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महाराष्ट्रः भाजपा नेता एकनाथ का दाउद इब्राहिम से रिश्ता नहीं, व्हिसल ब्लोअर गिरफ़्तार

अश्विन अघोर | Updated on: 2 April 2017, 9:47 IST

 

भारतीय जनता पार्टी नेता और महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से को अब जा कर राहत मिली है. उन पर अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम के साथ संबंधों का आरोप लगा था. इसके चलते वे करीब 9 माह तक राज्य के राजनीतिक पटल से दूर रहे. आखिर उन पर लगा सबसे बड़ा दाग धुल गया. जिस हैकर ने दाउद इब्राहिम और खड़से की बातचीत सुनने का दावा किया था, उसे मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है.


अपने आपको एथिकल हैकर बताने वाले मनीष भांगले ने कहा, खड़से दाउद के साथ सम्पर्क में थे. अपने दावे के समर्थन में मनीष ने मोबाइल फोन के बिल भी पेश किए. संयुक्त पुलिस उपायुक्त (अपराध) संजय सक्सेना के अनुसार, भांगले के आरोप निराधार पाए जाने के बाद उसे शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्होंने जो मोबाइल फोन के बिल पेश किए, वे फर्जी थे. भांगले को खड़से के खिलाफ झूठे सबूत पेश करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया.

 

उनके खिलाफ फर्जीवाड़ा और बेईमानी करने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 468 और फर्जी दस्तावेज या इलैक्ट्रॉनिक रिपोर्ट को सही बता कर पेश करने के लिए धारा 471 व सूचना प्रोद्यौगिकी अधिनियम की धारा 66 डी के तहत मामला दर्ज किया गया है.

 

खडसे को कैसे फंसाया

भांगले ने 2016 में खड़से पर दाउद से संपर्क में होने के आरोप लगाए थे. उसके आरोपों से महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में हड़कम्प मच गया था क्योंकि खड़से सत्ताधारी भाजपा के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं और देवेंद्र फड़नवीस सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री. खड़से के पास राजस्व, उद्योग और कृषि मंत्रालय हैं. उन पर पहले से ही अपने पद का दुरूपयोग कर पुणे के पास काफी सस्ते दाम पर जमीन खरीदने के आरोप हैं. भांगले के आरोपों के बाद खड़से ने 3 जून 2016 को मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया.


आरोपों की गंभीरता को समझते हुए मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने मामले की जांच करना शुरू किया. भांगले के दस्तावेजों की जांच के बाद महाराष्ट्र आतंक निरोधी दस्ते (एटीएस) ने खडसे को क्लीन चिट दे दी. भांगले से जब टेलीफोन बिलों के अधिकृत होने के संबंध में सबूत मांगा गया तो वह कोई सबूत नहीं दे सका. इसलिए उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘जब हमने उस फोन के कॉल रिकॉर्ड्स खंगाले जिसे खड़से का बताया जा रहा था तो पाया कि पाकिस्तान के केॉल की बात तो छोडि़ए; उस पर कोई इंटरनेशनल इनकमिंग और आउटगोइंग कॉल रिकॉर्ड नहीं पाया गया. इससे संदेह हुआ कि भांगले ने जो बिल पेश किए हैं, वे सही नहीं हैं. फिर जब हमने उन बिलों की जांच की तो पाया कि वे फर्जी थे.’’


एटीएस की तरह ही मुंबई पुलिस को भी इन आरोपों के पक्ष में साक्ष्य नहीं मिले. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, हमें मनीष भांगले के आरोपों के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं मिला जो उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए थे कि 2015-2016 के बीच खड़से दाउद इब्राहिम के सम्पर्क में थे.

 

सरकार पर आरोप


खडसे के खिलाफ इस प्रेस कॉन्फ्रेंस और अन्य आरोपों की शुरूआत आम आदमी पार्टी नेता प्रीति शर्मा मेनन ने की थी. प्रीति ने इस मामले को खूब उछाला. यहां तक कि भांगले की गिरफ्तारी के बाद भी उन्होंने कहा, सरकार और पुलिस मिल कर खडसे का बचाव कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार व्हिसल ब्लोअर को निशाना बना रही है. पुलिस अधिकारियों ने खडसे को चार दिन के भीतर क्लीन चिट दे दी. मनीष को खडसे के कहने पर ही गिरफ्तार किया गया.’’

First published: 2 April 2017, 9:47 IST
 
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