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राजभवन में खटकरम? वी षणमुगनाथन ने एनडी तिवारी की याद दिलाई

चारू कार्तिकेय | Updated on: 11 February 2017, 5:45 IST

दिसंबर 2009 में एक तेलुगू टीवी न्यूज चैनल ने एक वीडियो फुटेज प्रसारित करके आंध्र प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी थी. दावा था कि राज्य के तत्कालीन राज्यपाल एनडी तिवारी के तीन औरतों के साथ यौन संबंध हैं.

इस घटना की प्रतिक्रिया में राजभवन के बाहर व्यापक जन-विरोध हुआ. तिवारी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की गई और पुलिस ने राजभवन में काम करने वालों से पूछताछ भी की. तिवारी ने इस घटना के लिए सार्वजनिक माफी मांगी, पर उन्होंने 'राजनीतिक षडयंत्र' का आरोप भी लगाया. उन्हें नई दिल्ली ने इस्तीफा देने को कहा और उन्होंने ऐसा ही किया. संयोग से तिवारी ने भी हाल ही में भाजपा का दामन थामा है.

मेघालय के राज्यपाल वी षणमुगनाथन के हाल के इस्तीफे ने तिवारी कांड की याद ताजा कर दी. दोनों घटनाओं ने राज्यपाल के उच्च-संवैधानिक पद को लांछित  किया. अंतर केवल इतना है कि इस बार वीडियो फुटेज का प्रदर्शन नहीं हुआ. इस बार राजभवन के स्टाफ ने राज्यपाल के खिलाफ आवाज उठाई है. यह बात वास्तव में अनोखी है.

खबर आई कि शिलॉन्ग में राजभवन के लगभग 80 कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर षणमुगनाथन के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज करवाईं.   कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें बर्खास्त किया जाए. चिट्ठी में आरोप था कि राज्यपाल राज्य की शीर्ष संवैधानिक संस्था का गौरव कम कर रहे हैं... वे रूखे, अहंकारी, तुनक मिजाज और बेईमान हैं. उन्होंने राजभवन की गरिमा के साथ गंभीर समझौता किया है. उन्होंने राजभवन को 'लेडीज क्लब' बना दिया है.'

चिट्ठी के प्रमुख आरोप

  • राजभवन में राज्यपाल के सीधे आदेश से अनजान युवतियों के आने-जाने की जगह बन गया है. राजभवन की सुरक्षा के साथ भी गंभीर समझौता किया जा रहा है. सभी जानते हैं कि इनमें से कई युवतियों की सीधी पहुंच उनके बेडरूम तक है.
  • राज्यपाल बनने के बाद उन्होंने ये नियुक्तियां कीं- चेन्नई से एक औरत को निजी कुक नियुक्त किया. एक अन्य औरत को जोरहट, आसाम से पहले उनका निजी सहायक और बाद में पीआरओ नियुक्त किया.
  • केवल पीआरओ नहीं, बल्कि उसके रिश्तेदार और दोस्तों को भी राज्यपाल के निर्देशानुसार राजभवन में निशुल्क रहना, खाना, धुलाई, प्रसाधन का सामान, वाहन और रुकने की सुविधाएं दी गईं.
  • रात और दिन की ड्यूटी के लिए एक-एक नर्स नियुक्त की गई, जबकि राजभवन में चिकित्सा के लिए पहले ही एक डॉक्टर और दो सहयोगियों का स्थाई स्टाफ है.
  • कई  'तथाकथित' नर्सें राजभवन में अलग-अलग समय पर रहीं. एक छोड़ गई क्योंकि उसका आरोप था कि राज्यपाल ने रात में उनके साथ गलत व्यवहार किया.
  • पीआरओ के पास कोई ऑफिस नहीं है. वह अपने बेडरूम से ही काम करती हैं, जो राज्यपाल के बेडरूम से सटा हुआ है.
  • मणिपुर दौरे पर जाते वक्त भी वह राज्यपाल के साथ रहती हैं और इम्फाल के राजभवन में उनके साथ ही रहती हैं.
  • 7 नवंबर, 2016 को कुल 10 महिला उम्मीदवारों को पीआरओ की पोस्ट के इंटरव्यू के लिए बुलाया गया. उनमें से एक महिला के साथ छेड़छाड़ की गई.

इन शिकायतों के अलावा स्टाफ ने खुद के साथ षणमुगनाथन द्वारा मनमानी और असंवेदनशीलता की शिकायत भी की.

षणमुगनाथन कौन हैं?

षणमुगनाथन का मई 2015 में मेघालय का राज्यपाल बनाए जाने तक कोई खास राजनीतिक वजूद नहीं था. तमिलनाडु के तंजावुर के रहने वाले 68 वर्षीय षणमुगनाथन पहले आरएसएस में थे. बाद में उन्हें भारतीय जनता पार्टी में भेज दिया गया था.

उन्होंने सहायक सचिव, भाजपा संसदीय पार्टी जैसे विभिन्न पदों पर रहते हुए पार्टी के लिए काम किया है. उन्होंने पार्टी का रक्षा, शोध और विदेशों में भाजपा के समर्थक जैसे महकमे संभाले.

वे राजनीतिशास्त्र में स्नातकोत्तर और एमफिल होने का दावा करते हैं. यह भी कहा जाता है कि उन्होंने संस्कृति और समाज जैसे विषयों पर तीन किताबें लिखी हैं, सभी तमिल में.

शिलॉन्ग टाइम्स की संपादक पैट्रिशिया मुकहिम उन्हें 'आरएसएस प्रचारक कहती हैं जो पद के वैभव से बिगड़ गए.' उन्होंने छेड़छाड़ की घटना की पुष्टि की और उसका विस्तृत ब्यौरा भी दिया.

पैट्रीशिया यह भी मानती हैं कि चूंकि षणमुगनाथन राज्यपाल पद पर नियुक्ति से पहले कभी मेघालय नहीं गए थे इसलिए वे वहां की संस्कृति से जरूर हैरान हुए होंगे. उन्होंने मेघालय की औरतों के खुलेपन का गलत फायदा उठाया. यहां की औरतें आत्मनिर्भर हैं और बिना किसी रोकटोक के रहती हैं, घूमती हैं. शायद इसीलिए यौन शोषण को आमंत्रण देती लगती हैं.'

मनमानी का आरोप

षणमुगनाथन के खिलाफ राजभवन के स्टाफ की यह शिकायत भी थी कि उन्होंने राज्यपाल के मुख्य सचिव को रातोंरात हटा दिया, केवल इसलिए कि वह राज्यपाल को 'उनकी गलत गतिविधियों' में साथ नहीं दे रहे थे.

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में यह भी शिकायत की गई है कि उन्होंने अधिकारियों और स्टाफ को 'अपमानित किया, उन्हें नीचा दिखाया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया.' इस हद तक कि तत्कालीन उपसचिव को ब्रेन स्ट्रोक हुआ और अंतत: नवंबर 2016 को अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई.

उनका यह आरोप भी था कि राज्यपाल ने 'राजभवन के कर्मचारियों पर भरोसा नहीं किया और तीन असम राइफल्स वर्दीधारी कर्मियों को उन कामों के लिए रखा, जिनके लिए पहले से कर्मचारी नियुक्त थे.

पत्र में शिकायत की गई है कि- राज्यपाल के एडीसी को कहीं भी आने-जाने की छूट मिली हुई है. वे अन्य कर्मचारिओं पर हुक्म जमाते हैं और अश्लील भाषा का प्रयोग करते हैं.

राजभवन स्टाफ का यह विरोध केंद्र के लिए झेलना बड़ा मुश्किल हो गया था. भाजपा के सूत्रों ने कैच को बताया कि षणमुगनाथन को बर्खास्तगी की अप्रियता से बचाने के लिए इस्तीफा देने को कहा गया.

First published: 28 January 2017, 8:05 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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