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पंजाब: नई परिवहन नीति से बादल परिवार का साम्राज्य ढह जाएगा

राजीव खन्ना | Updated on: 8 April 2017, 9:41 IST

 

पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली नवनिर्वाचित कांग्रेस सरकार ने कुछ ऐसे नीतिगत बदलाव किए हैं, जो बादल परिवार के परिवहन साम्राज्य को हिला कर रख देगा. राज्य सरकार पिछले दस सालों के अकाली दल राज के दौरान झूठे पुलिस केस दर्ज करवाने वाले लोगों की भी धरपकड़ में लगी है. अमरिंदर ने नई परिवहन नीति तैयार करने की ठानी है. माना जा रहा है कि यह नई नीति पंजाब की ट्रांसपोर्ट बसों पर बादल परिवार के एकाधिकार को तोड़ने के लिए काफी होगी.

पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके पुत्र व पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के प्रदेश की बड़ी प्राइवेट ट्रांसपोर्ट कम्पनियों में अच्छी खासी साझेदारी है. बादल परिवार की हिस्सेदारी वाली कम्पनियों की बसें हमेशा गलत कारणों से सुर्खियों में रहती हैं. पिछले दिनों सुखबीर सिंह बादल की साझेदारी वाली कम्पनी की एक बस ने एक किशोरी को कुचल दिया था. बस कंडक्टर, क्लीनर व एक और व्यक्ति ने कथित तौर पर किशोरी और उसकी मां के साथ दुराचार करके उन्हें बस से बाहर फेंक दिया था.

इस कम्पनी की बसें रैश ड्राइविंग, यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार और अविश्वसनीय संचालन के चलते कई बार दुर्घटनाओं में शामिल रही हैं. निजी बसों द्वारा सरकारी बसों के यात्रियों को हथियाना तो जैसे सामान्य सी बात है. जनता की शिकायत है कि ये बसें टोल टैक्स भी नहीं देतीं और इनका स्टाफ लोगों के साथ हाथापाई पर उतर आता है.

उम्मीद है अमरिंदर द्वारा परिवहन व्यवस्था में किए जाने वाले सुधारों की घोषणा के साथ ही इन सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा. नई परिवहन नीति का मसौदा घोषित करने में दो सप्ताह का समय लग सकता है. नई नीति में सार्वजनिक परिवहन तंत्र की खामियों को दूर करने और मौजूदा एकाधिकार की छाया से दूर करने का प्रयास किया जाएगा.

 

ज़रूरी क़दम


एक सरकारी अधिकारी ने बताया ‘‘नई परिवहन नीति लाने के पीछे सरकार का मकसद पूरी परिवहन व्यवस्था को दुरुस्त करना है. यह किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं लाई जा रही बल्कि इसलिए लाई जा रही है ताकि जनता को इसका फायदा मिल सके. अगर सरकार के इस कदम से किसी के हितों का नुकसान होता है तो सरकार को इसका दोष नहीं दिया जा सकता.’’

कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में परिवहन विभाग की एक समीक्षा बैठक हुई. बैठक में 22 जिलों के परिवहन कार्यालयों के पुनर्गठन का सुझाव दिया गया व परमिट आवंटन प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की जरूरत बताई गई. पटियाला, जालंधर, फिरोजपुर व भटिंडा के चार क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों को भी पुनर्गठित किया जाएगा ताकि वे निर्बाध रूप से कार्य कर सकें. एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया ‘‘मौजूदा परमिट और उनकी वैधता का परीक्षण करते हुए विभिन्न अंशधारकों से राज्यवार परामर्श ले कर निजी ऑपरेटरों के लिए अलग क्षेत्र तय किया जाएगा. इससे बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार मिलेगा.’’

उच्च न्यायलय के आदेशानुसार अगली नीति 15 मई तक तैयार कर ली जाएगी. इससे 750 प्राइवेट बस रूट परमिट, 24 किलोमीटर के मूल मार्ग से बाहर 1840 विस्तार और 6700 मिनी बस परमिट प्रभावित होंगे. अमरिंदर ने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे वाहनों के पंजीकरण, लाइसेंस जारी करने संबंधी कार्यों में पूर्ण व्यावसायिकता बरतें. साथ ही मोटर वाहन अधिरियों को एसडीएम के अधीन ला कर अधिक जवाबदेह बनाया गया है.

 

लाइसेंस प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विभाग को कहा है कि वे ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी ‘‘सारथी व पंजीकरण संबंधी योजना’’ के लिए आ रहे वेब आवेदनों पर कार्यवाही की गति बढ़ाएं. ये दोनों ही योजनाएं जल्द ही अस्तित्व में आएंगी.

प्रस्तावित नीति के तहत शुल्क व मार्गों के वाजिब बंटवारे को भी प्राथमिकता दी जाएगी ताकि प्रदेश का सार्वजनिक परिवहन तंत्र अधिक व्यवस्थित किया जा सके. इसी दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए परिवहन विभाग ने यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिहाज से अपनी बसें भी अपग्रेड करने का आदेश दिया है.

सरकार इस बात पर बारीकी से नजर रखे हुए है कि कहीं ये विभाग अपने हिस्से का ‘लाभदायक’’ समय और रूट परमिट दूसरे बस ऑपरेटरों को तो नहीं दे रहे. अब इस समस्या का समाधान करने के लिए निष्पक्ष एवं न्यायोचित परिवहन तंत्र विकसित किया जाएगा. सरकार पिछली सरकार द्वारा लागू किए गए विलासिता कर की पुनर्समीक्षा करेगी, जिसके तहत लग्जरी कोच ने साधारण बसों के मुकाबले ज्यादा कर दिया था. सूत्रों का कहना है कि बादल की हिस्सेदारी वाली कम्पनी की अधिकांश बसों को पड़ोसी राज्य राजस्थान में लीज पर दे दिया गया, जहां भाजपा की सरकार है.

वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने कहा है कि प्राइवेट ऑपरेटरों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए अच्छी बसों को शहरों की भीतरी सड़कों पर चलाया जाए. साथ ही उन्होंने अतिरिक्त सुरक्षा बरतने के लिए सीसीटीवी लगाने का भी सुझाव दिया. घोषणा पत्र में किए गए वादों के अनुसार, कांग्रेस सरकार प्रति वर्ष कम दरों पर बेरोजगारों को एक लाख टैक्सी, हल्के व्यावसायिक वाहन उपलब्ध करवाए जाएंगे.

 

‘‘अपनी गड्डी अपना रोजगार’’ योजना के तहत सरकार गारंटर की भूमिका निभाएगी और गाड़ी के लिए ऋण लेने हेतु कोई अमानत नहीं रखी जाएगी. बस ऋण लेने वाले को पांच साल में पुनर्भुगतान करना होगा. इस योजना के क्रियान्यन के लिए सरकार ओला, उबर जैसे ऑपरेटरों के साथ करार करेगी.

झूठे मामले


अमरिंदर ने दस साल के अकाली शासन काल में दर्ज हुए झूठे मामलों की जांच का बीड़ा उठाया है. इसके लिए उन्होंने पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मेहताब सिंह गिल की अध्यक्षता में एक जांच आयोग गठित किया है. दो सदस्यीय आयोग के एक और सदस्य हैं पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश बी.एस. मेहंदीरत्ता.

झूठे मामले दर्ज करने का मुद्दा पूरे चुनाव प्रचार के दौरान छाया रहा था. अमरिंदर को ऐसी कई शिकायतें मिली थीं कि अकाली अपने राजनीतिक विरोधियों को फंसाने के लिए झूठे मामले दर्ज करवाते हैं. इस बीच, शिअद का कहना है कि वह सत्ताधारी पार्टी की मनमानी नहीं चलने देगा. अगर अकाली कार्यकर्ताओं पर ज्यादती हुई तो उसका पूरा-पूरा विरोध किया जाएगा.

 

वरिष्ठ अकाली दल नेता महा सचिव महेशिंदर सिह ग्रेवाल और सचिव डॉ. दिलजीत सिंह चीमा ने पार्टी मुख्यालय पर बुधवार को इस संबंध में रणनीति तय करने के लिए एक मीटिंग भी बुलाई. चीमा ने कहा सरकार गठन के दो सप्ताह के भीतर ही कहीं अकाली कार्यकर्ताओं की हत्या हुई तो कहीं उन पर आपराधिक हमले किए गए.

शिअद नेताओं ने उपखंड स्तर पर वकीलों के एक पैनल पर चर्चा की, जो कि समय पर पीडि़त अकाली कार्यकर्ता को कानूनी सहायता उपलब्ध करवाएं. चुनाव नतीजों के पांच दिन बाद ही सुखबीर ने अमरिंदर से आग्रह किया था कि वे पुलिस विभाग को निर्देश दें कि किसी तरह का राजनीतिक वैमनस्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस पर मुख्यमंत्री का बयान आया था कि वे किसी तरह के राजनीतिक द्वेष को बढ़ावा नहीं देंगे.

First published: 8 April 2017, 9:41 IST
 
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