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'दाना मांझी' और भी हैं: एक घंटे तक बाप ने बेटी के शव को कंधे पर ढोया

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 January 2017, 16:57 IST

लगता है कि ओडिशा में स्वास्थ्य सेवाएं अब भी वेंटिलेटर पर हैं. काला हांडी के दाना मांझी के मामले को सामने आए अभी ज्यादा वक्त नहीं बीता है कि राज्य में सिस्टम की संवेदनहीनता का इससे मिलता-जुलता मामला सामने आया है. 

पिछले साल अगस्त में काला हांडी जिले के दाना मांझी को एंबुलेंस न होने की वजह से तकरीबन 10 किलोमीटर तक अपनी मृत पत्नी का शव कंधे पर लादकर चलना पड़ा था. पांच महीने बीत चुके हैं लेकिन ओडिशा की तस्वीर अब तक बदली नहीं नजर आ रही है.

ओडिशा के अंगुल जिले में गति धीबर के साथ हुई घटना ने एक बार फिर दाना मांझी की याद दिला दी है. धीबर अपनी पांच साल की बेटी का शव लेकर अस्पताल से बाहर निकले, लेकिन न तो मृत शरीर को ले जाने के लिए एंबुलेंस थी और न ही किसी ने एक किलोमीटर तक उनकी मदद करने की कोशिश की. एक घंटे तक वो बेटी का शव कंधे पर लादे पैदल चलते रहे.

महाप्रयाण योजना

ओडिशा में महाप्रयाण योजना के तहत मुफ्त शव वाहन सेवा गरीबों को मुहैया कराई जाती है, लेकिन ऐसे वाहन ज्यादातर जिला अस्पताल के बाहर मिलते हैं. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के बाहर ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है. 

यह सेवा इसलिए दी जाती है ताकि जो परिवार शव वाहन की सुविधा के खर्चे को उठाने में समर्थ नहीं हैं, वह भी अपने परिवार के सदस्य की अस्पताल में मौत होने पर सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार के लिए ले जा सकें. 

अंगुल जिले का मामला

धीबर जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर अपनी दिवंगत बेटी सुमी को कंधे पर लादे निकले, उन्होंने इस बारे में अफसरों को नहीं बताया. पल्लाहारा कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के पास सरकारी योजना के तहत शव वाहन नहीं है और वहां जिला अस्पताल से ही शव वाहन मंगाया जाता है. 

अपनी सफाई में जिले के अफसरों का कहना है कि अगर धीबर इंतज़ार कर लेते तो उन्हें शव वाहन जरूर मुहैया करवाया जाता. प्रशासन का कहना है कि आम तौर पर स्थानीय वाहनों से ही शव को ले जाया जाता है और उसका पैसा तुरंत ही आदिवासियों को रेड क्रॉस के जरिए दे दिया जाता है. 

दो कर्मचारियों पर गाज

मामला सामने आने के बाद अस्पताल के दो कर्मचारियों को लापरवाही के आरोप में हटा दिया गया है जिसमें एक जूनियर मैनेजर और सुरक्षा कर्मचारी है. सब डिविजनल मेडिकल अफसर से भी पूछा गया है कि क्यों न उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की जाए?

कलेक्टर अनिल कुमार समल का कहना है, "हमने ऐसी सुविधा दे रखी है ताकि मृतक के साथ सम्मानजनक तरीके से पेश आया जाए. जहां ऐसा नहीं हुआ है वहां कार्रवाई जरूर होगी." वजह जो भी हो अंगुल जिले की इस घटना ने ओडिशा सरकार के स्वास्थ्य विभाग को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है.

काला हांडी के दाना मांझी को अपनी पत्नी का शव कंधे पर लादकर 10 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा था.
First published: 7 January 2017, 16:57 IST
 
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