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आरएसएस ने बंगाल में पांव जमाने के लिए ‘जेहादी’ मुद्दा उठाया

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 March 2017, 9:13 IST

 

आरएसएस ने बंगाल में पांव जमाने के लिए नई रणनीति अपनाई है. उसने बड़े प्यार से सत्तासीन पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस को कहा है कि राज्य में उसके शासन से उन्हें कोई समस्या नहीं है, बल्कि वह तो चाहता है कि उसका शासन बना रहे.


पश्चिम बंगाल आरएसएस के सचिव जिश्नु बोस ने कहा, ‘हमें तृणमूल कांग्रेस से कोई समस्या नहीं है. पर वे राज्य में सांप्रदायिक हिंसा नहीं भड़काएं. अगर इस तरह की सांप्रदायिक घटनाओं को नियंत्रित नहीं किया गया, तो पश्चिम बंगाल गहरे संकट में आ जाएगा.’ उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुस्लिम समुदाय के एक नेता को मंत्री तक बना दिया है, जिन पर सांप्रदायिक हिंसा उकसाने का आरोप है. हालांकि बोस ने उन नेता का नाम नहीं बताया. बोस ने राज्य में पिछले कुछ सालों में हुई सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं के बारे में भी बताया.

 

आरएसएस की योजना


बंगाल में आरएसएस की दोहरी योजना है-वह खुद का विस्तार करना चाहता है, साथ ही लोगों को बताना चाहता है कि पश्चिम बंगाल में कथित जेहादी संगठन अपनी जड़ें जमा रही हैं. आरएसएस के सूत्रों का कहना है कि उनका लक्ष्य राज्य में शाखाओं की संख्या बढ़ाना है. फिलहाल पश्चिम बंगाल में करीब 1700 शाखाएं हैं, जो देशभर के 57 हजार शाखाओं का बहुत छोटा हिस्सा है. राज्य में 20 हजार प्रचारक हैं. बोस के मुताबिक, ‘पश्चिम बंगाल के लिए विस्तृत योजना बनाई गई है और संघ परिवार का मुख्य उद्देश्य राज्य की कथित जेहादी शक्तियों के बारे में लोगों को जागरूक करना है.’


उन्होंने आगे बताया, ‘सबसे पहले आरएसएस राजनीतिक पार्टियों से संपर्क करेगा और उनसे ऐसे तत्वों के खिलाफ लडऩे का अनुरोध करेगा. बाद में वह घर-घर जाकर इस मुद्दे पर कैंपेन चलाएगा.’

पश्चिम बंगाल में संसदीय मामलों के मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा, ‘इससे साफ जाहिर है कि आरएसएस राज्य में सांप्रदायिक तनाव को हवा देन और धर्म के आधार पर लोगों के विभाजन की कोशिश कर रहा है. हमारा हर संभव प्रयास रहेगा कि बंगाल में सर्वधर्म सम्मान की स्थिति प्रभावित नहीं हो.’ सीएम ममता बनर्जी ने भी एक इंटरव्यू में कहा कि आरएसएस की सांप्रदायिक विभाजन की कोशिश को सख्ती से लिया जाएगा.

First published: 29 March 2017, 9:13 IST
 
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