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कैशलेस अर्थव्यवस्था का सपना और भूखमरी के कगार पर चाय बागान के हज़ारों मज़दूर

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 5 December 2016, 7:28 IST
QUICK PILL
  • पश्चिम बंगाल के 287 चाय बाग़ानों का उद्योग भीषण संकट में है. बैंक अकाउंट खुलवाने की मजबूरी के चलते यहां काम कर रहे मज़दूरों को उनका मेहनताना नहीं मिल पा रहा है.
  • सवाल यह भी उठ रहा है कि जब देशभर में मज़दूरों की यही हालत है तो प्रधानमंत्री भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था का सपना कैसे दिखा सकते हैं.

एक तरफ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कैशलेस भारत का सपना दिखा रहे हैं, दूसरी तरफ़ पश्चिम बंगाल के चाय बाग़ानों के मज़दूर निरक्षर होने के नाते बैंक अकाउंट नहीं खोल पा रहे हैं. उनकी सैलरी अटकी हुई है और खाने के लाले पड़ गए हैं. 

यहां काम करने वाले ज़्यादातर मज़दूर निरक्षर हैं और 80 फीसदी के तो बैंकों में अकाउंट तक नहीं हैं. कुछ दिन पहले दार्जलिंग और जलपाईगुड़ी के ज़िला मजिस्ट्रेटों ने राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सौंप कर इन कामगारों की तकलीफ़ों के बारे में बताया था. रिपोर्ट में कहा गया था कि ये मज़दूर बैंक अकाउंट नहीं खोल सकते क्योंकि ये किसी भी भाषा में बैंक का फॉर्म नहीं भर सकते.

दूसरी तरफ़ केंद्र सरकार ने निर्देश दिया था कि 5 दिसम्बर तक इन सभी मज़दूरों के बैंक अकाउंट खोले जाएं मगर सबसे बड़ा सवाल है कि कैसे? अगर अकाउंट खुल भी जाए तो क्या वे बिना दस्तख़त अपनी मज़दूरी अकाउंट से निकाल पाएंगे? श्रम संगठनों का मानना है कि यह नामुमकिन है. दरअसल, यह सारी मुसीबत उस वक़्त शुरू हुई, जब सरकार ने मज़दूरों का वेतन सीधे बैंक अकाउंट में डालने के लिए निर्देश दिया था. 

संकट गंभीर

आरबीआई के नए निर्देश के मुताबिक चाय बागानों के मज़दूरों का वेतन डीएम के अकाउंट से नहीं दिया जा सकेगा. इससे स्थिति और गंभीर हो गई है. अब ये मज़दूर चाय बागानों के मालिकों से उधार लेने को मजबूर है. जलपाईगुड़ी और दार्जलिंग के जिला प्रशासन का एक सर्वे कहता है कि 80 फीसदी चाय बाग़ान मज़दूर निरक्षर हैं और बैंक अकाउंट नहीं खोल सकते.

287 चाय बाग़ानों में से 119 बागा़न के मजदूरों को 29 अक्टूबर से वेतन नहीं मिला है.

जलपाईगुड़ी के बंदापानी चाय बागान के एक मज़दूर सूरज साहा ने कहा, 'हमें पता ही नहीं है कि बैंक अकाउंट कैसे काम करता है. पिछले हफ्ते एक सरकारी अधिकारी मेरे साथ अकाउंट खुलवाने बैंक गए लेकिन मुझे लिखना ही नहीं आता तो मैं बैक से पैसे कैसे निकालूं?’ साहा कहते हैं, ‘यही हाल रहा तो चाय बागान मज़दूर आने वाले दिनों में भूखों मर जाएंगे.

चुनौतियां

यहां तक कि चाय बागान के मालिकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. वे मजदूरों की परेशानी भी ठीक ढंग से सामने नहीं रख पा रहे. इन सारी गड़बड़ियों के चलते कुछ महीनों में चाय उत्पादन पर असर पड़ सकता है. जलपाईगुड़ी में रामझोरा चाय बागान के ऑफिसर इंचार्ज रमेश शर्मा ने कहा, ‘हम बहुत परेशान हैं. हम उनसे और काम कैसे करवा सकते हैं, जब तक कि उनके पिछले काम के पैसे नहीं दे देते. पश्चिम बंगाल के चाय उद्योग के लिए यह वाकई मुश्किल दौर है और इससे निश्चित तौर पर चाय के उत्पादन पर असर पड़ सकता है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, चाय बागानों के हालात दयनीय हैं. 287 चाय बागान में से 119 के मजदूरों को 29 अक्टूबर से वेतन नहीं मिला है. इससे ढाई लाख मजदूर परेशान हैं.

First published: 5 December 2016, 7:28 IST
 
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