Home » राज्य » Farmers in Bengal hit hard by Modi replacing Kisan credit cards with Rupay debit cards
 

किसान क्रेडिट कार्ड्स की जगह रुपे कार्ड्स से बंगाल के किसान परेशान

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 10 February 2017, 1:36 IST
(एएफ़पी )

नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया था कि किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड्स की जगह रुपे डेबिट कार्ड्स दिए जाएंगे. केंद्र के इस फैसले ने बंगाल में खेतिहर समुदाय की दुश्वारियां और बढ़ा दी हैं. कुछ दिनों पहले सभी जिलों के जिला मजिस्ट्रेट ने नाबन्ना स्टेट हेडक्वार्टर पर एक चिट्ठी भेजी थी कि केंद्र द्वारा नए किसान क्रेडिट कार्ड्स जारी नहीं करने से किसानों के सामने मुश्किलें आ रही हैं.

चिट्ठी में लिखा था कि पिछले 22 दिनों में करीब 50,000 किसानों ने नए किसान क्रेडिट कार्ड्स के लिए आवेदन किया था, पर देने से इनकार कर दिया. मोदी ने ऐलान किया था कि तीन महीने के भीतर किसान क्रेडिट कार्ड्स की जगह रुपे डेबिट कार्ड्स तीन करोड़ दिए जाएंगे. किसान ऑन ट्रांजेक्शन से सारी सुविधाएं ले सकते हैं.

किसानों के मुताबिक, जब से केंद्र ने किसान क्रेडिट कार्ड्स देना बंद किया है, स्थितियां गंभीर हो गई हैं. पिछले दो हफ्तों में हालात और भी नाजुक हो गए हैं क्योंकि किसान, किसान क्रेडिट कार्ड्स से ऋण नहीं ले पा रहे हैं.

संकट की घड़ी

बर्दवान के किसान बिरसा दास ने कहा, ‘डर है कि कहीं हमें हमारी खेती बंद नहीं करनी पड़ जाए क्योंकि केंद्र ने हमें किसान क्रेडिट कार्ड्स देने बंद कर दिए हैं. अगर वे रुपे डेबिट कार्ड्स देते हैं, तो हमारे लिए उसे काम में लेना मुश्किल होगा.’ 

इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड्स से किसानों को बीमा सुविधाएं और आपदा राहत चेक्स मिल सकते हैं. फिलहाल रुपे डेबिट कार्ड्स से इनमें से कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है. इससे उनकी स्थितियां और बिगड़ रही हैं.

बीरभूम के एक किसान नृत्यानंद बरुई ने कहा, ‘ज्यादातर किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड्स इस्तेमाल करना नहीं आता, इसलिए किसानों को विकल्प देने की आवश्यकता है कि वे किसान क्रेडिट कार्ड्स और रुपे डेबिट कार्ड्स में से एक चुन सकते हैं.’ 

अगर केंद्र की ओर से ऐसा विकल्प नहीं दिया गया, तो बंगाल के किसानों ने आंदोलन करने का फैसला लिया है. बरुई ने आगे कहा, ‘हमारी मुख्यमंत्री हमारे लिए प्रयास कर रही हैं और हम नोटबंदी की बुराइयों के खिलाफ लड़ने के लिए उन्हें पूरा सहयोग देंगे.'

क्या कहते हैं आंकड़े

राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक बंगाल में लगभग एक लाख किसान, किसान क्रेडिट कार्ड्स बंद करने के केंद्र के फैसले से परेशान हो रहे हैं. नोटबंदी के बाद महज दो महीनों में बंगाल में 30 फीसदी लोग बेरोजगार हो गए. गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने अक्सर कहा है कि केंद्र ने 55 केंद्रीय स्कीमों में राशि कम कर दी है और 39 केंद्रीय स्कीमें बंद कर दी हैं. नतीजतन राज्य तकलीफ में हैं. 

अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद ने कहा, ‘हम नोटबंदी के खिलाफ अपने प्रयास जारी रखेंगे क्योंकि प्रधानमंत्री को अब भी बताना बाकी है कि नोटबंदी के बाद बैंकों में पुरानी करेंसी कितनी जमा हुई. जबकि इससे छोटे कारोबारी, किसान और चाय बागान के वर्कर्स काफी प्रभावित हए हैं.’

First published: 14 January 2017, 8:15 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी