Home » राज्य » Gorkhaland Row: Novelist KS Mukhtan returns award as a mark of protesting Govt and supporting the GJM movement
 

अवॉर्ड वापसी रिटर्न्स: उपन्यासकार ने लौटाया पुरस्कार

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 July 2017, 16:21 IST
कैच न्यूज़

मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद असहिष्णुता के आरोप लगाते हुए दो साल पहले लेखकों ने अवॉर्ड वापसी अभियान शुरू किया था. चालीस से ज्यादा साहित्यकारों ने अपना साहित्य अकादेमी अवॉर्ड वापस कर दिया था.

इस लिस्ट में सबसे पहला नाम था हिंदी के चर्चित कथाकार उदय प्रकाश का, जिन्होंने कन्नड़ साहित्यकार एमएम कलबुर्गी की हत्या के बाद अपना साहित्य अकादेमी अवॉर्ड लौटा दिया था. मार्मिक कहानी मोहनदास के लिए उन्हें 2010-11 में ये सम्मान मिला था. ये सिलसिला ख़त्म हो चुका था, लेकिन अब एक बार फिर अवॉर्ड वापसी की शुरुआत हुई है और इसकी जड़ें हैं पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाक़े दार्जिलिंग में. 

साहित्यकार मुखतन ने लौटाया अवॉर्ड

एक महीने से गोरखालैंड की मांग को लेकर दार्जिलिंग में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का आंदोलन चल रहा है. अब इस आंदोलन के समर्थन में अवॉर्ड वापसी शुरू हो चुकी है. उपन्यासकार केएस मुखतन ने विरोध के तौर पर अपना अवॉर्ड वापस करने का एलान किया है. 

पढ़ें: अवॉर्ड वापसी में लेखकों और संस्कृतकर्मियों की संख्या 40 नहीं उससे ज़्यादा है

अवॉर्ड वापस करते हुए उन्होंने कहा, "दार्जिलिंग के लोग गोरखालैंड की मांग कर रहे हैं, जो उनका अधिकार है. मैं अपना अवॉर्ड वापस कर रहा हूं और इस आंदोलन में हिस्सा ले रहा हूं. सरकार के खिलाफ विरोध के प्रतीक और आंदोलन के समर्थन में मैं अपना अवॉर्ड सरकार को लौटा रहा हूं."

इसके अलावा कर्मा योंजान ने भी 2016 में सरकार द्वारा दिया गया अवॉर्ड वापस करने का एलान किया है. उनका कहना है, "दिसंबर 2016 में सरकार ने मुझे अवॉर्ड दिया था, जो विरोध स्वरूप मैं वापस कर रहा हूं. मुझे अवॉर्ड नहीं चाहिए बल्कि गोरखालैंड चाहिए."

इससे पहले बुधवार को गोरखालैंड समर्थकों ने दार्जिलिंग के चौरस्ता में गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन टूरिस्ट इंफॉर्मेशन के दफ्तर को फूंक दिया. हालांकि हादसे में किसी की जान नहीं गई है. अलग गोरखालैंड की मांग को लेकर दार्जिलिंग में एक महीने से गोरखालैंड जनमुक्ति मोर्चा का आंदोलन चल रहा है.

विरोध की एक वजह दसवीं तक के स्कूलों में बंगाली भाषा को अनिवार्य किए जाने का ममता सरकार का फैसला भी है. वहीं सीएम ममता बनर्जी ने दार्जिलिंग में तनाव के पीछे भाजपा का हाथ होने का भी आरोप लगाया था. गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष बिमल गुरुंग के दफ्तर और घर पर छापे के बाद दार्जिलिंग में हिंसा भड़क उठी थी.

First published: 13 July 2017, 16:12 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी