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गोवा विधानसभा चुनाव: एमजीपी ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ाई

आकाश बिष्ट | Updated on: 14 December 2016, 7:30 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)

गोवा चुनाव भाजपा के लिए दूर की कौड़ी साबित हो सकते हैं. अगले साल की शुरूआत में ही गोवा में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और भाजपा ने एमजीपी (महाराष्ट्रवादी गोमान्तक पार्टी) के साथ अपने साढ़े चार साल का गठबंधन तोड़ लिया. गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर ने अपने खिलाफ आवाज उठाने वाले एमजीपी के दो मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया है. 

मुख्यमंत्री ने राज्यपाल मृदुला सिन्हा को फैक्स भेज कर संविधान के अनुच्छेद 164 (1) के तहत पीडब्लूडी मंत्री रामकृष्ण धावालिकर और फैक्ट्री व बॉयलर मंत्री पांडुरंग धावालिकर को पद से हटाने की मांग की. ये दोनों भाई हैं. फिलहाल पार्सेकर ने ये दोनों ही विभाग अपने पास रखे हैं.

यह गठबंधन उसी वक्त से कमजोर होने लग गया था, जब एमजीपी नेता सुदिन धावालिकर ने पार्सेकर पर पिछले ढाई सालों में गोवा को 10 साल पीछे करने का आरोप लगाया. पार्सेकर को हटाने की मांग करते हुए धावालिकर ने धमकी दी कि वे उनके नेतृत्व में भाजपा के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ेंगे.

इसी के जवाब में पार्सेकर ने एमजीपी नेता से इस्तीफा देने के लिए कह दिया. साथ ही यह भी कि अगर उन्हें गठबंधन में घुटन महसूस होती है तो वे गठबंधन भी तोड़ सकते हैं.

गोवा में संवाददाताओं से बात करते हुए पार्सेकर ने कहा, ‘मेरा एजेंडा सुदिन धावालिकर थोड़े ही तय करेंगे, अगर उन्हें सरकार में रहते हुए घुटन हो रही है तो वे इस्तीफा दें और जाएं और फिर जनता के बीच जाकर हमारे बारे में बयानबाजी करें.’

ट्रैक रिकॉर्ड

गौरतलब है कि एमजीपी को जब भी कोई गठबंधन तोड़ना होता है तो वह इसी तरह आक्रामक हो जाती है. दरअसल यह 2007 में कांग्रेस के साथ भी गठबंधन में थी और चुनाव से ठीक पहले इसने गठबंधन तोड़ लिया था. धावालिकर बंधुओं को सरकार में महत्वपूर्ण विभाग मिलते रहे हैं. 2012 में एमजीपी ने भाजपा के साथ मिल कर चुनाव लड़ा था और 40 में से तीन सीटें जीतीं थी.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जितना दिखाई दे रहा है, हालात उससे अधिक भयावह है. भाजपा नेताओं ने धावालिकर पर हद से बाहर होकर टिप्पणियां करने का आरोप लगाया है. भाजपा विधायक माइकल लोबो ने कहा, एमजीपी भाजपा पर ज्यादा सीटों के लिए दबाव बना रही थी. 

उन्होंने यह भी संभावना जताई कि वह नई पार्टी गोवा सुरक्षा मंच (जीएसएम) के साथ भी बातचीत कर रही है. दरअसल जीएसएम ने एमजीपी के साथ गठबंधन करने का प्रस्ताव रखा है, हालांकि अभी सब कुछ फाइनल नहीं हुआ है. लेकिन दोनों का राजनीतिक एजेंडा समान है इसलिए इनके हाथ मिलाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

एमजीपी एजेंडा

एमजीपी गैर ब्राह्मण हिन्दू वोटों पर निर्भर है और इसकी राजनीति आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हिन्दुओं को उपर उठाने में है. पिछले 14 सालों से भाजपा और कांग्रेस की गठबंधन सहयोगी एमजीपी पुर्तगाल से आजादी पाने के बाद गोवा में सरकार बनाने वाली पहली पार्टी है.

गोवा के गरीब गैर ब्राहमण हिनदुओं के समर्थन के बल पर पार्टी ने गोवा में 17 साल तक राज किया और उसके बाद देश की दो बड़ी पार्टियों कांग्रेस और भाजपा के साथ गठबंधन बनाती रही.

1999 से 2005 के बीच ज्यादातर हिन्दू वोट भाजपा के पक्ष में पड़े, इससे एमजीपी को तगड़ा झटका लगा. अपने को अति राष्ट्रवादी पार्टी बताते हुए एमजीपी ने स्कूलों में क्षेत्रीय भाषा पढ़ाने और अंग्रेजी स्कूलों को सहायता देने से इनकार कर दिया.

जीएसएम एजेंडा

आरएसएस से मतभेद के बाद सुभाष वेलिंगकर ने जीएसएम पार्टी का गठन कर स्कूलों में क्षेत्रीय भाषा और अंग्रेजी स्कूलों को सहायता रोकना ही अपना राजनीतिक एजेंडा बनाया है. आरएसएस की गोवा इकाई के पूर्व प्रमुख वेलिंगकर ने इसी मुद्दे पर कई नेताओं को आरएसएस छोड़ कर जीएसएम में शामिल होने को मना लिया. भाजपा को प्रदेश से पूरी तरह उखाड़ फेंकने के इरादे से जीएसएम अब एमजीपी से हाथ मिला रही है.

आरएसएस के नेता रह चुके जीएसएम के सदस्य कृष्णराज सुकेरकर इन राजनीतिक गतिविधियों की पुष्टि करते हुए कैच को कहा कि धावालिकर की नजर अब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है. वे पिछली चार सरकारों में महत्वपूर्ण विभाग के मंत्री रह चुके हैं और अब मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं. 

वे कहते हैं चूंकि जीएसएम नई पार्टी है और एमजीपी पहले से ही गठित पार्टी है; इसलिए उसके निर्णय को प्राथमिकता दी जाएगी. इस आधार पर हम सहमत नहीं हैं लेकिन दोनों पार्टियों के एकजुट होने से भाजपा की सत्ता में वापसी की महत्वाकांक्षा को धक्का लगना तय है.

खोया जनाधार

गोवा में रैलियों के दौरान आरएसएस के कार्यकर्ताओं द्वारा वेलिंगकर का समर्थन करना भाजपा को बेचैन करने के लिए काफी है. इन कार्यकर्ताओं द्वारा बूथ तक वोटरों को नला पाना भाजपा के लिए वाकई नुकसानदेह साबित होगा. सुकेरकर ने कहा, ‘भाजपा वोटों के माले में जिस तरह महाराष्ट्र में शिवसेना पर निर्भर है, उसी तरह यहां गोवा में एमजीपी पर निर्भर है. भाजपा के वोट गिरना तय है.’’

इसके अलावा गोवा में आप पार्टी के बढ़ते कदम पहले ही भाजपा के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं. सुकेरकर ने भी माना कि आप पार्टी गोवा के शहरी इलाकों तक पहुंच बनाने में कामयाब रही है. 

उन्होंने कहा, ‘वे शहरी इलाकों में सोशल मीडिया के जरिये अपनी पैठ बना चुके हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी जाति आधारित राजनीति हावी है, इसलिए आप वहां पर जगह नहीं बना पाई. जिला और तालुक स्तर पर स्थानीय नेताओं की पकड़ मजबूत है और आप के पास ऐसा कोई नेता नहीं है. इसलिए यहां इसका कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा.

First published: 14 December 2016, 7:30 IST
 
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