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बलोचिस्तान पर बोलने गए तारेक फ़तह को कलकत्ता क्लब ने कहा 'आउट'

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 7 January 2017, 8:06 IST
(कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • कोलकाता की एनजीओ को कश्मीर और बलोचिस्तान पर सेमिनार करने की अनुमति नहीं दी गई.
  • कानून और व्यवस्था का हवाला देकर कलकत्ता क्लब ने यह सेमिनार रद्द कर दिया है.

कलकत्ता क्लब ने बलोचिस्तान और कश्मीरी शरणार्थियों पर सेमिनार से इनकार कर दिया है. यह सेमीनार स्वाधिकार बांगला फाउंडेशन एनजीओ करने वाली थी जिसे कलकत्ता क्लब के परिसर में होना था. पुलिस ने कहा है कि क्लब ने राज्य में कानून और व्यवस्था के मद्देनजर अनुमति देने से इनकार किया है. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विनीत गोयल ने कहा, ‘क्लब अनुमति के लिए तैयार था, पर बाद में उन्होंने कार्यक्रम को निरस्त कर दिया.’

अपरिहार्य परिस्थितियां

‘द सागा ऑफ बलोचिस्तान एंड कश्मीर-सफरिंग्स ऑफ पीपल ऑफ कश्मीर एंड बलोचिस्तान एंड व्हाट वर्ल्ड नीड्स टू नो’ टाइटल से होने वाले सेमिनार को शाम को तब रद्द किया गया, जब क्लब के अधिकारियों ने कार्यक्रम में से कश्मीर का नाम और उन दो वक्ताओं को नहीं बुलाने को कहा, जो बहुत ज्यादा पाकिस्तान विरोधी बयानों के लिए जाने जाते हैं. 

सेमिनार के आयोजक सेवानिवृत कर्नल दीप्तांशु चौधरी ने कहा कि उन्हें क्लब के अधिकारियों से सूचना मिली है कि उन्हें किन्हीं अपरिहार्य कारणों से कार्यक्रम निरस्त करना पड़ेगा. एक निजी सोशल क्लब होने के नाते वे संस्था में सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखना चाहते हैं.  

इस सेमिनार में तारेक़ फतह, सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल जेएम मुखर्जी, सेवानिवृत मेजर जनरल जीडी बख्शी, सुशील पंडित, आरिफ मोहम्मद खान और अभिजीत भट्टाचार्य वक्ता के तौर पर भाग लेने वाले थे.

चौधरी ने कहा कि क्लब अधिकारियों ने आयोजकों से यह भी कहा कि उन्होंने कोलकाता के पुलिस अधिकारियों से बात की थी और पुलिस ने उन्हें ऐसे इवेंट करने की अनुमति नहीं दी. उन्होंने आगे कहा कि वे ऐसे कार्यक्रम करते रहेंगे क्योंकि ये राष्ट्रीय हित में हैं. 

कैच ने कलकता क्लब के सीईओ रणजीत दत्त से संपर्क किया. उन्होंने इस मामले में कोई टिप्पणी देने से इनकार कर दिया. कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना करते हुए लेखक तारिक फतह ने ट्विट किया, ‘ममता सरकार ने इस्लामियों से डरकर तारेक फतह की बलोचिस्तान पर वार्ता को जबरन निरस्त कर दिया.’ 

हालांकि तारेक़ फ़तह की अपनी विश्वसनीयता संदिग्ध है. कहा जाता है कि उन्हें देश में इस्लामोफ़ोबिया फ़ैलाने के लिए लिया गया है. उनका खर्चा-पानी भी भगवा संस्थाएं उठाती हैं. 

First published: 7 January 2017, 8:06 IST
 
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