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बंगाल के चाय बाग़ान मज़दूर: कैश की कमी से राहत, पर कैशलेस नहीं हुए

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 31 December 2016, 8:10 IST
(एएफ़पी)

नोटबंदी के बाद से ही कैश की कमी से जूझ रहे बंगाल के चाय बागान मजदूर अब कुछ राहत महसूस कर रहे हैं. पर अब भी कई समस्याएं हैं. सबसे बड़ी समस्या ‘निरक्षरता के कारण’ बैंक खाते खुलवाने में आ रही है. केंद्र सरकार ने बैंकों को चाय बागान के सभी मजदूरों का खाता 5 दिसंबर तक खोलने का आदेश दिया है ताकि उनका मेहनताना सीधा खाते में ट्रांसफर किया जा सके. पर ज्यादातर मजदूर नकद भुगतान चाहते हैं. 

चाय बागान के जिन मजदूरों, मालिकों और यूनियन वालों से कैच की बात हुई, उन्होंने बताया कि मजदूरों को खातों की अहमियत समझाना मुश्किल हो रहा है. तराई और दुआर जैसे दूरस्थ इलाकों में बैंक सेवाएं अभी पहुंची नहीं हैं, इससे समस्या और जटिल हो रही है. यहां 70 फीसदी इलाके में 500 चाय बागान हैं.

दार्जिलिंग चाय एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस बगडिय़ा कहते हैं, ‘चाय बागान मजदूरों के फायदे के लिए हमने इन दूरस्थ इलाकों में बैंक की और शाखाएं खोलने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया है.’ 

खाते खुलवाने की कोशिश

दुआर में रामझोरा टी एस्टेट के नेशनल  यूनियन ऑफ प्लांटेशन वर्कर्स के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि उनकी यूनियन इस कोशिश में है कि चाय बागान के सभी मजदूर बैंक खाते खुलवाएं, पर ‘30 फीसदी मजदूर नकद भुगतान पर जोर दे रहे हैं.’ यूनियन ने चाय बागान के मालिक से बात की. ‘तय किया गया कि मेहनताने का कुछ हिस्सा नकद दिया जाएगा और कुछ हिस्सा चेक से, जो उनके बैंक खातों में जमा किए जाएंगे.’ 

दुआर में टाटा टी एस्टेट में काम करने वाले उत्तम लोहार ने कहा कि उन्होंने ‘चाय बागान के मजदूरों की समस्याओं के बारे में’ नॉर्थ बंगाल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के सचिव बरुण रॉय को लिखा है. लोहार ने आगे बताया कि सचिव ने आश्वासन दिया है कि प्रशासन उनकी समस्याओं पर ध्यान देगा. 

कोलकाता में राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘चाय बागान के मजदूरों की इस संबंध में जानकारी मुख्य सचिव को पहले ही दी जा चुकी है’, पर शीर्ष नौकरशाह की ओर से अभी प्रतिक्रिया आनी बाकी है.'

First published: 31 December 2016, 8:10 IST
 
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