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कांग्रेसी नाव के खेवनहार साबित हो पाएंगे सिद्धू?

राजीव खन्ना | Updated on: 12 January 2017, 8:26 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

बल्लेबाज होने के नाते नवजोत सिंह सिद्धू जानते हैं कि उन्हें कब स्ट्रोक मारना है. कांग्रेस पार्टी में उनके आने को भी ठीक समय पर लगाया गया स्ट्रोक माना जा रहा है. कांग्रेस पार्टी इस सेलिब्रिटी का पूरा फायदा उठाना चाहती है. सिद्धू बोलने में माहिर हैं और उनके इसी कौशल का पंजाब विधानसभा चुनावों के अभियानों में बेहतर उपयोग हो सकता है.

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष कप्तान अमरिंदर सिंह ने ऐलान किया है कि वे अमृतसर (पूर्व) के निर्वाचन क्षेत्र से खड़े होने के साथ ही पार्टी का प्रचार भी करेंगे. इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व पहले उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने किया था.

नवजोत कौर, हॉकी के पूर्व कप्तान ओलंपियन परगट सिंह के साथ पिछले महीने कांग्रेस में शामिल हुई थीं. नवजोत सिंह काफी पहले कांग्रेस में आ जाते, पर कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के सुझाव पर उनका आना स्थगित कर दिया गया था.

किशोर पार्टी में उनके आने के लिए सही समय का इंतजार कर रहे थे, जिससे चुनावी अभियान को और गति मिल सके. कहा जा रहा है कि सबसे पुरानी पार्टी में उनके आने को लेकर किंतु-परंतु से कांग्रेस को लाभ मिला है क्योंकि नवजोत सिंह मीडिया और लोगों की नजर में काफी रहे हैं. खबर यह भी है कि वे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में पार्टी में शामिल होना चाहते थे.

सिद्धू बड़ा कैच

सिद्धू को हाल के दिनों में कांग्रेस का सबसे महत्वपूर्ण ‘कैच माना जा रहा है.’ कांग्रेस की चुनावी मशीनरी को इससे राहत है कि वे आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल नहीं हुए, जैसा कि राज्यसभा से भाजपा सांसद के तौर पर इस्तीफा देते वक्त समझा जा रहा था. बताया जा रहा है कि उनकी आप के राष्ट्रीय संचालक और दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविंद केजरीवाल सहित आप के अन्य नेताओं के साथ काफी बैठकें हुईं, पर वे पार्टी में शामिल नहीं हुए. 

कांग्रेस कैंप के एक कार्यकर्ता ने कहा, ‘अगर नवजोत उस वक्त आप में शामिल हो जाते, और अगर आप उनके साथ मुख्य वक्ता के तौर पर रैलियां करती, तो हमें अपना बोरिया बिस्तर समेटना पड़ जाता.’

केजरीवाल सहित आप के नेता अब तक कह रहे थे कि आप ने उन्हें पंजाब में पार्टी के सत्ता में आने के बाद उप मुख्यमंत्री पद देने को कहा था, पर उन्होंने इनकार कर दिया. वे अमरिंदर पर कटाक्ष कर रहे थे कि शायद कांग्रेस उनको इससे ज्यादा देना चाहती है. यानि कांग्रेस के मुख्यमंत्री की उम्मीदवारी. 

केजरीवाल कहते रहे हैं कि कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी अमरिंदर से नाराज हैं और अभियान में इस्तेमाल करने के बाद हो सकता है कि वे उन्हें निकाल दें. अमरिंदर ने कहा है कि कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद नवजोत सिंह को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने पर कोई चर्चा नहीं हुई है.

हिट रहेंगे सिद्धू

इसमें कोई शक नहीं कि जब नवजोत सिंह राज्य का दौरा शुरू करेंगे, पार्टी के लिए भीड़ जुटाने में सफल रहेंगे. जब से भाजपा ने उन्हें अमृतसर की लोकसभा सीट के लिए टिकट देने से इनकार किया है तब से वे भाजपा के लिए उदासीन हो गए थे. उनकी जगह भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली को टिकट दिया गया, जिन्हें नरेंद्र मोदी के पक्ष में देश में लहर होने के बावजूद अमरिंदर सिंह से करारी हार मिली थी. 

भाजपा ने उनकी गैरमौजूदगी तब खासतौर पर महसूस की जब दिल्ली में उसे आप से और बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार से भारी हार मिली थी. अमृतसर में उनकी लोकप्रियता के मद्देनजर कांग्रेस को उनसे लोकसभा उपचुनाव में भी लाभ मिलेगा, जिसका ऐलान 4 फरवरी के लिए किया गया है. यह उपचुनाव राज्य में 117 विधानसभा सीटों के चुनाव के साथ होगा. 

सिद्धू की लोकप्रियता

नवजोत सिंह को ऐसे सांसद के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में काम किया है. उनकी लोकप्रियता इतनी है कि वे जिन उम्मीदवारों का भी समर्थन करेंगे, उनकी भाजपा समर्थकों पर जीत होगी. दिलचस्प है कि जेटली ने अमृतसर लोकसभा के उपचुनाव पर चुप्पी साध रखी है. 

अमरिंदर ने उन्हें उपचुनाव लडऩे की चुनौती तक दी है और मोदी सरकार की हाल की नोटबंदी पर जनमत संग्रह के लिए भी कहा है, जहां जेटली वित्त विभाग देखते हैं. कुछ अखबारों में नवजोत सिंह के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर जेटली की चुप्पी पर व्यंगात्मक टिप्पणियां थीं.

चुनाव लड़ेंगे?

किसी भी पार्टी ने अमृतसर लोकसभा सीट के लिए अपने उम्मीदवार की अभी तक घोषणा नहीं की है. दरअसल भाजपा को अब भी 23 विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा करनी है, जो अकाली के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. हल्ला है कि अगर नवजोत सिद्धू विधानसभा चुनाव लड़ते हैं, तो कांग्रेस पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रणीत कौर को खड़ा कर सकती है. 

पंजाब की नदियों के पानी को साझा करने के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय के विपरीत आदेश के कारण इस सीट को पिछले साल अमरिंदर ने छोड़ा था. तब अमरिंदर के साथ सभी कांग्रेस विधायकों ने राज्य विधानसभा से इस्तीफे दे दिए थे. राज्य में भाजपा की सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल (सद) ने नवजोत सिंह की सबसे ज्यादा आलोचना की है. पार्टी ने अमरिंदर के इस दावे की हंसी उड़ाते हुए कि नवजोत सिंह अमृतसर (पूर्व) निर्वाचन क्षेत्र से लड़ेंगे, कहा कि पूर्व क्रिकेटर कांग्रेस पार्टी की डूबती नैया को बचा नहीं सकते. 

चुनाव कॉमेडी शो नहीं

अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल के सलाहकार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि लोग कांग्रेस पार्टी में होने वाले रोज के सर्कस से हैरान हैं. अब वह सत्ता में आने के मौके बढ़ाने के लिए पूर्व क्रिकेटर से चुनाव लड़ने का अनुरोध कर रही है. यह दावा करते हुए कि सिद्धू दंपति कांग्रेस का कोई भला नहीं कर सकता, उन्होंने कहा कि किसी कॉमेडी शो को होस्ट करना अलग बात है और राजनीतिक रूप से काम करना अलग बात. 

उन्होंने कहा कि नवजोत सिंह भूल गए हैं कि वह अकाली दल ही थी, जिसने अमृतसर लोकसभा से संसद के चुनाव में उन्हें सहयोग किया था और उनका कोई चमत्कारिक व्यक्तित्व नहीं है. सिरसा कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी उन्हें खड़ा करती है, तो उनकी अकाली-भाजपा गठबंधन के उम्मीदवारों के सामने हार होगी. 

नवजोत सिंह की सबसे बड़ी कमी यह है कि उन्होंने पंजाब के विवादास्पद मुद्दों पर कभी साथ नहीं दिया, चाहे वह पिछले साल पवित्र पुस्तकों पर डिसर्टेशन का रहा, दीना नगर और पठानकोट में आतंकी हमलों का रहा, पंजाब की नदियों के पानी की साझेदारी का या हाल की नोटबंदी का. उम्मीद है कि एक बार पार्टी में शामिल होने के बाद जब सार्वजनिक सभाओं में वे आना-जाना शुरू करेंगे तब स्थिति और साफ होगी.

First published: 12 January 2017, 8:26 IST
 
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