST

बॉम्बे हाईकोर्ट के जज जस्टिस शाहरुख जे कथावाला कुछ ऐसा कर गए जो, बॉम्बे हाईकोर्ट के 156 साल के इतिहास इससे पहले किसी जज ने नहीं किया था. हुआ कुछ यूं कि जस्टिस जे कथावाला शुक्रवार सुबह से शनिवार सुबह तक लगातार 16 घंटे कोर्टरूम में सुनवाई करते रहे. गौरतलब है कि गर्मी की छुटि्टयाें के चलते हाईकोर्ट 3 जून तक बंद रहेगा, और शुक्रवार को आखिरी वर्किंग डे था.

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ऐसे में जस्टिस कथावाला छुट्‌टी पर जाने से पहले अपने समक्ष लगे ज्यादा से ज्यादा केस निपटाना चाहते थे. इसलिए साथी जजों के जाने के 10 घंटे बाद तक वह कोर्ट में बैठे रहे. बॉम्बे हाईकोर्ट के 156 साल के इतिहास में पहला मौका है, जब तड़के 3:30 बजे तक कोर्ट खुला हो. यहां 30-40 साल से वकालत कर रहे लाेगों ने कहा कि उन्होंने इससे पहले ऐसा कुछ कभी देखा-सुना नहीं है.

आधी-आधी रात तक रुककर सुनवाई कर रहे थे

बता दें, जस्टिस कथावाला बॉम्बे हाईकोर्ट में अार्बिट्रेशन, इंटलेक्चुअल प्राॅपर्टी राइट्स और कॉमर्शियल मामलों की सुनवाई करते हैं. जस्टिस एसजे कथावाला के कोर्ट रूम नंबर 20 में पिछले एक हफ्ते से आधी-आधी रात तक काम चल रहा था, लेकिन हाईकोर्ट की छुट्‌टी से पहले पेंडेंसी कम करने के लिए शुक्रवार को सुबह सामान्य समय में शुरू हुआ उनका कोर्ट शनिवार अल सुबह 3:30 बजे तक चलता रहा.

उनके कोर्ट नंबर 20 में वकीलों और याचिकाकर्ताओं की भीड़ लगी रही. इस दौरान उन्होंने 135 से ज्यादा मामलों की सुनवाई की, जिसमें से 70 अनिवार्य मामले थे. दो हफ्ते पहले भी उन्होंने अपने चैंबर में आधी रात तक एक केस की सुनवाई की थी. आमतौर पर हाईकोर्ट में सुनवाई 11 बजे शुरू होती है, लेकिन जस्टिस कथावाला 10 बजे ही कोर्टरूम में पहुंच जाते हैं.

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सिर्फ 20 मिनट का ब्रेक
सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहे एडवोकेट हिरेन कमोद ने कहा, "काम के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण अनुसरणीय है. मैं सुबह साढ़े तीन बजे कोर्ट से निकलने वाले आखिरी तीन लोगों में से एक था. उन्होंने सिर्फ 20 मिनट का ब्रेक लिया. वह बिना थके कोर्ट में बैठे रहे और हर तर्क को बेहद ध्यान से सुनते रहे. यह सराहनीय है." आगे एडवोकेट हिरेन ने बताया, "कोर्ट वकीलों, कोर्ट कर्मचारियों और वादियों से भरा हुआ था.

मामले अर्जेंट बेसिस पर निबटाए जा रहे थे इसलिए किसी ने इसकी शिकायत नहीं की." बता दें कि जस्टिस कथावाला ने 2009 में हाईकोर्ट के एडिशनल जज के रूप में शपथ ली थी और जुलाई 2011 में वह कोर्ट में स्थायी जज के रूप में नियुक्त हुए. काम के प्रति उनकी निष्ठा की ज्यादातर लोग तारीफ करते हैं.

First published: 6 May 2018, 11:03 IST
 
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