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केसीआर के खिलाफ खड़े हुए उनके ‘अपने’

ए साए शेखर | Updated on: 26 February 2017, 9:12 IST


तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव उर्फ केसीआर लगता है अपने दोस्त एम.कोदानदरम की ताकत का सही-सही अंदाजा नहीं लगा पाए और कोदनदरम स्वतः ही धीरे-धीरे अपने राजनीतिक दोस्त से दूर होते चले गए. हैदराबाद में बुधवार का दिन ‘‘दोस्ती के नीचे दबी हुई राजनीतिक महत्वाकांक्षा’’ के नाम रहा. यहां प्रो.कोदनदरम के नेतृत्व में रोगजगार की मांग करते हुए आंदोलन किया गया.


प्रोफेसर कोदनदरम के घर पर पूर्वी अंचल पुलिस ने रात 3 बजे छापेमारी कर उन्हें और उनके 40 साथियों को गिरफ्तार कर लिया, जिसका वीडियो फेसबुक लाइव पर वायरल हो गया. राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रह चुके कोदनदरम ने सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल किया जबकि मीडिया को तो उनके घर के बाहर से जबरन हटा दिया गया था.


पुलिस प्रोफेसर के घर के दरवाजे तोड़ कर उनके घर में घुसी जबकि वे सुबह 6 बजे गिरफ्तारी देने के लिए तैयार थे. प्रोफेसर कोदनदरम ने खिड़की से पुलिस उपायुक्त के साथ बात की जबकि पुलिस उनके घर के दरवाजे तोड़ चुकी थी गौरतलब है कि प्रोफेसर की गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस ने दरवाजों की मरम्मत करवा दी.

 

आंदोलन कुचला गया


रिकॉर्ड के तौर पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को सड़कों पर फैलने से रोकने के लिए अपने दिल-दिमाग का बखूबी इस्तेमाल किया. हालांकि आंदोलनकारी छात्र और अन्य प्रदर्शनकारी इस आंदोलन के जरिये सरकार को अपनी ताकत दिखाना चाहते थे लेकिन तेलंगाना आंदोलन से निपट चुकी सरकार ने अपने अनुभव का सहारा लिया और आंदोलनकारियों के तौर तरीकों से वाकिफ होने के चलते सरकार के कुछ लोग इस आंदोलन का दमन करने में कामयाब रहे. पुलिस ने उनके इशारों पर चलते हुए आंदोलनकारियों को जहां थे, वहीं रोक दिया.


हालांकि आंदोलनकारी छात्रों ने उस्मानिया यूनिवर्सिटी परिसर में लगे एक बैनर को जला दिया जिस पर शताब्दी समारोह का विज्ञापन था. सरकार की उदासीनता के विरोध में तेलंगाना छात्र संघ के दो छात्रों संदीप कुमार और ज्योति ने आत्मदाह और खुदकुशी करने की कोशिश की. नामपल्ली में तेलंगाना के वकीलों ने और यूनिवर्सिटी कैम्पस में छात्रों ने मुख्यमंत्री के पुतले जलाए.


प्रोफेसर कोदनदरम की पत्नी सुशीला और उनकी वकील रचना रेड्डी ने राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन से मिल कर प्रोफेसर व अन्य लोगों को रिहा करने की मांग की कोशिश की, जो विफल रही. वकील रचना रेड्डी जुझारू वकील हैं और टीआरएस सरकार के खिलाफ मुकदमे लड़ती रही है. पुलिस ने प्रोफेसर कोदमदरम को कमातीपुरा पुलिस स्टेशन और उनके समर्थकों को गोशामहल में बंद कर दिया है.


टीआरएस के मीडिया प्रबंधकों ने स्थानीय मीडिया को भी ‘मैनेज’ कर लिया. टीवी चैनलों ने यह खबर लगभग ‘गायब’ ही कर दी और मुख्यमंत्री की तिरुमाला तिरुपति की यात्रा व उनके द्वारा भगवान वेंकटेश्वर व पद्मावती के दर्शन और पूजन पर ही फोकस रखा. हैदराबाद के इस आंदोलन को केवल नाम मात्र का दिखाया गया. एक ओर स्थानीय मीडिया केसीआर के खिलाफ खबरें नहीं दिखा रहा तो दूसरी ओर राष्ट्रीय मीडिया जैसे कि टाइम्स नाउ ने केसीआर के आडम्बर को आंदोलन से जोड़ते हुए इस पर बहस और टॉक शो आयोजित किए.

 

रोजगार की मांग


अलग तेलंगाना राज्य बनाने की मांग तीन मुद्दों पर की गई- फंड, पानी और रोजगार. उस्मानिया यूनिवर्सिटी से सेवानिवृत्त राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर कोदनदरम की अध्यक्षता वाली तेलंगाना जॉइंट एक्शन कमेटी (टी-जैक) के अनुसार मौजूदा सरकार के पास 1.34 लाख नौकरियां हैं. पिछले ढाई सालों में तेलंगाना लोक सेवा आयोग द्वारा 15,000 पदों पर ही भर्ती की गई. राज्य सरकार ने 35,000 पदों पर भर्ती की अनुमति जारी की है. प्रोफेसर कोदनदरम ऐसा मुद्दा उठाया है, जिससे बेरोजगारों की भावनाएं जुड़ी हैं और निश्चित रूप से बेरोजगार युवा उनके समर्थन में उनके पीछे आएंगे.

 

प्रोफेसर कोदनदरम ने रिहाई के तुरंत बाद पुलिस से कहा कि हमने 20 दिन पहले सरकार को पांच सूत्री मांग पत्र सौंपने के साथ ही रैली और धरना देने की इजाजत मांगी थी. उन्होंने कहा, सरकार को हमारे साथ खुला संवाद करना चाहिए था. इन मद्दों को बातचीत के जरिये हल करने की जरूरत बताई गई है. सरकार का परम कर्तव्य है कि वह लोकप्रिय मांगों को पूरा करे. उन्होंने अपने घर पर पुलिस छापेमारी की कड़ी निंदा की साथ ही उन्हें गिरफ्तार करने के तरीके को भी गलत बताया.


उन्होंने कहा, सरकार के पास 20 दिन का समय था, जब वह इन समस्याओं को बातचीत के जरिये हल कर सकती थी. सिटी पुलिस ने तो इंदिरा पार्क में धरना करने की इजाजत नहीं दी थी. इससे खिन्न हो कर टी-जैक ने तुरंत हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और पुलिस ने रैली व धरने प्रदर्शन के लिए शहर के बाहरी हिस्सों में चार जगहों का सुझाव दिया.


प्रोफेसर कोदनदरम ने प्रशासन को चौंकाते हुए हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली और अब पुलिस को चुनौती देने का निर्णय लिया. इससे पुलिस को बतौर सावधानी कई गिरफ्तारियां करनी पड़ी और सड़कों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया जिसने आंदोलन को फीका कर दिया. बाद में प्रोफेसर ने बताया कि जैक ने असल में रैली और धरना निरस्त करके निजाम कॉलेज ग्राउंड में सभा करने की इजाजत मांगी थी लेकिन पुलिस ने इसके लिए भी मना कर दिया.

 

कितनी गहरी दरार


केसीआर ही कोदनदरम के राजनतिक करियर के जनक कहे जा सकते हैं. कभी कंधे से कंधा मिलाकर चले इन दोस्तों के बीच आज राजनीतिक वजहों से दूरियां आ गई हैं. दोनों के बीच चुनाव के तुरंत बाद मतभेद उभर कर सामने आने लगे. मुख्यमंत्री ने आंदोलन के दौरान के अपने सभी साथियों को मलाईदार मंत्रालय दिए जबकि प्रोफेसर कोदनदरम को नाम मात्र का.


तेलंगाना आंदोलन के अन्य साझीदारों को भी केसीआर ने कोई खास तरजीह नहीं दी थी लेकिन तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि केसीआर को कोदनदरम पर अति विश्वास था लेकिन 2014 के चुनावों के बाद जब उन्हें पता लगा कि वे कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उनके कुछ साथियों मिले तो केसीआर ने स्वयं को ठगा सा पाया. इस पर दोनों के बीच क्या हुआ; यह तो कभी सार्वजनिक नहीं किया गया. लेकिन तभी से इनके संबंधों में खटास आनी शुरू हो गई थी.


यह तो केवल शुरुआत ही थी. आम चुनावों से पूर्व प्रोफेसर कोदनदरम की अगुवाई में उपचुनावों में जैक की भूमिका ने भी केसीआर और कोदनदरम के बीच दरार पैदा कर दी.

केसीआर के शपथ लेने के बाद प्रोफेसर ने फिर से यूनिवर्सिटी कॉलेज में शिक्षण करना शुरू कर दिया था. हालांकि वे उपर से शांत नजर आ रहे थे लेकिन अंदर ही अंदर वे केसीआर के खिलाफ हो गए. उन्होंने किसान आत्महत्या मसले पर सरकार को घेरा. उन्होंने इस संबंध में हैदराबाद हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की. वे केसीआर के धार्मिक रीति रिवाज को लेकर भी सशंकित ही रहते आए हैं. प्रोफेसर ने कहा, वे मुख्यमंत्री की धार्मिक भावनाओं की कद्र करते हैं लेकिन वे भगवान के समक्ष चढ़ावे का आडम्बर क्यों कर रहे हैं. प्रोफेसर दरअसल वामपंथी विचारधरा वाले हैं और यह बात किसी से छिपी नही है.

 

रेड्डी घटक


हालांकि तेलंगाना में जातिगत राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं है; फिर भी रेड्डी समुदाय के नेता एकजुट होने शुरू हो चुके हैं. असल में उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची और वे न आंध्र व ना ही तेलंगाना; कहीं भी सत्ता में नहीं हैं. इसलिए कांग्रेस और तेलगूदेशम के रेड्डी नेताओं को वैकल्पिक नेता की सख्त जरूरत है, जो कि उन्हें प्रोफेसर कोदनदरम में दिखाई दे रहे हैं.

 

बुधवार को टिृवटर पर हैशटैग केसीआर फेल्ड तेलंगाना ट्रेंड कर रहा था और कांग्रेस ने इसमें भरपूर साथ दिया. देखा जाए तों दोनों नेताओं के बीच दरार तो पड़ ही चुकी है. अब देखा यह है कि कसीआर इन हालात से कैसे निपटते हैं.

 

First published: 26 February 2017, 9:12 IST
 
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