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गोवा: क्या मुख्यमंत्री पर्सेकर ने हलफ़नामें में अपनी प्रॉपर्टी के बारे में झूठ बोला?

निहार गोखले | Updated on: 31 January 2017, 8:04 IST
(गेटी इमेजेज़)

2017 का गोवा विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पर्सेकर ने 8.98 करोड़ रुपए की संपत्ति की घोषणा की है. यह 2012 में घोषित उनकी संपत्ति से 1.76 करोड़ रुपए कम है और वे ही एक मात्र मंत्री हैं जिनकी संपत्ति कार्यकाल के दौरान कम हुई है. उनकी छवि के हिसाब से यह सही भी लगता है, क्योंकि वे एक स्कूल टीचर से यहां तक पहुंचे हैं.

पर्सेकर की सम्पत्तियों, खास तौर पर रियल एस्टेट पर गौर करें तो कई तरह के सवाल उठते हैं. उनके पास तीन आवासीय मकान, एक व्यावसायिक सम्पत्ति और उत्तरी गोवा के अरम्बोल गांव में 54 एकड़ कृषि भूमि है. यह सब उनकी पैतृक सम्पत्ति है, जिसे उन्होंने 2012 से 2017 के बीच नहीं बेचा. हालांकि इन व्यावसायिक और आवासीय सम्पत्तियों की कीमत 2017 में भी वही है जो उन्होंने 2012 के घोषणा पत्र में दर्शाई है.

आवासीय बंगला सर्वे नंबर 95/29. 500 वर्गमीटर प्लॉट (यानी 5380 वर्ग फीट). इसका कारपेट एरिया 160 वर्गमीटर (या 1722वर्ग फीट) इसकी कीमत 2012 में 20 लाख रुपए या 4000 रूपए प्रति वर्गमीटर (केवल जमीन की कीमत). यही कीमत उन्होंने 2017 के घोषणा पत्र में दिखा दी.

सर्वे नं. 300/1: 36670 वर्ग फीट प्लॉट और 1721 वर्ग फीट का बंगला. 2012 में इसकी कीमत 25 लाख रुपए थी और जमीन की कीमत 733 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से बताई गई और 2017 में भी यही कीमत दिखाई गई.

सर्वे 274/1: 24,629 वर्ग फीट-2152 वर्ग फीट बंगला. इसकी कीमत 2012 में 40 लाख रुपए और जमीन की दर 1747 प्रति वर्ग मीटर बताई गई थी, जो 2017 के घोषणा पत्र मे भी वही बताई गई.

व्यावसायिक प्रॉपर्टी: 180 वर्ग मीटर की पैतृक संपत्ति. वर्ष इसकी कीमत 22, 222 रुपए की दर से 40 लाख रुपए बताई गई और 2017 में भी उन्होंने इसकी कीमत इतनी ही बताई गई.

यह क्या बताता है?

एक ही गांव में होते हुए सारी सम्पत्तियों के प्रति वर्ग मीटर की दर अलग-अलग बताई गई है. पर्सेकर ने दिखाया है कि उनकी आवासीय और व्यावसायिक सम्पत्ति की कीमतें नहीं बढ़ी लेकिन उनकी एक दर्जन कृषि भूमि की कीमतें पांच साल में 10 प्रतिशत बढ़ गई. इसके अलावा 10,000 वर्गमीटर के उनके एक खेत की कीमत 40 प्रतिशत बढ़ी हुई दिखाई गई.

सरकारी कानून के मुताबिक कृषि भूमि का कोई और इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. अगर ऐसी भूमि की कीमत 5 सालों में 10 प्रतिशत तक बढ़ सकती है तो आवासीय और व्यावसायिक संपत्ति की कीमतें क्यों नहीं बढ़ीं?

कितनी सही है घोषणा

1- पर्सेकर के विधानसभा क्षेत्र मंडरेम से चुनाव लड़ रहे अन्य उम्मीदवारों द्वारा की गई सम्पत्ति की घोषणा अत्यधिक है.

2- रियल एस्टेट की कीमतें बहुत अधिक हैं.

3- गोवा सरकार द्वारा तय की गई जमीनों की कीमतें पर्सेकर की बताई गई कीमतों से अत्यधिक है.

4- सरकारी नीतियों के ही चलते आरामबोलगांव में परनेम तालुक में रियल एस्टेट की कीमतें बढ़ी हैं.

अन्य उम्मीदवार

पर्सेकर के विधानसभा क्षेत्र मंडेरम से महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के उम्मीदवार श्रीधर मांजरेकर ने अपनी पत्नी के नाम एक प्लॉट मंडेरम में ही होना बताया है. चूंकि आरमबोल गांव के दक्षिण में ही बसा मंडेरम बहुत अधिक लोकप्रिय नहीं है और कम भीड़ भाड़ वाला क्षेत्र है. मांजरेकर ने 220 वर्ग मीटर के बंगले की कीमत 7334 प्रति वर्ग मीटर की दर से 16.13 लाख रूपए बताई. यह पर्सेकर द्वारा बताई गई जमीन की कीमत से कम से कम 4 गुना अधिक है.

सरकारी दरें

भाजपा सरकार के सत्ता संभालने के कुछ माह बाद ही जनवरी 2013 में गोवा में जमीन की कीमतें एकदम से बढ़ गईं. आरमबोल गांव में जमीन की कीमतें 400 रूपए प्रति वर्ग मीटर से छह गुना से भी अधिक बढ़ कर 2500 रूपए प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गईं. पर्सेकर ने जे कीमतें बताई हैं, वे इस तय कीमत से कम की बताई गई है. 1000 वर्ग मीटर से अधिक बड़े भू खंड के लिए सरकारी कीमतें 10-20 प्रतिशत कम हैंलेकिन पर्सेकर की घोषित कीमतें इससे भी कम हैं.

जमीनों की असल कीमतें

इस संवाददाता ने जमीनों के सही दाम मालुम करने के लिए क्षेत्र के प्रॉपर्टी व्यवसायियों से बात की. संवाददाता ने इनसे प्रॉपर्टी का खरीददार बन कर बात की जो पुणे में रहता है; न कि न्यूज रिपोर्ट के हिसाब से.

आरमबोल में जमीन की कीमत 1500 रूपए प्रति वर्गमीटर से कम नहीं थी और पर्सेकर ने 274/1 में 2,200 वर्गमीटर जमीन की कीमत 1747 प्रति वर्गमीटर बता रखी है, उसकी अधिकतम दर असल में 17,000 रूपए प्रति वर्गमीटर है. बल्कि सर्वे नं. 275/0 में पर्सेकर की प्रॉपर्टी के पास वाली जमीन 2000 रूपए प्रति वर्गमीटर की दर से बिकाऊ है. 

पर्सेकर के दो मंजिला मकान के बजाय इस प्रॉपर्टी की जमीन बंजर है. इस जमीन की कीमत इसलिए भी कम है क्योंकि यह प्लॉट 3 लाख वर्गमीटर में फैला है. एजेंट के मुताबिक पर्सेकर की प्रॉपर्टी की कीमत कम से कम 2500 वर्गमीटर है.

प्रॉपर्टी में उछाल

भाजपा सरकार द्वारा परनेम तालुक में तुएम को इलैक्ट्रॉनिक सिटी बनाने और मोपा में एक अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने की घोषणा करने के बाद यहां प्रॉपर्टी की कीमतों में अचानक उछाल देखा गया. स्थानीय लोगों के मुताबिक परनेम में प्रॉपर्टी की कीमतें पिछले 3 सालों में दो गुनी हो गई. परनेम के ही रहने वाले धनंजय पंडित ने बताया मैंने 2011 में यहां एक जमीन 10 लाख रूपए में खरीदी थी, जिसे पिछले साल 40 लाख रूपए में बेचा है.

गोवा में हाल ही नवम्बर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इलेक्ट्रॉनिक सिटी और अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का शिलान्यास किया था. ये दोनों ही प्रोजेक्ट पर्सेकर सरकार द्वारा कुछ साल पहले घोषित किए गए थे. अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए सरकार ने एयरपोर्ट डवलपर जीएमआर के साथ सौदा किया है, जो 8000 रूपए प्रति वर्गमीटर की दर पर हुआ है. इसके तहत 232 एकड़ की व्यावसायिक प्रॉपर्टी बनाने की भी अनुमति दी गई है. 

क्या यह गलत है?

लोकतांत्रिक सुधार संघ की गोआ इकाई के अध्यक्ष भास्कर असोलडेकर कहते हैं संपत्ति की घोषणा करते वक्त प्रॉपर्टी की कीमत बाजार दर से कम दिखाना गलत है लेकिन कानून में इसके लिए कोई जुर्माना नहीं है. हालांकि इस बार बहुत से और उम्मीदवारों ने भी संपत्ति का ऐसा ही ब्यौरा दिया है. 

उन्होंने कहा सही मायनों में तो निर्वाचन अधिकारी को हर उम्मीदवार का शपथ पत्र जांच के दौरान गौर से देखना चाहिए और ऐसी गलतियों का उल्लेख करना चाहिए. इसमें कोई ज्यादा वक्त भी नहीं लगता. वे कहते हैं आम तौर पर केवल अधूरी जानकारी देने संबंधी गलती पर ही ध्यान दिया जाता है. इस संबंध में अगर कुछ करना ही है तो मतदाताओं को अवगत करना बेहतर विकल्प है. इस बारे में पर्सेकर को भी एक ई-मेल भेज दी गई है.

First published: 31 January 2017, 8:04 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

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