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पश्चिम बंगालः भंगोर हत्याकांड में सीबीआई जांच की मांग

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 29 January 2017, 8:52 IST
(कैच न्यूज़)

पश्चिम बंगाल सरकार भंगोर के कमरैत गांव में शांति बहाली का प्रयास कर रही है. पुलिस और ग्रामीणों के बीच रिश्ते सुधारने में लगी सरकार को उस समय झटका लगा, जब जॉमी, जिबिका, पॉरिबेश ओ बास्तुतंत्र रक्षा समिति ने विरोध जारी रखने का निर्णय किया. ये ग्रामीण पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पीजीसीआईएल) का एक विद्युत संयंत्र स्थापित करने के लिए भू अधिग्रहण पर हुई हिंसा के दौरान मारे गए दो प्रदर्शनकारियों की मौत की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं.

जॉमी, जिबिका,पॉरिबेश ओ बास्तुतंत्र रक्षा समिति उन दो लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग करते हुए कॉलेज स्ट्रीट पर 30 जनवरी को एक बड़ी रैली निकालेगी. राज्य सरकार का कहना है कि ग्रामीणों को पीआईएम (एल) कार्यकर्ता गुमराह कर रहे हैं. साथ ही राज्य सरकार ने यह भी माना कि वे भू अधिग्रहण के खिलाफ हैं. 

राज्य के विद्युत मंत्री सोवन देब चटर्जी ने कहा, गांव के लोगों को गुमराह किया जा रहा है लेकिन हम भी लोगों में यह विश्वास कायम करने में कामयाब रहे कि हम उनकी जमीन नहीं हड़प रहे, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस भू अधिग्रहण के खिलाफ है. पुलिस के साथ सहयोग करने और कमरैत रास्ते में लगे बड़े-बड़े लकड़ी के लठ्ठे हटाने के बाद ये विरोध प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि मुख्यमंत्री स्वयं उनसे मिल कर दोषियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी करवाएं.

जॉमी, जिबिका, पॉरिबेश ओ बास्तुतंत्र रक्षा समिति के रहीम खान ने कहा, ‘‘जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती हम अपना विरोध जारी रखेंगे, क्योंकि अभी तक यह साफ नहीं है कि प्रदर्शनकारियों पर गोली किसने चलाई.

संपत्ति विवाद

भंगोर के ऐसे हालात के बीच, जहां प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के बहुत से वाहन फूंक डाले; राज्य सरकार काफी सक्रिय हो चुकी है और विधानसभा के अगले सत्र में सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को सजा देने के लिए एक कानून बनाने की तैयारी कर रही है. इस कानून के तहत सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की संपत्ति भी जब्त की जा सकेगी.

शुक्रवार को खाद्य साथी दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘ हम किसी भी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक सम्पत्ति का नुकसान बर्दाश्त नहीं करेंगे क्योंकि कोई भी निर्माण करने में समय लगता है. सरकार ना तो विपक्ष, ना मीडिया और ना ही प्रदर्शनकारियों को सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं दे सकते.’’

कौन हैं ये विरोध प्रदर्शनकारी?

माओवादी सीपीआई(एमएल) रेड स्टार ने जॉमी, जिबिका, पॉरिबेश ओ बास्तुतंत्र रक्षा समिति का गठन किया है. माओवादी सीपीआई(एमएल) रेड स्टार ने कथित तौर पर सब-स्टेशन प्रोजेक्ट के खिलाफ आंदोलन छेड़ा हुआ है. तृणमूल कांग्रेस नेताओं द्वारा समझाइश करने और यह आश्वासन देने के बावजूद कि गांव वालों की जमीन उनकी सहमति के बिना नहीं ली जाएगी; भंगोर में एक हफ्ते बाद भी विरोध की आग सुलग रही है.

एक प्रदर्शनकारी मोहम्मद रफी ने कहा, ‘‘मुठभेड़ में दो प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद कई ग्रामीण डरे हुए हैं. इसलिए वे मुख्यमंत्री से आश्वासन चाहते हैं. हालांकि स्कूल व कॉलेज खुले हैं लेकिन बच्चे बाहर खेलने से डरते हैं, खास तौर पर रात को.’’

शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में तय किया गया कि सभी जिला मजिस्ट्रेट अपने जिले में कोई भी प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले वस्तुस्थिति, जमीन की गुणवत्ता की जांच करेंगे, मुख्यमंत्री कार्यालय को इस बारे में अवगत करवाएंगे. मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद ही कोई प्रोजेक्ट लगाया जा सकेगा.

First published: 29 January 2017, 8:52 IST
 
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