Home » राज्य » Harvest of misery: How note ban destroyed Punjab's potato farmers
 

आलू की बंपर पैदावार से पंजाब के किसान परेशान, नहीं मिल रहे ख़रीददार

राजीव खन्ना | Updated on: 28 February 2017, 9:32 IST


पंजाब के किसानों की परेशानी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. इस बार आलू की पैदावार खराब होने से किसान दोराहे पर खड़े हैं. प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी नीत केद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले का असर आलू की पैदावार वाले इलाकों में साफ देखा जा सकता है. होशियारपुर, जालंधर, अमृतसर, मोगा और पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के उना जिले में खास तौर पर आलू की खेती होती है.

आलू की कीमतें यहां 3 रूपए प्रति किलोग्राम तक गिर गई हैं. अब किसान पंजाब सरकार से हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं. सरकार ने भी उन्हें थोड़ी राहत देना शुरु कर दिया है. किसानों का दुखड़ा यह है कि उन्हें 3 रूपए प्रति किलोग्राम की दर में जो आलू बेचना पड़ रहा है, वह बहुत ही उत्तम क्वालिटी वाला है.

जालंधर आलू उत्पादक संघ (जेपीजीए) के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता व किसान जेपीएस गिल ने कैच नयूज को बताया किसानों ने अक्टूबर से नवम्बर माह के अंत तक आलू की खेती करनी शुरू कर दी थी. बिक्री के लिए पंजाब में उत्तर प्रदेश और गुजरात से करीब 20 दिन पहले खेती शुरू कर दी जाती है. लेकिन इस बार नोटबंदी के चलते किसान खेती का केवल 60 फीसदी उत्पान ही बाजार में लाए है. बाकी फसल खेतों में ही खड़ी है.


इसके अलावा गत वर्ष हुए आलू उत्पादन का 25 फीसदी माल अभी शीत गृह में ही पड़ा हुआ है. किसानों को उम्मीद है कि फरवरी में आलू के दाम बढेंगे. उस वक्त वे शीत गृह के लिए आलू की खेती करना शुरू करेंगे लेकिन आलू के दाम तो अब तक नहीं बढ़े. इसलिए अब उनके लिए दोहरी मार हो गई है. पहले वाली फसल बिकी नहीं और नई उगाने का समय आ गया.

 

हताश किसान

पंजाब में हर साल 25 लाख टन आलू का उत्पादन होता है. इसमें से 18 लाख टन शीत गृह के लिए होता है और बाकी का 7 टन फ्रेश बिक्री के लिए होता है.

जेपीएस गिल ने कहा कि व्यापार जगत में फसल के दामों को लेकर नकारात्मक रुख के चलते किसान हताश हैं. उन्होंने बताया नवम्बर में जब खेती समय चरम पर होता है और इस दौरान उन्हें आलू का बीज सप्लाई करने में अच्छी खासी परेशानी का सामना करना पड़ा. पंजाब से पश्चिम बंगाल और गुजरात तक आलू के बीज भेजे जाते हैं.


और इस साल नवम्बर में पूरा देश नोटबंदी के चलते कैश की समस्या से जूझ रहा था. हमारे पास ट्रक और ट्रक वालों को देने के लिए पैसे कैश नहीं थे और यही हाल व्यापारियों का था. उन्हें भी नकद भुगतान करने में खासी दिक्कतें पेश आईं. इस तरह सारी सामान्य व्यवस्था चरमराई हुई थी.

दाओबा क्षेत्र में 90,000 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू के बीज उगाए जाते हैं और यहां से कई राज्यों को इन बीजों की आपूर्ति की जाती है. पंजाब से दूसरे राज्यों को करीब 1.1 मीट्रिक आलू के बीज दूसरे राज्यों को भेजे जाते हैं. उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात और अन्य कई राज्यों को आलू के बीजों की आपूर्ति पंजाब से ही होती है. देश में बीजों की मांग का 63 फीसदी हर साल पंजाब से ही पूरा किया जाता है.


किसानों के अनुसार, सरकार ने जब तक यह घोषणा की कि बीज खरीदने के लिए पुराने नोटों का इस्तेमाल किया जा सकेगा. तब तक बहुत देर हो चुकी थी और आलू की बुवाई का समय निकल चुका था. पंजाब के किसान जहां 30 से 35 रूपए प्रति किलोग्राम के भाव से बीज बेच रहे थे लेकिन 8 नवम्बर के बाद तो खरीददार ही गायब हो गए. अब फरवरी और मार्च जैसे मौसम में जब खेती का समय चरम पर होता है. आलू की बम्पर पैदावार हुई है और कीमतें बुरी तरह धराशायी हो गई हैं. पिछले साल करीब 10 गुना कीमत थी.

 

सरकार से गुहार


इन हालात से चिंतित किसानों ने कुछ दिन पहले पंजाब सरकार का दरवाजा खटखटाया. किसानों ने अपनी परेशानियों का हवाला देते हुए सरकार से मांग की कि उनसे वसूला जाने वाला 2 प्रतिशत बाजार शुल्क और 2 प्रतिशत ग्रामीण विकास शुल्क खत्म किया जाए. साथ ही दलालों को दिया जाने वाला 5 फीसदी शुल्क भी कम किया जाए. उन्होंने 200 रूपए प्रति क्विंटल की दर पर 60 फीसदी सब्सिडी की मांग की.


नोटबंदी के बाद हुई परेशानी का हवाला देते हुए किसानों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें आलू निर्यात के लिए मदद दी जाए. पंजाब के आलू को रूस, ईरान, पाकिस्तान और मध्य पूर्व के कई देशों में पसंद किया जाता है. सरकार ने इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देते हुए पंजाब एग्रो एंड मार्कफेड एजेंसी को निर्देश दिए हैं कि वह मामले में दखल दे और किसानों का माल बाजार में ‘नो प्रोफिट नो लॉस के आधार पर बिकवा दे ताकि किसानों को कुछ तो राहत मिले.


अपनी अध्यक्षता वाली एक बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा, बाजार शुल्क और आरडीएफ को घटा कर 0.25 प्रतिशत कर दिया गया है. उन्होंने कमीशन एजेंटों को दी जाने वाली राशि में भी कटौती करने की बात कही है.

 

कहां हैं संभावनाएं

 

बादल ने पंजाब एग्रो एंड मार्क्फड को निर्देश दिए है कि वह आलुओं के रूस, दुबई, ईरान, श्री लंका और दुबई में निर्यात करने की संभावनाएं तलाशे. इसके लिए सरकार माल भाड़े का भार भी कम करने को तैयार है. इसके अलावा कृषि विभाग को आदेश दिए गए हैं कि वह देश के अन्य राज्यों के बाजार में आलू की बिक्री करवाने और सही मूल्य दिलवाने में मदद करे. विभाग को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वह राज्य के शीत गृहों में आलुओं के आनुपातिक वितरण की व्यवस्था करे ताकि आलू की जमाखोरी न की जा सके.


इसी बैठक में तय किया गया कि स्कूलों, जेल व अन्य सरकारी संस्थानों के लिए एक अधिसूचना जारी की जाए कि मिड डे मील में आलू की खपत ज्यादा से ज्यादा की जाए. हो सकता है इससे राज्य में आलू की बिक्री बढ़ जाए. जेपीजीए सरकारी एजेंसियों के साथ एक समझौता करने वाली है कि वह दक्षिण भारत में 25 लाख बोरे आलू बेचेगा और ईरान और रूस में 1.5 लाख टन आलू का निर्यात करेगा.


आम आदमी पार्टी ने हाल ही हुए विधानसभा चुनावों में भी यह मुद्दा उठाया था. पार्टी की प्रदेश संयोजक गुरप्रीत वराइच ने कहा था पंजाब के किसान शिअद-भाजपा गठबंधन की अनदेखी के चलते परेशान हैं. उन्होंने कहा पंजाब मंडी बोर्ड ने ऐसी कोई रणनीति नहींदबनाई है जिससे बम्पर पैदावार की स्थिति में किसानों की मदद की जा सके और न ही आलू उगाने वालों को राहत देने के लिए कोई व्यवस्था की गई.

 

First published: 28 February 2017, 9:32 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी