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धनबाद में धांय-धांय: सिंह मैंशन के मेंबर नीरज सिंह का सनसनीखेज मर्डर

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 March 2017, 11:34 IST
(ट्विटर)

कोयला नगरी धनबाद में पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की सनसनीखेज हत्या से हड़कंप मच गया है. हमले में एके-47 के इस्तेमाल हुआ है. चश्मदीदों के मुताबिक तकरीबन 50 राउंड फायरिंग करते हुए बदमाशों ने नीरज सिंह और उनके तीन सहयोगियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं. जिसमें नीरज सिंह के बॉडीगार्ड, ड्राइवर और साथी अशोक यादव ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि सेंट्रल अस्पताल में इलाज के दौरान नीरज सिंह की मौत हो गई. पुलिस हमलावरों की तलाश में छापेमारी कर रही है.

डॉक्टरों के मुताबिक नीरज सिंह को जब अस्पताल लाया गया, उस वक्त खून काफी बह चुका था और उनको बचाने की कोई संभावना नहीं थी. धनबाद के सिंह मेंशन से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस नेता नीरज सिंह में पेशेवर अपराधियों का हाथ होने की आशंका है. नीरज सिंह की बायीं आंख में लगी गोली भेजे को फाड़कर निकल गयी. उनके सीने, पेट, ठुड्डी में भी गोली लगी थी. पूरे शरीर में 20 से ज्यादा गोलियां लगीं.

नीरज सिंह की हो रही थी रेकी!

जिस तरह से सुनियोजित तरीके से ऑटोमेटिक हथियारों से वारदात को अंजाम दिया गया, उससे पता चलता है कि अपराधी कई दिनों से नीरज सिंह का पीछा कर रहे थे. उनकी हर गतिविधि पर निगाह रखी जा रही थी. मंगलवार को भी उनकी गाड़ी का पीछा किया जा रहा था. स्टील गेट पर स्पीड ब्रेकर के पास गाड़ी की रफ्तार धीमी होते ही बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी.

वारदात के बाद बाइक सवार अपराधी काफ़ी तेज गति से गोल बिल्डिंग की तरफ फरार हो गए. हत्याकांड में प्रोफेशनल शूटर्स का हाथ होने का अंदेशा जताया जा रहा है. नीरज किसी भी हालत में बच न सकें, इसके लिए पूरी तैयारी थी.

पूर्व डिप्टी मेयर झरिया के कतरास मोड़ स्थित अपने ऑफिस से सरायढेला स्थित रघुकुल अावास के लिए निकले थे. अंदेशा है कि बदमाश झरिया से ही उनके वाहन का पीछा कर रहे थे. भीड़भाड़ के चलते उन्हें रास्ते में कहीं मौका नहीं मिला. 

वारदात के पीछे कॉन्ट्रैक्ट किलर! 

चश्मदीदों के मुताबिक हमलावरों ने हेलमेट नहीं पहने थे. इससे साफ है कि वह इलाके के नहीं थे. लिहाजा उन्हें पहचाने जाने का कोई डर नहीं था. स्थानीय मीडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक दो बाइक पर चार से पांच अपराधी थे, जो नीरज सिंह के वाहन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे थे.

नीरज सिंह के घर से पहले 15 ब्रेकर हैं, जिसका अपराधियों ने फायदा उठाया. नीरज की गाड़ी की रफ्तार कम होते ही बदमाशों ने एके-47 से उनकी कार पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. 

रंजय हत्याकांड जैसा गैंगवार

इसी साल जनवरी में कोल सिटी में रंजय हत्याकांड हुआ था. रघुकुल के पास वारदात को अंजाम दिया गया था. ठीक उसी तरह कुंती निवास के पास नीरज समेत चार लोगों को निशाना बनाया गया. दोनों जगहों के बीच की दूरी करीब एक किलोमीटर की दूरी है.

धनबाद में स्टील गेट से बिग बाजार तक का इलाका भीड़भाड़ वाला है. नीरज सिंह को जहां गोली मारी गई, वहां अक्सर जाम लगा रहता है. इसके बावजूद शूटर नीरज सिंह समेत चार लोगों को गोलियों से छलनी कर आराम से फरार हो गए.

पेशेवर शूटर उसी की हत्या करते हैं, जिसकी सुपारी उनको मिली होती है. सकलदेव सिंह और संजय सिंह की हत्या इसकी मिसाल है. नीरज समेत चार लोगों को तब तक गोली मारी जाती रही, जब तक हमलावर मौत को लेकर आश्वस्त नहीं हो गए.

एएनआई
कोयला माफिया सूरजदेव सिंह ने 80 के दशक में सिंह मेंशन की नींव रखी थी. (फाइल फोटो)

सिंह मेंशन का अतीत

धनबाद में स्टीलगेट पास एनएच-32 पर स्थित 1980 के दशक में बने इस घर की बुनियाद कोयला माफिया सूरजदेव सिंह ने रखी थी. अपने शुरुआती दिनों से लेकर अब तक सिंह मेंशन ने तमाम उतार-चढ़ाव देखे है.

धनबाद में पिछले चार दशकों के दौरान गैंगवार में दर्जन भर हत्याओं की पृष्ठभूमि कहीं न कहीं सिंह मेंशन से जुड़ी रही हैं.
सिंह मेंशन में इसके शुरुआती दिनों से ही राजनेताओं का आना-जाना लगा रहता था. यही नहीं सिंह मेंशन से अपने रिश्ते को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर अक्सर चर्चा में रहते थे.

नवंबर 1990 में प्रधानमंत्री बनने के बाद चंद्रशेखर धनबाद आने पर सबसे पहले यहीं आये थे. उनकी इस परंपरा को कई राजनेताओं ने आगे बढ़ाया. जिसमें वर्तमान गृहमंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय इस्पात मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी और अर्जुन मुंडा भी शामिल हैं.

वर्तमान में सिंह मेंशन के मुखिया झरिया विधायक संजीव सिंह है. संजीव, सूरजदेव सिंह के दूसरे पुत्र हैं. वे पहली बार अपने पिता की विरासत झरिया विधानसभा को संभाल रहे हैं. उन्होंने दिसंबर 2014 में बीजेपी के टिकट इस सीट पर जीत हासिल की थी.

अपने पिता की यह विरासत उन्हें मां कुंती देवी से मिली है. कुंती देवी झरिया से 2004 से 2014 तक विधायक रही थीं. 1977 से ले आकर आज तक इस सीट सूरजदेव सिंह, उनके भाई बच्चा सिंह, उनकी पत्नी कुंती सिंह और बेटे संजीव का कब्जा रहा है. महज एक बार 1995 में यहां लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल की प्रत्याशी आबो देवी चुनाव जीतने में कामयाब रही थीं.

झरिया से बीजेपी विधायक संजीव सिंह वर्तमान समय में सिंह मेंशन के मुखिया हैं. (फाइल फोटो)

सिंह मेंशन में तकरार

पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह कांग्रेस से जुड़े थे. नीरज सिंह झरिया से भाजपा विधायक संजीव सिंह के चचरे भाई थे. वह धनबाद विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं. सिंह मेंशन में तनाव के कारण झरिया विधायक संजीव सिंह एवं नीरज सिंह के बीच सियासी रस्साकशी भी चल रही थी. दोनों भाइयों में काफी अरसे से टकराव बना हुआ था.

हाल ही में संजीव सिंह के सहयोगी रंजय की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्याकांड में पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह का नाम सामने आया था. अब नीरज सिंह की हत्या के बाद सिंह मेंशन की दरार खाई में बदलती दिख रही है. नीरज के परिजनों की मानें तो रंजय की हत्या के बाद परिवार में खूनी संघर्ष की आशंका बढ़ गई थी. ऐसे में कोयला नगरी में एक नए गैंगवार की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता.

First published: 22 March 2017, 11:34 IST
 
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