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पंजाब: बादल की लंबी में सेंध लगाने पहुंचे कप्तान और जरनैल

आदित्य मेनन | Updated on: 19 January 2017, 3:56 IST
(कैच न्यूज़)

पंजाब-हरियाणा सीमा से 15 किमी पहले राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक छोटा-सा गांव है, लंबी. यहां छोटी दुकानें, एक गुरुद्वारा, एक स्कूल और एक पुलिस स्टेशन है. एक रेस्तरां भी है, जिसका बड़ा अजीब नाम है, कोप्स कैफे. जैसा कि नाम से लगता है, यह पुलिस स्टेशन के पास है. इसे देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह पंजाब-राजनीति की सबसे प्रभावी शख्सियत, शिरोमणि अकाली दल के बुजुर्ग नेता प्रकाश सिंह बादल का गढ़ है. 

लंबी अब पंजाब की राजनीति में कड़े मुकाबलों का गवाह बनने जा रहा है. यहां कांग्रेस नेता कप्तान अमरिन्दर सिंह और मुख्यमंत्री बादल के बीच चुनावी मुकाबला होगा. लंबी वो सीट है, जहां से बादल 1997 से ही लगातार जीतते रहे हैं जो मुख्तसर जिले का ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र है. 

बादल का गढ़

यहां बादल परिवार का पुश्तैनी गांव है जहां से प्रकाश सिंह बादल ने सरपंच के तौर पर अपना राजनीतिक कॅरियर शुरू किया था. लंबी इसलिए जाना जाता है कि यह भारत के तत्कालीन सबसे छोटे सरपंच से लेकर देश को सबसे बुजुर्ग मुख्यमंत्री देने वाला निर्वाचन क्षेत्र भी है. 9 साल की उम्र में पहली बार बादल को सबसे कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है. उनकी जीत लांबीवासियों पर निर्भर है कि वे 4 फरवरी को क्या फैसला लेते हैं. 

जब अमरिन्दर ने बादल के विरुद्ध चुनाव लडऩे का ऐलान किया था, उसके एक दिन बाद कैच रिपोर्टर ने लंबी का दौरा किया. यहां मुख्यमंत्री के लिए काफी गुस्सा है. बावजूद इसके, ज्यादातर का रुख़ कांग्रेस की ओर नहीं था. आम आदमी पार्टी (आप) को जरूर मुख्य विकल्प के तौर पर देख जा रहा था. रविवार दोपहर, आप नेता भगवंत मान ने लंबी में रोड शो किया, जिसे जबर्दस्त प्रतिक्रिया मिली. 

अकाली समर्थक महेंद्र सिंह कहते हैं, ‘आसपास के सभी गांवों से लोग आए...यहां पहले भी रोड शो हो चुके हैं, पर अब तक के रोड शो में यह सबसे सफल है.’ 70 साल के सिंह ने बादल को राजनेता के रूप में हमेशा आगे बढ़ते देखा है. वे कहते हैं, ‘मैंने पंजाब को काफी चुनौतीपूर्ण सालों से गुजरते देखा है लेकिन इस बार स्थितियां भिन्न हैं.’

सिंह अकाली समर्थक हैं, फिर भी आप से ज्यादा प्रभावित लगे. वे कहते हैं, ‘आप किसी भी अकाली, भाजपा या कांग्रेस रैली में जाएं, लोगों को शामिल होने के लिए पैसा दिया जाता है पर ऐसा आप के साथ नहीं है. लोग मर्ज़ी से आते हैं और इस रोड शो में भी लोग ख़ुद आए हैं.’

मान के रोड शो से पहले लंबी किला बन गया था. बस में भर कर आए पुलिसकर्मी यहां तैनात थे. इस डर के नाते कि कहीं बादल पर हमला करने से स्थानीय लोग भड़क ना जाएं. मगर लंबी के जगजीत सिंह ने कहा, ‘पुलिस की तैनाती यहां लोगों को डराने के लिए की गई थी.’ जगजीत सिंह ने लंबी से चुनाव लड़ने के कैप्टन के फैसले को तिकड़म बताकर खारिज कर दिया. 

तीनों दावेदार दमदार

उन्होंने कहा, ‘यह महज प्रचार का हथकंडा है. 5-6 सीटों पर हमेशा कांग्रेस और अकालियों के बीच ‘सेटिंग’ रहती है. वे मतदाताओं को भ्रम में डालने के लिए ऐसा कर रहे हैं, जो अन्यथा आप को वोट करने का सोच रहे थे.’ यहां से आप ने वरिष्ठ नेता जरनैल सिंह को खड़ा किया है, जो दिल्ली में राजौरी बाग के निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के विधायक थे. लंबी में जिन लोगों से कैच ने बात की, उनमें से ज्यादातर ने कहा कि हो सकता है, आप नहीं जीते, पर बादल के साथ कड़ा मुकाबला जरूर रहेगा. 

लंबी में ही रहने वाले बाली ने कहा, ‘अब तक कांग्रेस का नामोनिशान नहीं था. यहां कांग्रेस का पोस्टर तक नहीं है. आप को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है. उनकी रैली ने अच्छी-खासी भीड़ जुटाई.’ 

दुकानदार सतनाम शर्मा ने कहा, ‘लोग यहां अकाली दल से खुश नहीं हैं. हो सकता है, बादल साहब खुद अच्छा सोच रहे हों, पर उनके आसपास के लोगों ने हमारे लिए चीजें मुश्किल बनाईं. हम उनके पास मदद के लिए जाएंगे, वे विचार करने का वादा करेंगे और कुछ नहीं होगा.’

अकाली कार्यकर्ता मानते हैं कि वे मान के रोड शो को मिली प्रतिक्रिया से हैरान हुए. कैप्टन की चुनौती के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘कड़ा मुकाबला रहेगा. कप्तान साहब वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें हराना आसान नहीं होगा.’ सुखजिंदर सिंह ने माना, ‘फिर भी यह हमारा सबसे कड़ा मुकाबला है.’

अकालियों की चिंता

अकाली कार्यकर्ता नर्वस हैं. वे महसूस करते हैं कि अगर बादल लंबी में बच जाते हैं, तो भी पूरे राज्य में जीतना उनके लिए काफी मुश्किल रहेगा. सतनाम शर्मा कहते हैं कि बादल लंबी में फिर भी जीत सकते हैं क्योंकि विपक्ष के वोट बंट सकते हैं. वे कहते हैं, ‘शुरू में कांग्रेस के ज्यादातर समर्थक आप को वोट देने की योजना बना रहे थे. अब जाहिर है, वे कप्तान को वोट करेंगे.’

महेंद्र सिंह महसूस करते हैं कि आप के आगे बढऩे ने अमरिन्दर सिंह को लंबी से लडऩे के लिए बाध्य किया है. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस से ज्यादा आप अकालियों का विरोध कर रही थी लेकिन कप्तान को वह जगह फिर से लेनी पड़ी.’ 

लंबी में आप के आगे बढऩे में दो तरह से कटौती हो सकती है. या तो जैसा सतनाम कहते हैं, बादल अकाली-विरोधी वोटों में विभाजन से जीत सकते हैं. या लांबी में आप द्वारा बनाए बादल-विरोधी माहौल से कप्तान को फायदा उठाना चाहिए. दोनों ही मामलों में 89 साल के अकाली राजनेता अपने घरेलू मैदान में आसानी से हाशिए पर डाल दिए गए हैं.

First published: 19 January 2017, 3:56 IST
 
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