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छत्तीसगढ़: अब ठेकेदार नहीं सरकार परोसेगी शराब

राजकुमार सोनी | Updated on: 18 February 2017, 9:05 IST
कैच न्यूज़

गुजरात और बिहार की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में समय-असमय शराबबंदी की मांग उठती रही है, लेकिन इसके उलट रमन सिंह सरकार ने अब खुद ही शराब बेचने का निर्णय ले लिया है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानों पर रोक लगा दी हैं.

सरकार का कहना है कि शराब ठेकेदारों ने ऐसी 400 से ज्यादा दुकानों को चलाने में असमर्थता जताई हैं, सो घाटे से बचने के लिए शराब बिक्री का फैसला लिया गया है. सरकार ने देसी और विदेशी शराब दुकानों से मिलने वाले राजस्व को सुरक्षित रखने के लिए कार्पोरेशन के गठन का फैसला भी किया है. सरकार के शराब बिक्री के फैसले पर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में तीखी प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है.

रामराज में दूध मिले तो...

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गांव-गांव में एक व दो रुपए में चावल बांटने की वजह से मुख्यमंत्री को चाऊर वाले बाबा कहा जाता है, लेकिन अब उन्हें दारू वाले बाबा की संज्ञा से नवाजा जा रहा है. सोशल मीडिया में छत्तीसगढ़ में परिवर्तन की बयार... अब दारू बेचेगी रमन सरकार, रामराज में खीर मिले तो कृष्णराज में घी... रमनराज में मंद मिले तो घोल-घोल के पी, धान के कटोरे को शराब का प्याला बनाने पर बधाई, सूखे गले को तर करने कुछ दिन तो गुजारिए छत्तीसगढ़ में जैसे व्यंग्यात्मक स्लोगन भी दिखाई दे रहे हैं.

शराब बिक्री के फैसले पर यह भी कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ की सरकार शाहरूख खान की फिल्म रईस से कुछ ज्यादा ही प्रभावित हो गई है. फिल्म में एक संवाद है- अम्मीजान कहती थी कोई धंधा छोटा नहीं होता और धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं होता.

भाजपा में उठे विरोध के स्वर

सरकार के इस फैसले के खिलाफ भाजपा में ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं. भाजपा के सांसद रमेश बैस का कहना है कि राज्य में शराबबंदी की बात लंबे समय से चल रही थीं, लेकिन समझ में नहीं आता कि सरकार ने शराब बेचने का फैसला क्यों ले लिया है? पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का आरोप है कि सरकार गली-मोहल्ले में दारू बेचकर छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों की सोचने-समझने और कार्य करने की क्षमता को पूरी तरह से खत्म करने की साजिश कर रही है.

भाजपा कार्यकर्ता बेचेंगे शराब

हालांकि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने शराब बिक्री के फैसले को कोचियाबंदी का नाम भी दिया है लेकिन प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल का कहना है कि कोचियाबंदी तो महज एक बहाना है. इसकी आड़ में सरकार भाजपा कार्यकर्ताओं को उपकृत करना चाहती है. अब भाजपा के कार्यकर्ता कोचिया बनकर काम करेंगे.

बघेल का आरोप है कि शराब बिक्री के जरिए सरकार भारी-भरकम चुनावी फंड जुटाने की तैयारी भी कर रही हैं. नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव का कहना है कि एक तरफ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में शराबबंदी के फैसले पर नीतिश कुमार की पीठ थपथपाते हैं, लेकिन दूसरी ओर उनकी अपनी ही पार्टी की सरकार शराब बिक्री के खेल में लग गई है.

First published: 18 February 2017, 9:05 IST
 
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