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ज़मीन बचाने के लिए मार्क्स, माओ का नाम लेकर चीन से गुहार लगाते हरियाणा के किसान

राजीव खन्ना | Updated on: 16 January 2017, 7:46 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

हरियाणा-दिल्ली सीमा पर स्थित अपनी जमीनों के लिए संघर्ष कर रहे किसान चीनी अधिकरियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए कार्ल मार्क्स, व्लादिमिर लेनिन और माओत्से तुंग जैसी हस्तियों के नामों का सहारा ले रहे हैं.

सोनीपत जिले के खरखोदा में भूमि बचाओ संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने चीनी प्रधानमंत्री को एक पत्र लिख कर मांग की है कि इस क्षेत्र में चीन के वंडा समूह ने जो भूमि अधिगृहीत की है, वह वापस की जाए. 

चीनी प्रधानमंत्री के साथ ही वंडा समूह के चेयरमैन वान जियांगलिन, भारत में चीन के राजदूत झांग यान और चीन में भरतीय राजदूत विजय गोखले के नाम भी ऐसा ही पत्र लिखा गया है. इस पत्र के माध्यम से किसानों ने 10,000 किसानों की इस मांग पर ध्यानाकर्षित किया है, जो पिछले 5 साल से अधिक समय से अपनी उपजाऊ भूमि को फिर से पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. वंडा समूह का कथित रूप से खरखोदा में 10 खरब डॉलर की औद्योगिक सिटी बनाने की योजना है.

किसानों की दुविधा

किसान अपनी 3,303 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं और जीवन भर लड़ने को संकल्पित हैं. समिति के नेता हंसराज राणा ने कैच से कहा, ‘यह 10,000 परिवारों की आजीविका का सवाल है. बहुत से किसानों ने अपनी जमीन के बदले मुआवजा ले लिया है और फतेहाबाद जैसे दूर दराज के इलाकों में 80 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जा रहा है और यहां के किसानों को 59 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जा रहा है. हम सरकार से अपील करते हैं कि उसे औद्योगिक जोन बनाने के लिए हमारी उपजाऊ जमीन के बदले बंजर जमीन का अधिग्रहण करना चाहिए.’

किसान 3,303 एकड़ भूमि के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं और जीवन भर लड़ने को तैयार हैं

उन्होंने कहा, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लम्बित है. आंदोलनकारी किसानों के वकील डॉ. शमशेर ने कहा, 'अफसरों ने राजनेताओं के साथ मिलीभगत करके उपजाऊ जमीन को भी बंजर दिखा दिया. सरकार इस भू अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं करती?'

रिपोर्टों के मुताबिक हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रीयल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवलेपमेंट कॉर्पोरेशन (एचएसआईआईडीसी) ने जनवरी 2015 में चीनी साझेदार दालियन वंडा के साथ खरखोदा में वंडा इंडस्ट्रीयल न्यू सिटी बनाने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे. 

यहां एक इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप बनाने के लिए भूपिन्दर सिंह हुड्डा नीत कांग्रेस सरकार के दौरान काफी बड़ी कृषि भूमि अधिगृहीत की गई. हालांकि वह योजना साकार नहीं हो सकी. किसानों का आरोप है कि अब वांडा समूह को यह जमीन थर्ड पार्टी ट्रांसफर के रूप में दे दी गई है. 

राणा ने कहा, ‘‘हमने चीनी अधिकारियों को लिखा है कि कांग्रेस और कम्युनिस्टों का जमीन अधिग्रहण का यह तरीका सिद्धान्तों के खिलाफ है.’’ किसानों ने पत्र में कहा हैः भारत के किसान और कर्मचारी वर्ग चीनी अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे इस मामले में जरूरी कार्यवाही कर इस सौदे को रद्द कर दें क्योंकि इससे गलत परम्परा की शुरूआत होगी और इससे

जब पूंजीवाद अपनी शर्तों पर साम्यवाद से मिलता है तो यह किसी भी तंत्र के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना से युवाओं को कोई फायदा नहीं होने वाला क्योंकि चीनी कम्पनी ने इस प्रोजेक्ट में किसी को भी रोजगार देने से इनकार कर दिया है. किसानों ने यह भी कहा चूंकि यह प्रोजेक्ट उपजाऊ भूमि पर बनेगा इसलिए यह स्थानीय पारिस्थितिकी और खेती दोनों के लिए नुकसानदेह है.

डॉ. शमशेर ने आगे कहा, ‘‘इसमें एक पक्ष सुरक्षा का भी है. भारत सरकार राजधानी से लगती हुई सीमा की जमीन पर चीन को कैसे अधिकार दे सकती है?’’ उन्होंने कहा आंदोलनकारी किसानों ने शुक्रवार को स्थानीय सांसद रमेश चंदर कौशिक का घेराव करने का विफल प्रयास किया. अब वे एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों का घेराव करने की तैयारी कर रहे हैं.

और भी आंदोलन हुए

गांव वालों ने जब से अपनी सरकार के बजाय चीनी अधिकारियों को पत्र लिखने का निर्णय किया तब से ही खरखोदा चर्चा में है. किसान केवल यही आंदोलन नहीं कर रहे. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में जमीन पर कब्जा देकर मुआवजा न लेने वाले किसानों ने एक केस जीता है. वे भी अब अपने नाम पर जमीन की फिर से रजिस्ट्री की मांग कर रहे हैं.

भूमि अधिग्रहण विरोधी संघर्ष समिति के नेता राजपाल ने कहा, ‘‘उन्हें जमीन का फैसला जल्द से जल्द करना चाहिए. यह निर्णय गत वर्ष 30 नवम्बर को आया था और हमें 31 एकड़ जमीन का मालिकाना हक वापस मिल गया है. 75 फीसदी लोगों

ने अपनी जमीन के बदले मुआवजा ले लिया था जबकि बाकी ने नहीं. कुछ मामलों पर अब भी सुनवाई चल रही है. इसीलिए हमारा धरना भी जारी है.’’

अभी तीन दिन पहले ही सोनीपत जिले के खुर्रमपुर गांव में ग्रामीणों ने किसान सभा नेता श्रद्धानंद सोलंकी के नेतृत्व में  स्थानीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा. मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को संबोधित इस ज्ञापन में 8 जनवरी को प्रशासन द्वारा 300 एकड़ की जमीन अधिग्रहण के खिलाफ अपील की गई है.

उन्होंने कहा, यह जमीन बिना नोटिस दिए अधिगृहीत की गई और अधिकारियों ने जमीन पर खड़ी फसल नष्ट कर दी. यह जमीन कुंडली-गाजियाबाद-पलवल एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए अधिगृहीत की गई. जिला प्रशासन ने दावा किया कि जमीन ग्राम पंचायत की है, जिस पर ग्रामीणों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया था. यह भी दावा किया कि ग्रामीणों को जमीन खाली करने के लिए नोटिस भेजे गए थे.

First published: 16 January 2017, 7:46 IST
 
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